Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

बसंत की बहार बसंत तेरे आगमन सेप्रकृति सजी दुल्हन सीनीलगगन नीलांबरजैसे श्याम वर्ण कान्हावस्त्र पहने हो पितांबरपीले रंगों में सरसों …


बसंत की बहार

बसंत की बहार- डॉ इंदु कुमारी

बसंत तेरे आगमन से
प्रकृति सजी दुल्हन सी
नीलगगन नीलांबर
जैसे श्याम वर्ण कान्हा
वस्त्र पहने हो पितांबर
पीले रंगों में सरसों फूला
मस्त पवन मस्तानी वेग
जैसे सावन के झूला
मदमस्त हवाएं वह चली
जैसे मटकी ले चली राधा
झूमती पौधों की पत्तियां
इतराती बसंत की डालियां
बसंत की बसंती तेरी
चुलबुली बल खाती है
परम यौवन को पाकर
बावली यह इतराती है
ज्यादा जल पाकर नदियां
किनारे तोड़ जाती हैं
कोयल की सुरीली तान से
दग्ध ह्रदय शीतल कर जाती है।

डॉ इंदु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

चिंतन के क्षण- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

चिंतन के क्षण रोम रोम में बसी है यादें,बचा नहीं कुछ अपना है,तेरे मेरे अपने सारे सपने,बिखर गए सारे के

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 22, 2021

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी आजकल लोगों कोघर का काम करने के लिएईमानदार और मेहनती लोग नहीं मिलते,जमीन का

रूठे यार को मनाऊं कैसे-अंकुर सिंह

December 21, 2021

रूठे यार को मनाऊं कैसे रूठे को मैं कैसे मनाऊं, होती जिनसे बात नहीं,यादों में मैं उनके तड़पूउनको मेरा ख्याल

संवेदना- डॉ इंदु कुमारी

December 21, 2021

संवेदना मानव हम कहलाते हैं क्या हमने अंतस् मेंकभी झांककर देखा हैस्वार्थ में सदा जीते रहेपर पीड़ा कभी देखा हैअगर

सफर-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 20, 2021

सफर! बहुत समय से बैठे हैं, घर के अंदर, चलो करें, शुरू एक नया सफर,घूमे गांव और अलग-अलग शहर,महसूस करें,

Leave a Comment