Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु – सिद्धार्थ गोरखपुरी

 बड़े चालाक हो मेरे प्रभु  बड़े चालाक हो मेरे प्रभु हर गुत्थी सुलझाए रखते हो। बस हमे ही जीवन मृत्यु …


 बड़े चालाक हो मेरे प्रभु 

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु - सिद्धार्थ गोरखपुरी

बड़े चालाक हो मेरे प्रभु

हर गुत्थी सुलझाए रखते हो।

बस हमे ही जीवन मृत्यु के बीच

यूँहीं उलझाए रखते हो।

आदमी को ठोकर के बाद

पथ बोध कराया करते हो।

जब ठोकर देना होता है

तो क्रोध दिलाया करते हो।

सुख दुःख जीवन में ले आकर

समय का ज्ञान कराते हो।

क्या अथाह दुःख देकर के प्रभु

थोड़ा भी पछताते हो।

समय की मार से मानव को

समझाए रखते हो।

बस हमे ही जीवन मृत्यु के बीच

यूँहीं उलझाए रखते हो।

ठोकर पर ठोकर देकर के 

प्रभु कैसी दीक्षा देते हो।

समय बिपरीत जब होता है

तो कठिन परीक्षा लेते हो।

तुम्हारे सवालों का जवाब

समझ से परे होता है अक्सर।

तुम तो पूछ लेते हो प्रभु

ऐसे ही सवाल रह – रह कर।

सारे जीवों में मानव को 

प्रभु तुमने है बुद्धिमान बनाया।

खेल खेल गए बहुत बड़ा

प्रश्न न कोई आसान बनाया।

हम भी तुम्हारे बालक हैं 

अरे थोड़ी सी तो मया करो।

अब बहुत हो चुका सवाल जवाब

इस जीव पर भी दया करो।

– सिद्धार्थ गोरखपुरी


Related Posts

दुनियादारी की बात- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

दुनियादारी की बात ज्यादातर मेहनती एवं फुर्तीले लोगपसंद नहीं करते अपने आस-पासआलसी और कामचोर लोगों को,कभी उनको डांट डपट करतो

मीरा भटक रही- डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

मीरा भटक रही हे नाथ परवर दिगार करवाओ अपनी दीदारभक्तों की सुनो पुकारमीरा भटक रही संसार । मायाजाल क्यों बिछायासब

जो सबसे जरूरी है- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

जो सबसे जरूरी है एक दृश्य अक्सर दिख जाता है मुझे अपने आस-पास… चार कंधों पर अपनी आखिरी यात्रा परनिकले

काटब धान – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

काटब धान सखी रे हुलसायल मनमा आयल अगहन महीनमाधान काटी करब पबनियाचूड़ा कुट करब नेमनमा। कुल देवी के चढ़ायब नागुड़

छोड़ दो नफरत करना- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 16, 2021

छोड़ दो नफरत करना सिर्फ इसलिए कि कुछ बाघ नरभक्षी निकल जाते हैं,तो क्या दुनिया से उनका वजूदमिटा दिया जाना

मानव तन – डॉ इंदु कुमारी

December 16, 2021

 मानव तन अनमोल  यह तन पानी का बुलबुलामाया नगरी यह है संसारतारण हार प्रभु संग हैखोज लो बारम्बार बीता हुआ

Leave a Comment