Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

बहू को बेटी सा प्यार देकर बुढ़ापा सुरक्षित कर लीजिए

 बूढ़े माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बेटा नहीं…. एक अच्छी संस्कारी बहु होती है। हर माँ-बाप को बेटे की शादी …


बहू को बेटी सा प्यार देकर बुढ़ापा सुरक्षित कर लीजिए बूढ़े माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बेटा नहीं…. एक अच्छी संस्कारी बहु होती है। हर माँ-बाप को बेटे की शादी के लिए मन में चिंता रहती है। आजकल बेटी के लिए अच्छा ससुराल देखना जितना जरूरी है; उतना ही बेटे के लिए संस्कारी और सुलझी हुई लड़की बहू के रुप में ढूँढना भी जरूरी है। ज़ाहिर सी बात है एक गलत फैसला पूरे परिवार को तबाह कर सकता है। 

आजकल लगभग हर दंपत्ति का इकलौता बेटा ही होता है। पहले के ज़माने की बात अलग थी तीन-चार बेटे होते थे, उसमें से एक दो बहूएँ अच्छी नहीं निकली तो इतने में से कोई एक तो समझदार होती थी जो घर परिवार और बड़े बुज़ुर्गों का ख़याल रखती थी। 

अब तो एक ही बेटे की एक ही बहू से उम्मीद लगानी पड़ती है। अच्छी, संस्कारी, समझदार निकली तो ठीक है वरना जैसा नसीब।

कहने का मतलब यह है कि बेटा चाहे कितना भी अच्छा हो पूरा दिन तो काम काज की वजह से घर पर नहीं रहता। घर पर रहती है बहू, परिवार संभालना होता है बहू को, सास-ससुर की सेवा करेगी बहू तो हुई न बुढ़ापे का सहारा बहू। माँ-बाप को हर लड़की को ये संस्कार देने चाहिए की परिवार को संभालकर रखें और बड़े बुज़ुर्गों की सेवा करें। साथ में हर सास-ससुर को अपनी बहू को बेटी समझकर मान, सम्मान से रखना चाहिए। प्रेम दोगे तो पाओगे। बाकी बहू को अपने परिवार का हिस्सा न समझते परायों सा व्यवहार करेंगे तो बहू के मन में भी आपके प्रति अपनेपन का भाव कभी नहीं आएगा।

“बहू ही घर का आधार स्तंभ होती है, ये बात हर सास-ससुर को अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए”। हर सास को बेटे की शादी होते ही बहू को अपने घर के रीत-रिवाज़ और परंपरा समझा देने के बाद कुर्सी खाली कर देनी चाहिए। बहू पर पूरा भरोसा करते बेटे और घर की बागडोर बहू को थमा देनी चाहिए। बहू को ससुराल अपना खुद का घर लगना चाहिए, तभी परिवार को अपनाकर खुशी खुशी सारी ज़िम्मेदारियाँ उठाएगी। खुद की बेटी आठ बजे तक सोती है तो हमें अच्छा लगता है, आहिस्ता से दरवाज़ा बंद करके सोने देते है। उससे उल्टा अगर बहू कभी देर तक सोती रहे तो आफ़त आ जाती है। यही मानसिकता बदलने की जरूरत है। अरे सोने दीजिए न बेचारी को; दो काम आप खुद कर लेंगे तो एक्सरसाइज़ हो जाएगी। पर ना बहू के लिए एक दायरा तय कर दिया जाता है नियमों का जिसे लाँघने की बहू को अनुमति नहीं होती। 

अक्सर देखा जाता है बहूओं से ससुराल में परायों सा व्यवहार ही होता है। पराये घर से आई पराई लड़की। हर छोटी-बड़ी बात बहू से छुपाकर की जाती है। बेटी को कुछ देना होता है तो सासु माँ बहू से छुपाकर देती है। क्यूँ ऐसी मानसिकता रखनी है? बहू को भी बेटी समझकर जो चीज़ बेटी के लिए लेते हो वही बहू के लिए भी लीजिये और दोनों को साथ में दीजिए। तभी बहू को सास पर अपनी माँ के जैसा प्यार आएगा। बाकी पूरी ज़िंदगी बहू को पराई समझकर सितम ढ़ाने के बाद ये उम्मीद रखना कि बहू उम्र के आख़री पड़ाव में खुशी-खुशी आपकी सेवा करें ये गलत बात है। बहू भी किसीके जिगर का टुकड़ा है, प्यारी सी गुड़िया पर प्यार क्यूँ नहीं आता ससुराल वालों को? एक बार दिल से अपनाकर तो देखिए। बहू को ही बेटी मानकर चलिए घर का वातावरण सुखमय रहेगा और बुढ़ापा सुरक्षित।

About author

Bhawna thaker
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

Related Posts

कोरोना कहर की रफ्तार में तेज़ी

April 5, 2023

कोरोना कहर की रफ्तार में तेज़ी सुनिए जी ! सावधान रहिएगा, भारत में कोविड की फ़िर तेज़ रफ्तार हर व्यक्ति

हकीकत प्रतीत होता पौराणिक शाब्दिक ताना-बाना!

April 5, 2023

हकीकत प्रतीत होता पौराणिक शाब्दिक ताना-बाना! काम कौड़ी का नहीं फुर्सत ढेले की नहीं सबको अपने से मतलब है इसलिए

साठ की उम्र में भी फिट रहने के लिए महिलाओं को क्या करना चाहिए

April 4, 2023

साठ की उम्र में भी फिट रहने के लिए महिलाओं को क्या करना चाहिए ‘अभी तो मैं जवान हूं…’ यह

प्रतियोगिता | competition

April 4, 2023

प्रतियोगिता | competition प्रतिस्पर्धा एक प्रकार के उद्दीपक का कार्य करता है मनुष्य के जीवन में।जिससे मनुष्य में एक प्रकार

अपने पैरों पर खड़ी होना मतलब गौरव सिद्ध करना

April 4, 2023

अपने पैरों पर खड़ी होना मतलब गौरव सिद्ध करना अभी जल्दी ही ऐक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी के नाम पर एक बड़ा

बहू आएगी तो ये खुद ब खुद सुधर जाएगा

April 4, 2023

बहू आएगी तो ये खुद ब खुद सुधर जाएगा हम तो हार गए इसको सुधारते सुधारते चलो ब्याह देते बेटे

PreviousNext

Leave a Comment