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बालकथा-दोस्त हों तो ऐसे | dost ho to aise

बालकथा-दोस्त हों तो ऐसे धानपुर गांव में प्राइमरी स्कूल तो था, पर हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं था। इसलिए आगे की …


बालकथा-दोस्त हों तो ऐसे

बालकथा-दोस्त हों तो ऐसे |  dost ho to aise

धानपुर गांव में प्राइमरी स्कूल तो था, पर हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं था। इसलिए आगे की पढ़ाई के लिए धानपुर के बच्चों को बगल वाले गांव जाना पड़ता था। गांव नजदीक ही था, इसलिए राजू अपने दोस्तों के साथ साइकिल से स्कूल जाता था।
परीक्षा नजदीक आ रही थी, इसलिए राजू और उसके दोस्त मिल कर तैयारी कर रहे थे। एक दिन स्कूल की छुट्टी होने वाली थी, तभी वातावरण में परिवर्तन हुआ। पहले आंधी आई, फिर तेज पानी बरसने लगा। अभी तो तेज गरमी की शुरुआत ही हुई थी कि इस तरह तेज बरसात होने से रास्ते में चारों ओर पानी भर गया। स्कूल की छुट्टी होने के बावजूद राजू अपने दोस्तों के साथ बरसात बंद होने का इंतजार करता रहा। पर बरसात बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी।
गरमी की शुरुआत ही हुई थी, इसलिए इस तरह बरसात होने की जरा भी उम्मीद नहीं थी, यही वजह थी कि कोई रेनकोट वगैरह भी नहीं ले कर आया था। जब लगा कि बरसात बंद नहीं होगी तो राजू अपने दोस्तों के साथ साइकिल ले कर घर के लिए चल पड़ा। रास्ते में पानी भरा था और बरसात भी हो रही थी, जिससे रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। इस स्थिति में सभी को साइकिल चलाने में परेशानी हो रही थी। स्कूलबैग भीगे न इसके लिए उसे पाॅलोथीन से कवर कर लिया था। किसी तरह भीगते हुए सभी घर पहुंचे।
घर पहुंच कर पहले तो राजू फ्रेश हुआ। उसके बाद स्कूलबैग पलट कर देखा कि कापी-किताबें भीग तो नहीं गईं? उसकी कापी-किताबें तो बच गई थीं, पर जनरल इस तरह भीग गया था की उसमें कुछ पढ़ने में ही नहीं आ रहा था। राजू परेशान हो गया कि अब वह क्या करे। बरसात बंद हुई तो सभी मित्र पढ़ने के लिए इकट्ठा हुए।
पता चला कि राजू का जनरल इस तरह भीग गया था कि उसमें पेन से लिखे अक्षर पढ़ने में ही नहीं आ रहे थे। यह देख कर राजू रुआंसा हो गया। वह साइंस का विद्यार्थी था। इसलिए प्रेक्टिकल परीक्षा मे जनरल बहुत जरूरी था। उसने हेयर ड्रायर की मदद से जनरल को सुखाने की कोशिश की थी, पर उसकी लिखावट बहुत खराब हो गई थी, इसलिए अब उसमें कुछ नहीं हो सकता था।
दूसरी ओर बरसात में भीगने की वजह से राजू बीमार पड़ गया। तब उसके दोस्तों ने कहा कि वह अपनी तबीयत का ख्याल रखे, रही बात जनरल की तो वे उसे लिखवा देंगे।
अगले दिन राजू के दोस्त नया जनरल खरीद लाए। मिहिर की लिखने की स्पीड अच्छी थी। देर रात तक जाग कर उसने राजू का जनरल लिख दिया। श्याम ने सारी ड्राइंग बना दी। इस तरह मित्रों की मदद से राजू का जनरल तैयार हो गया, जिससे उसके नंबर कटने से बच गए।

About author 

वीरेन्द्र बहादुर सिंह जेड-436ए सेक्टर-12, नोएडा-201301 (उ0प्र0) मो-8368681336

वीरेन्द्र बहादुर सिंह
जेड-436ए सेक्टर-12,
नोएडा-201301 (उ0प्र0)


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