Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

बड़े बुजुर्ग हमारे थिंक टैंक हैं

 बड़े बुजुर्ग हमारे थिंक टैंक हैं जनरेशन गैप की वर्तमान में बढ़ती समस्या- समाधान आपस में ढूंढना ज़रूरी  बच्चों और …


 बड़े बुजुर्ग हमारे थिंक टैंक हैं

बड़े बुजुर्ग हमारे थिंक टैंक हैं
जनरेशन गैप की वर्तमान में बढ़ती समस्या- समाधान आपस में ढूंढना ज़रूरी 

बच्चों और अभिभावकों में आपस में मैत्रिता का भाव जगाने की कोशिश होना चाहिए- एड किशन भावनानी

गोंदिया – जनरेशन गैप एक प्राकृतिक क्रिया है। इस दिशा में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी से अलग क्यों है? ऐसा कुछ है जो स्वाभाविक रूप से उनमें आता है और यह एक तरह से एक अच्छी बात है क्योंकि इस तरह से मानव प्रजाति विकसित हो रही है। परंतु इस तरह विकसित मानव प्रजाति से बड़े बुजुर्गों, जो हमारे थिंकटैंक हैं को कम आंकने की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को रेखांकित करना जरूरी है। यह बात दूर तलक और पीढ़ियों तलक जाएगी, क्योंकि यह एक जीती जागती सत्यता वर्तमान समाज में दिख रही है।अतः आज हम जनरेशन गैप की वर्तमान बढ़ती समस्या और उसके समाधान आपस में ही ढूंढने पर अनेक तर्कों पर चर्चा करेंगे। 

साथियों बात अगर हम जनरेशन गैप की करें तो, जनरेशन गैप तब होता है जब दो लोगों के बीच उम्र (एक पूरी पीढ़ी) का काफी अंतर होता है। यह अक्सर माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव का एक कारण बन जाता है। जनरेशन गैप को दो अलग-अलग पीढ़ियों से संबंधित लोगों के बीच के विचारों और विचारधाराओं के अंतर के रूप में समझाया गया है। यह राजनीतिक विचारों, धार्मिक विश्वासों या जीवन के प्रति सामान्य दृष्टिकोण में अंतर हो सकता है।जनरेशन गैप तब होता है जब दो लोगों के बीच उम्र (एक पूरी पीढ़ी) का काफी अंतर होता है। यह अक्सर माता-पिता और बच्चों के बीच टकराव का एक कारण बन जाता है। जनरेशन गैप को दो अलग-अलग पीढ़ियों से संबंधित लोगों के बीच के विचारों और विचारधाराओं के अंतर के रूप में समझाया गया है। यह राजनीतिक विचारों, धार्मिक विश्वासों या जीवन के प्रति सामान्य दृष्टिकोण में अंतर हो सकता है। 

साथियों वर्तमान बदलते आधुनिक परिवेश में आज की जनरेशन की पौराणिक कथाओ, कहानियों पर रुचि नहीं है पौराणिक परंपराओं, प्रथाओं, रीति-रिवाजों से भी बहुत बड़ा हिस्सा आज किनारा करने की कोशिश कर रहा है। मेरी यह निजी राय है कि इसका एक बहुत बड़ा कारण आज वर्तमान डिजिटल युग में विभिन्न मोबाइल ऐप्स और अनेक इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्राम सहित वर्तमान परिवेश के की नशीली चीजें, खेल अब शामिल हैं जिसके कारण जनरेशन गैप के विपरीत में बहुत बड़ा बल मिला है, जिसके कारण बच्चे उनमें समाहित हो कर पुराने तौर-तरीकों को नापसंद करते हैं। 

साथियों, एक सत्यता यह भी है कि, अगर आज के जमाने के बच्चे आधुनिकता से नहीं परिपक्व होते हैं तो समाज, रिश्तेदार और आस पड़ोस के लोग उन्हें पुराने विचारों और दब्बू किस्म के नौजवान समझते हैं ।इन परिस्थितियों में हम अभिभावकों की जवाबदारी बहुत बढ़ जाती है। हमें अब जनरेशन गैप की कड़ी को समझना होगा याने बच्चे अनुशासन, मर्यादा, सटीक हो बिगड़े नहीं, इसके कारण अनेक आधुनिकता के सही प्रयासों में उनका साथ देना होगा। अपने पुराने विचारों से कुछ हद तक पीछे हटना होगा।बच्चोंमें अगर असभ्य और अनैतिक आचरण समाहित है तो उनसे वह सख्ती से छुड़वाना होगा। याने आज के युग में पालकों को अभिभावकों को एक रणनीतिक के तहत बच्चों का मार्गदर्शक, दोस्त, साथी, सलाहकार सब बनना होगा। और उनसे ऐसा माहौल पैदा करना होगा कि उनके समझ में बात आ जाए कि मेरे अभिभावक जो कर रहे या कह रहे हैं वह सत्य है। 

साथियों, बच्चों की उम्र का एक दौर ही ऐसा होता है कि, किसी भी परिस्थिति में हम उसका दोष कोई नहीं निकाल सकते क्योंकि एक निश्चित उम्र तक यह दौर ऐसा होता है कि हमारा बच्चा केवल बच्चा बनकर ही रहता है। आगे तो हमको ही सोचना होता है ,वह तो केवल बच्चा समझकर ही छूट जाता है। और जब उनकी उम्र का तकाजा परिपक्व हो जाता है तो, बात उन्हें समझ में आ जाती है। और इस परिपक्वता तक के समय का हर अभिभावक या पालक को संयमता से इंतजार करना होता है। बच्चों को मार्गदर्शन, अच्छी सीख, सलीका अच्छी आदतें, अच्छे विचार अच्छे कार्य, को सिखाने का काम करना होता है और आज के दौर में तो यह सब प्लानिंग और रणनीति के तहत करना होता है ताकि सटीकता से काम भी हो जाए और बच्चों की को हवा भी न लगे कि क्या हो रहा है। आज अगर हम अपने बचपन और अभिभावकों की बात करें, और तुलना करके देखें तो बहुत बड़ा फर्क हम महसूस करेंगे। क्योंकि दशकों पहले का दौर कुछ और था अभी वर्तमान दौर कुछ और है। हमारे अभिभावक जिस प्रकार से हमारे साथ कड़ाई, गुस्सा या दंड दिए जाने का दौर था और हम वर्तमान जनरेशन के साथ ऐसा नहीं कर सकते। 

एक मेरी अपनी सोच और सटीक विचार है कि दशकों पूर्व अभिभावकों की अपनी नेक्स्ट जनरेशन में चलती थी, वह बात आगे हम अपने नेक्स्ट जनरेशन में नहीं चला सकते ,दूसरे शब्दों में दशकों पूर्व हम अपने अभिभावकों का बहुत सम्मान करते थे आज की जनरेशन में वह गुण कम दिखाई दे रहा है।

अतः अगर हम सभी मुद्दों की चर्चा के परिपेक्ष में विश्लेषण कर निष्कर्ष निकालेंगे तो हम पाएंगे कि वर्तमान जनरेशन के साथ हमको केवल अभिभावक, सटीक दोस्त, साथी ,बच्चा, मार्गदर्शक, सभी रूपों में उनके साथ खड़ा होना पड़ेगा उनकी नई सोच के साथ को कुछ हद तक हामी भरनी पड़ेगी ,और उनके विचारों के साथ कुछ हद तक खड़ा होना पड़ेगा ।परंतु यह विशेष ध्यान रखना होगा कि कहीं हमारे बच्चे मर्यादा की सीमा ना लांघे, अश्लील हरकतें ना करें सामाजिक व्यवस्था, आर्थिक सजगता, नैतिक मूल्य, स्कूल कॉलेज प्रशासन की मर्यादा, में कहीं भी चूक ना करें। यह अगर हमने कर दिया तो समझो जीवन की जंग जीत गए और बच्चे सुदृढ़ हो अपना जीवन समग्रता से व्यतीत करने हमारे ध्यान रखने में जरूर काबिल होंगे

-संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के तुल्य ब्रह्मांड में कोई सेवा नहीं

November 13, 2022

किसी ने रोज़ा रखा किसी ने उपवास- कबूल उसका हुआ जिसने मां-बाप को रखा अपने पास माता-पिता और बुजुर्गों की

व्यंग्य कविता-किसी को बताना मत|kisi ko batana mat

November 13, 2022

व्यंग्य कविता-किसी को बताना मत बड़े बुजुर्गों की कहावत सच है कि हाथी के दांत दिखाने खाने के और हैं

गरीबी पर भेदभाव क्यों ?|Why discrimination on poverty?

November 10, 2022

गरीबी पर भेदभाव क्यों ?|Why discrimination on poverty? सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समाज की श्रेणी में गरीब सवर्णों

Let’s fulfill our commitment by conserving water

November 8, 2022

जल ही अमृत है, जल ही औषधि है आओ जल संरक्षण कर अपनी प्रतिबद्धता निभाएं जीवन को प्रभावित करने वाले

बच्चों में भगवान बसते हैं/ children day special

November 8, 2022

यह कविता 14 नवंबर 2022 बाल दिवस के उपलक्ष में, बच्चों पर आधारित कविता है   कविता बच्चों में भगवान बसते

प्रकृति और वायु प्रदूषण/Nature and air pollution

November 8, 2022

प्रकृति और वायु प्रदूषण/Nature and air pollution वायु की गुणवत्ता एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गई है क्योंकि प्रदूषक फेफड़ों

Leave a Comment