Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

बुढ़ापे की मुंडेर

 बुढ़ापे की मुंडेर डॉ. इन्दु कुमारी  जन्म लिए बचपन बीते  खुशियों के होंठ खिले  बचपन के छोटे पौधे  फूल रूप …


 बुढ़ापे की मुंडेर

डॉ. इन्दु कुमारी
डॉ. इन्दु कुमारी

 जन्म लिए बचपन बीते

 खुशियों के होंठ खिले

 बचपन के छोटे पौधे

 फूल रूप में खिलने लगे

 मां गौरव से कहती

 पिता को अभिमान होता

 अब मेरे बच्चे देखते देखते 

जवानी की दहलीज पर बैठा 

माना 75 की उम्र में

25 वर्ष यूं ही गवाए 

बचा 50 वर्ष की आयु ,

अरमानों के दीपों को 

मूर्त रूप देना है 

जिंदगी के पल को 

प्रेम से सजाना 

.घर आवास बनाने में 

बीती जिंदगी खास 

जोड़ने में समय बीते 

आई बुढापे पास

 सरकती जीवन की गाड़ी 

बुढापे के मुंडेर पर लाई 

पता नहीं चला इतनी 

जल्दी सफर तय हो गई 

जिंदगी की मूल्य जब तक

 समझते बुढ़ापे की

 मुंडेर आ गई ।

     

हाथ मलने के सिवा

 कुछ साथ नहीं रहा 

पछताते पछताते 

जिंदगी की भोर हो गई।

 देखो मेरे भावी पीढ़ी 

बुढ़ापे को झकझोर गईl

          डॉ. इन्दु कुमारी मधेपुरा बिहार


Related Posts

समस्त रक्तदान दाताओं

May 25, 2022

समस्त रक्तदान दाताओं देख रही आज मानव सेवा चैन के जरिएएक-एक रक्त की बूंद को तरसे लोगअपनों के जान बचाने

अतीत से परे आगे की ओर बढ़े!

May 25, 2022

अतीत से परे आगे की ओर बढ़े! मुड़ कर ना देखो,जो पीछे छूट गया,आगे बढ़कर लिखो,अपना भविष्य नया! कुछ छुटने

यथार्थ मार्ग!

May 25, 2022

 यथार्थ मार्ग! कुरीतियां और बुरी आदतों को बदलें, इस जिंदगी की राह में थोड़ा और संभले, जितनी हो गई गलतियां

बेबाक हो जाए

May 25, 2022

 बेबाक हो जाए। चुनौतियों का सामना करते हैं, सच्चाई के लिए लड़ते हैं, इंसानियत पर डट कर चलते हैं चलो

चालाक लोमड़ी

May 25, 2022

 चालाक लोमड़ी! भरी दोपहर में एक दिन लोमड़ी भटके, कर रही थी भोजन की तलाश, दिखे उसे बेल में अंगूर

कुबूल है

May 24, 2022

 “कुबूल है” कुबूल है मुझे तेरी मन मर्ज़ियां कुबूल है चाहत की बौछार कर दूँ तेरी अदाओं पर निसार होते,

PreviousNext

Leave a Comment