Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Archana-lakhotiya, poem

बेटी

बेटी सावन में डाली का झूला है बेटी।उपवन में खिलता गुलाब है बेटी।उगते हुए सूर्य की लाली है बेटी।सन्ध्या में …


बेटी

बेटी
सावन में डाली का झूला है बेटी।
उपवन में खिलता गुलाब है बेटी।
उगते हुए सूर्य की लाली है बेटी।
सन्ध्या में दिया बाती है बेटी।
आसमाँ में टिमटिमाता तारा है बेटी।
रसों में श्रृंगार सी होती हैं बेटी।
अलंकारों में उपमा सी होती हैं बेटी।
माता पिता की आन है बेटी।
भाई की राखी का मान है बेटी।
उदासी में उल्लास का संचार है बेटी।
गम की हर दवा का उपचार है बेटी।
बेटियों से ही घर की पहचान होती है।
एक,दो नही ये तीन कुलों की आन होती है।
धन्य है वह माता पिता
जिनके घर में बेटियो का हुआ पदार्पण।
बेटियों जितना भला कहाँ मिलता है समर्पण।

अर्चना लखोटिया कल्याण कॉलोनो केकड़ी 

जिला अजमेर राजस्थान
पिन 305404

Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

कविता-दर्द ने दस्तक दी

May 6, 2022

दर्द ने दस्तक दी आज फिर दर्द ने मेरे दिल पर दस्तक दे दी हमें यू ना रुलाओ… 2मैं इस

PreviousNext

Leave a Comment