Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

बजट-डॉ. माध्वी बोरसे!

बजट! अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय योजना,इसके जरिए यह है सरकार को सोचना,अपने राज्य की तुलना में,सरकार …


बजट!

बजट-डॉ. माध्वी बोरसे!
अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की वित्तीय योजना,
इसके जरिए यह है सरकार को सोचना,
अपने राज्य की तुलना में,
सरकार का किस हद तक खर्चे को बढ़ाना और रोकना!

कोरोना की महामारी,
ने बढ़ा दी बेरोजगारी,
हुए खपत और खर्च प्रभावित,
परेशान गरीब जनता बेचारी!

जिससे अर्थव्यवस्था तीव्र गति से आगे बढ़े,
मिले जिसमें स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सुविधाएं,
बजट हो आम जनता के हित में,
सभी के जीवन में उम्मीद लाए!

बजट ऐसा जिसमें हो गरीबी कम,
आंखें ना हो किसी की नम,
किसानों को मिले दुगनी आय,
बेरोजगार को रोजगार दिला पाए हम!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
(स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

Sikhane ki koshish by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 सिखाने की कोशिश करें सिखाने की कोशिश करें अपने बच्चों को खाना बनाना भी पढ़ाई के साथ-साथ, वरना  लाखों के

Nishkam karm by Anita Sharma

September 4, 2021

 निष्काम कर्म हम कर्म करें निषकर्म भाव से। हो सेवा निष्कर्म भावों की। न अपेक्षा रखे किसी से। न उपेक्षित

Barsaat ki ek rat by Anita Sharma

September 4, 2021

बरसात की एक रात   इक रात अमावस की थी,         बरसता था पानी। रह-रह कर दामिनी

Kaikeyi ke ram by Sudhir Srivastava

September 4, 2021

 कैकेयी के राम कितना सरल है कैकेयी के चरित्र को परिभाषित करना, स्वार्थी, लालची, पतिहंता कहना, लांछन लगाना पुत्रमोही को

Kab tak madhusudan duadenge by vijay Lakshmi Pandey

September 4, 2021

 कब तक मधुसूदन दौड़ेंगे….!!! कब तक   मधुसूदन दौड़ेंगे । द्रुपद सुता की लाज बचानें।। दरबार सजा  जब  कौरव का ।

Moolbhoot samasyaye vhi hai by Jitendra Kabir

September 4, 2021

 मूलभूत समस्याएं वही हैं एक वक्त का खाना  जैसे तैसे जुटाकर  दूसरे वक्त की चिंता जिस इंसान के दिमाग में

Leave a Comment