Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

बजट में खेलिए ज़िंदगी की रेस आसान लगेगी

“बजट में खेलिए ज़िंदगी की रेस आसान लगेगी” परिवार चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं, लोहे के चने चबाने जितना …


“बजट में खेलिए ज़िंदगी की रेस आसान लगेगी”

बजट में खेलिए ज़िंदगी की रेस आसान लगेगी

परिवार चलाना कोई बच्चों का खेल नहीं, लोहे के चने चबाने जितना कठिन काम है। “संसार के सारे मर्दों के जज़्बे को सौ सलाम”। एक इंसान बीवी-बच्चों और परिवार को तमाम सुख-सुविधा देने के लिए रीढ़ झुकने तक ताज़िंदगी पसीने में नहाता है। उस मेहनत के बदले मिली पगार को अपनी पत्नी की हथेलियों पर एक भरोसे के साथ ये सोचकर रखता है, कि मेरी गृहलक्ष्मी इसका सही जगह पर इस्तमाल करके मेरा घर बखूबी चलाएगी; और कुछ बचत करके जरूरत पड़ने पर मेरी मदद करेगी। “कुछ मर्द पत्नी से कभी कोई हिसाब नहीं मांगते” पर क्या कुछ स्त्रियाँ उनको मिल रही सहुलियत का गैरफ़ायदा नहीं उठा रही? 

70% पुरुष अपने घर, परिवार के लिए जी रहे होते है। अपनी जरूरतों पर कैंची चलाते बीवी बच्चों को खुश रखने की मर्द की जद्दोजहद काबिले तारीफ़ है। एक इंसान सुबह टिफ़ीन लेकर निकल जाता है और रात को थका-हारा महज़ सोने के लिए घर आता है क्यूँ? क्यूँकि उसके परिवार को हर वो खुशी दे सके हर सुख सुविधा दे सकें।

त्योहारों पर भी बीवी-बच्चों पर सारा बोनस खर्च कर देंगे, अपने लिए एक चीज़ नहीं लेंगे। बीवी के आग्रह करने पर भी कहेंगे अरे पिछले साल लिए थे वो कपड़े दो-तीन बार ही पहने है वही चलेंगे, तुम अपने लिए साड़ी ले लो। गहने भी बीवी और बेटी के लिए बनवाएंगे खुद के लिए आधे तोले की चेइन भी नहीं लेंगे। और हम औरतें! महज मैचिंग की एक लेगिन्स लेने मौल में जाती है और लौटते वक्त दोनों हाथों में तीन-तीन बैग उठाकर वापस लौटती है। फिर घर आकर हिसाब लगाने पर अफ़सोस जताती है, हाय रे कुछ ज़्यादा ही खर्चा हो गया। फिर मन मनाते है, ठीक है अगली बार ध्यान रखूँगी। पर क्या अगली बार भी ध्यान रहता है? हरगिज़ नहीं! शोपिंग हर स्त्री की मनपसंद हाॅबी है। पुरुष छेद वाले बनियान में चार महीने निकाल लेते है, चप्पल भी चार टांके लगवा कर चला लेते है, बच्चों के पुराने मोबाइल में दो साल निकाल लेते है सिर्फ़ इसलिए की मेरे परिवार को सब नया दे सकूँ। और हम औरतें एक ही साड़ी दूसरी बार पहनने से ये सोचकर कतराती है कि अरे ये तो सबने एक बार देख ली है। क्या ऐसी मानसिकता पति के प्रति ज़्यादती नहीं है?

कुछ औरतें समाज का डर दिखाकर पास-पड़ोस, सहेली और रिश्तेदारों की देखा देखी करते पुरुष के कँधो पर इतना बोझ डाल देती है की बेचारा कितना भी जूझे दो सिरे जोड़ने में कामयाब होता ही नहीं। इस महंगाई के ज़माने में पुरुष कितना भी कमा कर दें औरतों की जरूरतें ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेती। कुछ औरतें यह नहीं सोचती की हर किसीकी कमाने की क्षमता एक सी नहीं होती, अपने पति की कमाई और अपनी हैसियत के हिसाब से खर्च करके पूरे महीने के बजट को ध्यान में रखने की बजाय आलतू-फ़ालतू चीज़ों पर खर्च करके बजट हिला देती है, और पति पर बर्डन ड़ाल देती है। किसी-किसी औरत को तो अपनी सहेली के पति की ज़्यादा कमाई देखकर अपना कम कमाने वाला पति निकम्मा और निठल्ला लगने लगता है। अरे भई आपने सब देखभाल कर, सोच समझकर शादी की थी; तो अब इतना असंतोष क्यूँ? सबकी तकदीर एक सी नहीं होती।

पैसे पेड़ पर नहीं उगते इंसान 12 घंटे पसीना बहाते है तब जाकर हरी पत्तियों के दर्शन होते है। पति पूरी पगार हाथ में रख दें और पूरी छूट दे दें इसका मतलब ये हरगिज़ नहीं की जो है, जितना है फूँक ड़ाले। एक बात हंमेशा याद रखें कि समय एक सा नहीं रहता, अचानक आई मुसीबतों के लिए बचत करना बेहद जरूरी होता है; ताकि खराब समय में किसीके आगे हाथ फैलाने की नौबत न आए।

कुछ औरतें दूसरों की थाली में कितना है ये देखने के चक्कर में खुद भूखी रह जाती है। मतलब सहेलियों के पास कितनी साड़ियाँ और ज़ेवर है उसकी इर्ष्या करते खुद के पास जो है उसका आनंद नहीं उठा पाती। पडोस में 58 इंच का बड़ा टीवी, या नया डबल डोर फ्रिज़ आता है तो अपने घर का 32 इंच का टीवी और सिंगल डोर फ्रिज़ खटकने लगता है। पर दिखावे के चक्कर में अपने पति की रीढ़ पर दुगना बोझ मत ड़ालिए। अपनी बँधी आय में घर का बजट बनाकर उस हिसाब से चलेंगे तो न बजट लड़खड़ाएगा न पति के कदम ड़गमगाएँगे न दिल का दौरा पड़ेगा। घर की लक्ष्मी बनकर रहेंगे तो घर में लक्ष्मी की चमक और रौनक दिखेगी। पति की सेहत से ज़्यादा बड़ी कोई दौलत नहीं। जरूरत से ज़्यादा बोझ तनाव पैदा करता है और तनाव का सीधा असर दिल पर पड़ता है। इसलिए जो है जितना है उसी में खुश रहना सिखिए ज़िंदगी आसान लगेगी।

About author

bhawna thaker
भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

Related Posts

शाकाहारी मनुष्यः दीर्घायुः भवति

October 31, 2022

आओ क्रूरता मुक्त जीवन शैली बनाने शाकाहारी बनें आधुनिक समाज में शाकाहारी आहार स्वस्थ जीवन शैली बनाने सबसे आश्चर्यजनक और

आर्यों का निवास और वैदिक संस्कृतियों-संस्कारों का घर हरियाणा।

October 31, 2022

आर्यों का निवास और वैदिक संस्कृतियों-संस्कारों का घर हरियाणा।/Aaryo ka nivas aur vedic sanskritiyon sanskaro ka ghar hariyana पंजाब पुनर्गठन

आपत्तिजनक कंटेंट का देना होगा जवाब, सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल।

October 30, 2022

 आपत्तिजनक कंटेंट का देना होगा जवाब, सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल। सोशल मीडिया पर लोगों की मनमानी को लेकर बहुत

चिड़िया मुक्त हुई – ट्विटर को खरीदने की डील पूरी हुई /Twitter deal-completed

October 30, 2022

 चिड़िया मुक्त हुई – ट्विटर को खरीदने की डील पूरी हुई  आओ निरंतर नवाचार और सीख़ने की आदत डालें  सभ्यता

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 147 वीं जयंती एकता दिवस पर विशेष/iron man sardar vallabhbhai patel 147 birth anniversary special

October 30, 2022

लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 147 वीं जयंती एकता दिवस पर विशेष/iron man sardar vallabhbhai patel 147 birth anniversary

क्या गर्भपात नैतिक रूप से उचित है?| Is abortion morally justified?

October 29, 2022

 क्या गर्भपात नैतिक रूप से उचित है?|Is abortion morally justified? लैंगिक समानता के लिए गर्भपात का अधिकार महत्वपूर्ण है। अलग-अलग

Leave a Comment