Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Uncategorized, story

बालकथा-तारामंडल का खोया हुआ नक्शा

दस साल का मयंक हर रात छत पर बैठकर तारों को देखा करता और कल्पनाएं बुनता रहता। उसे लगता था …


दस साल का मयंक हर रात छत पर बैठकर तारों को देखा करता और कल्पनाएं बुनता रहता। उसे लगता था कि आकाश के पीछे जरूर कुछ न कुछ छिपा है। एक दिन उसने अपनी मेज के नीचे एक हल्का सा चमकता कागज पड़ा देखा।काग़ज़ पर किसी अनजानी आकाशीय लिपि में कुछ लिखा था। और बीच में एक छोटासा चिह्न बना था- ‘ओनली फार द चोजन वन’ यानी सिर्फ विशेष व्यक्ति के लिए!मयंक चौंक गया, “मेरे लिए? लेकिन यह यहां आया कैसे?”उसी समय उसके सामने प्रकाश का एक छोटा सा गोला प्रकट हुआ। धीमी आवाज में वह बोला, “मैं नोवा हूं, तारामंडल का संदेशवाहक। यह नक्शा हमारी आकाशगंगा का रहस्य है। लेकिन एक डार्क शैडो इसे चुरा ले गया था। तुम इसे फिर से सक्रिय कर सकते हो।”मयंक डर गया। वह बोला, “मुझे क्या करना होगा?”नोवा बोला, “बस थोड़ी हिम्मत और एकाग्रता। मन को शांत रखो और नक्शे पर हाथ रखकर ‘ल्यूमिना’ कहो।”मयंक ने नक्शे पर विचार हाथ रखा और “ल्यूमिना” शब्द बोला। पल भर में नक्शा हवा में तैरने लगा। उसमें तारों की रेखाएं जुड़ गईं और एक पोर्टल खुला, जो सीधे चांद के पीछे स्थित ‘स्टार वैली’ की ओर ले जाता था।मयंक उसके भीतर प्रवेश कर गया।यहां का आकाश और भी नीला था, तारे और ज्यादा पास लग रहे थे और चारों ओर अद्भुत शांति फैली हुई थी।लेकिन अचानक एक विशाल साया दिखाई दिया… डार्क शैडो, जो तारों की रोशनी चुरा रहा था।वह गरजा, “नक्शा मुझे लौटा दो। तारों की रोशनी अब मेरी है।”मयंक एक पल के लिए डर गया, लेकिन फिर उसने सोचा, “अगर मैं डर गया, तो तारों की रोशनी कभी वापस नहीं आएगी।”नोवा ने उसके कान में कहा, “नक्शे के पास प्रकाश की रक्षा शक्ति है। तुम्हें बस उस पर भरोसा करना होगा।”मयंक ने नक्शे को ऊपर उठाया।नक्शे से तेज प्रकाश फूटा और डार्क शैडो पीछे की ओर धकेल दिया गया।“नहीं….।” शैडो चीख़ा और टूटकर धुएं में घुल गया। पल भर में पूरी स्टार वैली जगमगा उठी।नोवा खुशी से बोला, “मयंक, तुम सफल हो गए। आज तारामंडल फिर से सुरक्षित है।”आकाश में बड़े-बड़े तारे उसकी ओर झुककर चमकने लगे, मानो उसका अभिनंदन कर रहे हों।पोर्टल फिर से खुला और मयंक वापस पृथ्वी पर आ गया।अब नक्शा साधारण सा लग रहा था, लेकिन उसके एक कोने में एक छोटा-सा वाक्य जुड़ गया था, ‘व्हेनेवर द स्टार्स नीड यू, द मैप विल ग्लो अगेन।’ (जब भी तारों को तुम्हारी जरूरत होगी, यह नक्शा फिर से चमक उठेगा।)कुछ दिनों बाद मयंक के हाथ फिर वही चमकता काग़ज लगा। वह तुरंत बालकनी से आकाश की ओर देखने लगा, जहां एक तारा बहुत तेजी से झिलमिला रहा था, मानो कह रहा हो, “यह यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है।”

वीरेंद्र बहादुर सिंह जेड-436ए, सेक्टर12,नोएडा-201301 (उ.प्र.)


Related Posts

दीपक का उजाला

दीपक का उजाला

June 10, 2025

गाँव के किनारे एक छोटा-सा स्कूल था। इस स्कूल के शिक्षक, नाम था आचार्य देवदत्त, अपने समय के सबसे विद्वान

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

June 10, 2025

साहित्य की रचना में टेक्नोलाॅजी की बात अब जरा भी नई नहीं है। भविष्य में अनेक मोर्चे पर टेक्नोलाॅजी और

Story parakh | परख

Story parakh | परख

December 31, 2023

 Story parakh | परख “क्या हुआ दीपू बेटा? तुम तैयार नहीं हुई? आज तो तुम्हें विवेक से मिलने जाना है।”

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी | bad time story

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी | bad time story

December 30, 2023

लघुकथा -बेड टाइम स्टोरी “मैं पूरे दिन नौकरी और घर को कुशलता से संभाल सकती हूं तो क्या अपने बच्चे

LaghuKatha – peepal ki pukar | पीपल की पुकार

December 30, 2023

लघुकथा  पीपल की पुकार ‘दादी मां दादी मां, आपके लिए गांव से चिट्ठी आई है’, 10 साल के पोते राहुल

Story – mitrata | मित्रता

December 28, 2023

मित्रता  बारिशें रूक गई थी, नदियाँ फिर से सीमाबद्ध हो चली थी, कीचड़ भरे मार्गों का जल फिर से सूरज

Leave a Comment