Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Deep madira, lekh, poem

बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी

 बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी जब से मानव समाज की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब …


 बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी

बुर्का, हिजाब और घुंघट सब गुलामी की निशानी
जब से मानव समाज की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब तक औरतों को गुलाम बनाने की लगातार साजिश और कोशिशें होती रही है। मगर धीरे-धीरे मानव समाज ने अपनी पुरानी रूढ़ वादी परंपराओं को खत्म करने की कोशिश तो की मगर आज भी बहुत सी ताकत हैं, जो इन परंपराओं के पक्ष में खड़ी रहती है।

महिलाओं को गुलाम बनाए रखना सिर्फ एक ही धर्म में नहीं बल्कि हर धर्म और हर समाज में लगातार साजिशें होती रही है। इन दिनों आप देख रहे होंगे, कर्नाटक में हिजाब को लेकर मुस्लिम लड़कियां प्रदर्शन कर रही हैं तो वही हिजाब के विरोध हिंदूवादी लड़के उनका विरोध कर रहे हैं। एक तरफ हम कहते हैं कि देश संविधान के अनुसार चलना चाहिए तो दूसरी तरफ हम ही कहते हैं कि हर समाज, हर व्यक्ति को अपने अनुसार जीने की आजादी है। यह किस प्रकार के आजादी है ?

आज जो मुस्लिम समाज कर्नाटक के मुस्लिम लड़कियों के बुर्के और हिजाब के समर्थन में उतर रहा है। मैं उनसे सीधा सवाल करना चाहता हूं कि क्या आप आप नहीं चाहते कि आपके समाज की महिलाएं पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं से मुक्त हो ? अगर आप चाहते हैं कि आपके समाज की महिलाएं आगे बढ़े, आपके कदम से कदम मिलाए और देश का नाम रोशन करें तो फिर आपको दो नाव में पैर नहीं रखना चाहिए बल्कि आपको रूढ़िवादी परंपराओं, गुलामी के प्रतीक वस्त्र आभूषणों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

अगर आपको लगता है कि कर्नाटक में आपकी समाज की लड़कियां सही कर रही है तो इससे एक बात साफ होता है कि आप नहीं चाहते कि आपके समाज की लड़कियां गुलामी से मुक्त हो। अब आप मेरे से सवाल करेंगे या मेरे सवालों का जवाब देंगे कि यह तो हमारी संस्कृति का हिस्सा है तो भैया जो संस्कृति किसी व्यक्ति या किसी समाज को गुलाम बनाती है तो उस संस्कृति को नष्ट ही किया जाता है।

अब बात आती है उन बच्चों की जो कर्नाटक में मुस्लिम लड़कियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्हें धार्मिक नारे लगाकर प्रताड़ित करना चाहते हैं। अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा होगा एक मुस्लिम लड़की स्कूटी से कॉलेज आती है और कुछ हिंदूवादी संगठन के बच्चे उस लड़की को घेर कर जय श्रीराम जय श्रीराम के नारे लगाने लगते हैं। सबसे पहले स्कूल कॉलेजों में किसी भी धर्म विशेष के नारे लगाना संवैधानिक तौर पर गलत है। स्कूल, कॉलेजों संविधान के अनुसार चलते हैं संविधान धर्मनिरपेक्षता पर आधारित है।

कुछ लोग का कहना हैं कि स्कूल, कॉलेजों में यूनिफार्म होती है जो सबके लिए लागू होती है ऐसे में मुस्लिम लड़कियों का हिजाब पहनने का समर्थन करना संविधानिक तौर पर गलत है। संवैधानिक तौर पर बहुत कुछ गलत हो रहा है। हम सभी को वह भी देखना चाहिए जैसे बहुत सारे स्कूलों में किसी देवी की मूर्ति बना देना, किसी देवी की पूजा करना यह भी तो संविधानिक तौर पर गलत ही है।

अगर देश को संविधानिक तौर पर चलना या चलाना है तो फिर हम सभी को अपनी धार्मिक विचारधारा को घर में बंद करके रखना होगा। आपको लग रहा होगा कि हम किसी विशेष समुदाय का समर्थन कर रहे हैं या फिर आलोचना कर रहे हैं। आप स्वयं सोचिए जब हमारा देश धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है तो फिर हमारे स्कूल, कॉलेज में किसी विशेष समुदाय या धर्म से संबंधित परंपराएं क्यों चल रही है ?

खैर छोड़िए हमारा मुख्य विषय- हिजाब, घुंघट और बुर्का है। आज मुस्लिम समाज अपने ही समाज की औरतों के बुर्के के समर्थन में खड़ा है। इसे आप सभी अलग-अलग दृष्टि से देख सकते हैं। हिंदू समाज में भी एक तबका ऐसा है जो लड़कियों के जींस पहनने पर संस्कृति, सभ्यता और परिवार की परंपराओं का हवाला देते हैं। इसके बावजूद भी हिंदू समाज में रूढ़िवादी परंपराओं के खिलाफ सदियों से आवाज उठती आई है। चाहे वह राजा राममोहन राय द्वारा चलाया गया आंदोलन हो, सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिबा फुले द्वारा महिलाओं के लिए स्कूल की शुरुआत हो या फिर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर जी द्वारा हिंदू कोड बिल लाया गया हो।

हम सभी को पुरानी परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए आगे देखने की जरूरत है। आज जो मुस्लिम समाज की छात्राएं बुर्का और हिजाब का समर्थन कर रही है क्या वह अपने ही समाज के राजनेताओं, अभिनेताओं और पूंजीपतियों के बच्चों और उनकी पत्नियों को कह सकते हैं कि आप लोग भी हिजाब पहनो ? क्या मुस्लिम समाज उन लोगों के खिलाफ भी जा सकता है ?

मुस्लिम समाज यह बताएं कि कौन से नेता, कौन से अभिनेता और कौन से पूंजीपतियों का परिवार बुर्खा और हिजाब पहनता है ? यही सवाल हिंदू समाज से भी है कि आपके समाज के कितने राजनेता, अभिनेता और पूंजीपतियों का परिवार मांग में सिंदूर, हाथों में चूड़ियां, पैरों में पायल, बड़ों और पराए मर्दों के सामने घुंघट करता है ?

अगर आपको अपने समाज में किसी चीज का विरोध करना ही है तो बुरी चीजों का विरोध करो। जैसे बढ़ता नशे का कारोबार, सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही नफरत, सरकार की गलत नीतियों इत्यादि। इसके अलावा आपको किसी चीज का समर्थन ही करना है तो अच्छी चीजों का समर्थन करो। जैसे सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना, महिलाओं का सशक्तिकरण, समानता भाईचारा इत्यादि।

– दीप मदिरा



Related Posts

वजूद– ए– कुर्सी- जयश्री बिरमी

December 21, 2021

 वजूद– ए– कुर्सी चर्चे तो बहुत सुने हैं किस्सा–ए–कुर्सी के लेकिन भौतिकता से देखें तो कुर्सी एक तैयार सिंहासन हैं

उत्कृष्ट कवियों की उपस्थिति में काव्य पाठ

December 21, 2021

राष्ट्रीय नव साहित्य कुंभ द्वारा हुआ उत्कृष्ट कवियों की उपस्थिति में काव्य पाठ साहित्यिक सांस्कृतिक सामाजिक संस्था राष्ट्रीय नव साहित्य

सफर-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 20, 2021

सफर! बहुत समय से बैठे हैं, घर के अंदर, चलो करें, शुरू एक नया सफर,घूमे गांव और अलग-अलग शहर,महसूस करें,

भ्रष्टाचार की शून्य सहिष्णुता-किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

नए भारत, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना में भ्रष्टाचार की शून्य सहिष्णुता, पारदर्शी व्यवस्था तथा नागरिकों की मुख्य सहभागिता की प्रतिबद्धता

कविता अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2021-किशन सनमुखदास

December 20, 2021

कविताअंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2021 अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस सबने मिलकर दिव्यांगजन को उत्साह देखकर मनाए हैं राष्ट्रपति प्रधानमंत्री ने अपने संदेश

कविता- महिला राजनीति क्षमता निर्माण-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी

December 20, 2021

कविता महिला राजनीति क्षमता निर्माण राष्ट्रीय महिला आयोग ने राजनीति में महिलाओं के लिए क्षमता निर्माण करनेशी इज ए किंग

Leave a Comment