Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, story

बीमारी द्वारा रोगी का चयन–कहानी

बीमारी द्वारा रोगी का चयन छोटे थे तो और सभी कहानियों के साथ ये कहानी भी मां सुनाया करती थी।एक …


बीमारी द्वारा रोगी का चयन

बीमारी द्वारा रोगी का चयन--कहानी
छोटे थे तो और सभी कहानियों के साथ ये कहानी भी मां सुनाया करती थी।एक छोटा सा जीव होता हैं इतडी,अमूमन पिस्सू जैसा ,जिसे भी वो काट ले उन्हे थोड़ी बहुत खुजली और तेज बुखार हो जाता था ऐसा माना जाता था।

ऐसी दो इतडीयां चली जा रही थी।पहली ने कहा ,”आज तुम किसे काटने वाली हो?”
तो दूसरी ने उसीसे पूछ लिया,”तुम ही बता दो ,तुम किधर चली?”
पहली ने बताया,” मैं सोच रही हूं कि खेतों की और निकल जाऊं ,कोई न कोई किसान को काट लूंगी।”
दूसरी ने बताया,” भैया तू जिधर भी जाओ ,अपने तो धन्ना सेठ के घर जाएंगे और दुनियां भर की सेवा होती देखेंगे।”
इतनी बात के बाद एक चल पड़ी खेतों की ओर, और दूसरी चल पड़ी गांव की ओर।दोनों ही अपने को शक्तिवान समझ रही थी।एक ने सोचा किसान चाहे कितना मजबूत क्यों न हो उसके काटे से बचना मुश्किल था।वैसे दूसरी सेठ को कटने बाद जो वैभव और नखरों के दर्शन होने थे ये सोच मुस्करा रही थी।
जैसे ही खेत में किसान दिखा जो खेत की जुताई कोई देहाती गाना गाते गाते कर रहा था,और वह अपनी काल्पनिक मूंछों पर ताव दे आगे बढ़ ली।उसके जूते पर चढ़ थोडा उपर जा घुटने से थोड़ा उपर की ओर अपनी सारी ताकत लगा कर काटा।किसान तो खेत जोत रहा था ,एक हाथ में बैल की रास थी और दूसरे में चाबुक ,क्षण भर में इतनी जोर से चाबुक दे मारा कि इतडीरानी की आंखो के सामने अंधेरा छा गया और उछल कर दूर जा गिरी।थोड़ा होश आया तो देखा कि किसान फिर से वही मस्ती से गाना गाया हुआ खेत जोतने लगा था।
उधर दूसरी वाली गांव में पहुंची तो सेठजी कुछ लोगों के बीच बैठ हिसाब किताब में उलझे हुए थे।सब जो वहां बैठे थे सेठजी की जी हजूरी में लगे हुए थे। इतडी रानी बड़ी चालाकी से लोगों के बीच से रास्ता काट सेठ तक पहुंच ही गई और मुलायमसी बांह जो दूध सी सफेद कमीज से दिख रही थी वहां पूरी ताकत के साथ कटा।और देखो क्या जोर से सेठजी उछले और बोले,’ ये बिच्छू कहां से आया,देखो मुझे काट गया हैं।”तो कोई जानकार आदमी उसकी काट को देख सलाह दे डाली कि वो तो इतडी की काट हैं कुछ नहीं होगा।लेकिन इतनी देर में तो सेठ दो नौकरों की सहायता से पास में पड़ी चारपाई पर लेट हाई तौबा मचा दी।वैद्य जी भी आ पहुंचे।कई किस्म के काढ़े, सरदाइ जिसे कितने तो सूखे मेवों और जड़ी बूटियों को घोंट के बनाई गई थी।और फिर गुलाबजल आया उससे जहां काट थी वहां ठंडक करने के लिए पोते लगाने लग गए और देखा जाएं तो कुछ मिनटों में पंद्रह बीस लोग सेवा में लग गए। इतडी रानी दूर बैठ ठंडी ठंडी हवा और खुशबुओं का पान करती रही और अपने शिकार पर इतराती वहीं पहुंची जहां उसकी साथिन मिलने वाली थी।सुगंधी और साफ सुथरी वह इतराती चली आ रही थी जहां उसकी साथिन धूल मिट्टी से सनी और घायल अवस्था में खड़ी मिली।दोनों मिल अपनी अपनी बातें सुनने लगी।पहली ने अपनी गलती स्वीकार कर बोली हम ही नहीं किसी भी बीमारी को अगर किसीको पकड़ना ही हैं तो सेठ लोगों को ही पकड़ना चाहिए। कोई गरीब तो बीमारी को जटक काम पर लग जायेगा।

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

Story parakh | परख

Story parakh | परख

December 31, 2023

 Story parakh | परख “क्या हुआ दीपू बेटा? तुम तैयार नहीं हुई? आज तो तुम्हें विवेक से मिलने जाना है।”

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी | bad time story

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी | bad time story

December 30, 2023

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी “मैं पूरे दिन नौकरी और घर को कुशलता से संभाल सकती हूं तो क्या अपने बच्चे

LaghuKatha – peepal ki pukar | पीपल की पुकार

December 30, 2023

लघुकथा  पीपल की पुकार ‘दादी मां दादी मां, आपके लिए गांव से चिट्ठी आई है’, 10 साल के पोते राहुल

Story – mitrata | मित्रता

December 28, 2023

मित्रता  बारिशें रूक गई थी, नदियाँ फिर से सीमाबद्ध हो चली थी, कीचड़ भरे मार्गों का जल फिर से सूरज

Story – prayatnsheel | प्रयत्नशील

December 28, 2023

प्रयत्नशील भोजन के पश्चात विश्वामित्र ने कहा, ” सीता तुम्हें क्या आशीर्वाद दूँ, जो मनुष्य अपनी सीमाओं को पहचानता है,

Story – praja Shakti| प्रजा शक्ति

December 28, 2023

प्रजा शक्ति  युद्ध का नौवाँ दिन समाप्त हो चुका था। समुद्र तट पर दूर तक मशालें ही मशालें दिखाई दे

Leave a Comment