Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

बेबाक हो जाए

 बेबाक हो जाए। चुनौतियों का सामना करते हैं, सच्चाई के लिए लड़ते हैं, इंसानियत पर डट कर चलते हैं चलो …


 बेबाक हो जाए।

डॉ. माध्वी बोरसे!

चुनौतियों का सामना करते हैं,

सच्चाई के लिए लड़ते हैं,

इंसानियत पर डट कर चलते हैं

चलो निडर बनते हैं!

आंसुओं को मुस्कान में बदलते हैं,

अच्छाइयों में ढलते हैं,

हिम्मत कभी नहीं हारते हैं,

चलो साहसी बनते हैं!

भ्रष्टाचार का बहिष्कार करते हैं,

गलत आदतों से लड़ते हैं,

असफलताओं से नहीं घबराते हैं,

चलो बहादुर बनते हैं!

आत्मविश्वास स्वयं में रखते हैं,

अवसरों को नहीं गवाते हैं,

रुके बिना, झुके बिना आगे की और बढ़ते हैं,

चलो वीरता लाते हैं!

डर का सामना करते हैं,

संघर्ष करने से नहीं डरते हैं,

शिक्षा प्राप्त कर, अपने अधिकार के बारे में जानते हैं,

चलो निर्भय बन जाते हैं!!

डॉ. माध्वी बोरसे!

(स्वरचित व मौलिक रचना)

राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

नंबर आएगा सभी का- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

नंबर आएगा सभी का कत्ल नहीं हुआ अब तक हमारा धर्म मानने वालों में से किसी का,हमारी जाति में से

कोई कुछ साथ न ले जा पाया- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 27, 2021

कोई कुछ साथ न ले जा पाया रिश्वतें देकर रुपयों-पैसों,कीमती धातुओं, हीरे-जवाहरात की,दिन-रात स्तुति गान में रमे रहकर,सौदे बहुत किये

साड़ी- सुधीर श्रीवास्तव

December 27, 2021

साड़ी साड़ी सिर्फ़ परिधान नहींस्त्री गौरव की भी शान हैसाड़ी विश्व में भारतीय नारियों कामान सम्मान स्वाभिमान है। साड़ी में

क्रिसमस-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 25, 2021

क्रिसमस! क्रिसमस है  एक प्रसिद्ध त्योहार, सैंटा क्लॉस जी का हर बच्चा करता है इंतजार, 25 दिसंबर को मनाया जाता

तुम देना साथ सदा-नंदिनी लहेजा

December 23, 2021

तुम देना साथ सदा। नन्हा सा अंकुर बन जब, मैं मातृगर्भ में आया। मेरे अस्तित्व को सींचा माँ ने, था

ठिठुरता ठंड – डॉ इंदु कुमारी

December 23, 2021

ठिठुरता ठंड कंपकपाती ये रातें सिसकती रही यादेंठिठुरते हुए ठंड की बीत गयी रे बचपनआ गयी बर्फीली सीजर्रा -जर्रा हिलानेथरथराती

Leave a Comment