Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

बीती रात हो गई भोर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

बीती रात हो गई भोर अंतर्मन की पूर्ण कामना, बिना तुम्हारे सभी अधूरे,एहसास हमारा अपना है,एकाकीपन जीवन अपना।। सानिध्य तुम्हारा …


बीती रात हो गई भोर

बीती रात हो गई भोर- डॉ हरे कृष्ण मिश्र
अंतर्मन की पूर्ण कामना,

बिना तुम्हारे सभी अधूरे,
एहसास हमारा अपना है,
एकाकीपन जीवन अपना।।

सानिध्य तुम्हारा छूट गया,
उद्देश हमारा छिन्न हुआ ,
पावन संकल्प हमारा जो ,
नियति के हाथों टूट गया ।।

बची हुई वेदना हमारी ,
दी हुई तुम्हारी दौलत है ,
स्पर्श तुम्हारा मीठा मीठा,
ले अतीत आ जाता है ।।

वर्तमान हमारी दूरी बन गई,
स्मृति तुम्हारी अपनी मेरी ,
भविष्य की चिंता मुझे नहीं,
चिंतन में तन मन ले बैठा ।।

ले कलश तुम्हारा दीप जला,
अंतर्मन मेरा हुआ उज्जवल ,
कलश कलश पर दीप दिखे,
प्रकाश भरा प्रतिबिंब मिला ।।

आत्म विभोर तुझको पाकर ,
मिला स्पर्श भरा दर्शन तेरा ,
दीपशिखा अंतर उर जागा ,
भरा प्रकाश अंतर स्थल में।।

वर्तमान है मेरा स्पर्श भरा ,
लगता कितना सुंदर सुंदर ,
अनुभव का एहसास लिए ,
खोया मेरा है शेष अतीत ।।

चल इस पर चिंतन भी करना,
प्रतिकूल हमारा अनुकूल बना ,
जीवन दर्शन की बात बड़ी है,
शून्य भरा एहसास हुआ है ।।

वही धरती ऋषि आश्रम ,
समय कितना सुहाना था,
मिले थे हम जहां दोनों ,
धरा पावन बहुत प्यारी ।।

वही दरिया सुगम धारा,
मचलती थी लहर ले ले,
कल बैठे थे किनारे पर ,
अब किनारा दूर हमसे है।।

कलम गीत गाती है तेरी ,
तुम मेरे संग गाती आई ,
मैं अभाव में भावविभोर
बीती रात हुई जब भोर ।।

मौलिक रचना
डॉ हरे कृष्ण मिश्र
बोकारो स्टील सिटी
झारखंड ।


Related Posts

रात है तो सुबह भी तो आयेगी- अनिता शर्मा झाँसी

January 25, 2022

रात है तो सुबह भी तो आयेगी मन रे तू मत हो निराशकल एक नयी सुबह आयेगी।बीतेगी दुखो की घड़ियाँछायेगा

मन के हारे हार- जितेन्द्र ‘कबीर’-

January 25, 2022

मन के हारे हार हार भले ही कर ले इंसान कोकुछ समय के लिए निराशलेकिन वो मुहैया करवाती है उसकोअपने

गलतियां दोहराने की सजा- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

गलतियां दोहराने की सजा देश में कोरोना की पहली लहरहमारी सरकारों ने विदेशों से खुद ब खुद हीबुलाई थी,जब इतनी

राजनीति के सियार- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

राजनीति के सियार पैसा किसी के हथियार है,लालच किसी का हथियार है,इसी सनातन मोह कोसत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनातेआजकल

श्रेष्ठता के मानक- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

श्रेष्ठता के मानक यह गवारा नहीं समाज कोकि सिर्फ अपनी प्रतिभा, लगन औरमेहनत के आधार पर कोई इंसानसमाज में उच्चतम

किस मुगालते में हो?- जितेन्द्र ‘कबीर’

January 25, 2022

किस मुगालते में हो? एक बात सच – सच बताओ..अभी तक नहीं हुए हो क्या तुमव्यवस्थागत अथवा व्यक्तिगतकिसी बेइंसाफी के

Leave a Comment