Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

बच्छ बारस का व्रत

बच्छ बारस का व्रत अपना देश त्यौहारों का देश हैं,हर त्यौहार के पीछे परंपरा के साथ साथ कोई न कोई …


बच्छ बारस का व्रत

अपना देश त्यौहारों का देश हैं,हर त्यौहार के पीछे परंपरा के साथ साथ कोई न कोई संदेश या उद्देश रहता हैं।
गायें और बछड़े श्री कृष्ण को अधिक प्यारे थे जो समाज को दूध दहीं,मक्कन आदि देते हैं।ये व्रत बच्चों की प्राप्ति और उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता हैं।गौधुली वेला में गाय और बछड़े की पूजा की जाती हैं।जिसमे अंकुरित दालों का प्रयोग होता हैं।सोगरा,अंकुरित अनाज, मक्काई,बेसन आदि से बनी चीजों का खाने में प्रयोग किया जाता हैं।माता सारा दिन भूखी रह कर आस्था से व्रत रखती हैं।यदि घर में कोई नव जन्म बच्चा हो या नवविवाहित युगल हो तो इस व्रत को बहुत धूमधाम से मनाया जाता हैं।इस व्रत में पूजा के साथ कथा भी की जाती हैं।
एक बार अकाल पड़ा था पानी की बुंद बुंद के लिए गांव वाले तरस रहे थे।ये हालत हो गया कि प्यास और भूख से जानें चली जाने के डर से लोग चिंतित थे।कुएं से बार बार मिट्टी निकाली लेकिन पानी आने का नाम नहीं ले रहा था।फिर पंडित जी को बुला के पूछा तो उन्होंने बताया कोई बच्चे को कुएं में डालेंगे तब ही पानी आयेगा ऐसा ग्रह योग हैं।अब सेठ जी सोच में पड़ गए,उनका अपना पोता था लेकिन कैसे उसे डाल दे कुएं में?सेठ परेशान रहने लगे थे बहुत लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ पा रहा था।उन्हीं दिनों बच्चे को दादा दादी के पास छोड़ कर बहु रखी मानने मायके जा रही थी। सेठ जी बहुत ही कश्म कश में थे अपना पोता या गांव वालों का जीवन दोनों में से एक को पसंद करना था। सेठ जी बच्चे के साथ कुएं के पास से गुजरे तो उनको पंडित जी की बात का खयाल आया और जी कड़ा करके उन्होंने बच्चे को कुएं में धकेल दिया।और रोते बिलखते घर आ गए।अब काफी दिनों तक बहू को लिवाने कोई नहीं गया तो वह भी हैरान थी बात तो कुछ दिनो की ही थी,दस दिन हो गाएं किंतु कोई लिवाने नहीं आया तो वह खुद ही निकल ली।चलते चलते कुएं के पास आई तो कुआं तो पानी से लबों लब भरा हुआ था।बड़ी खुश हो उसने कुएं के पानी से स्नान किया और पास ही में गाय को देखा तो उसे बाछ बरस की याद आ गईं और उनकी पूजा कर वह खड़ी हुई तो अपने बच्चे को खेलता देख उसे पुकारा और हाथ पकड़ घर की और चल दी।इतनी देर में सेठ जी तक बहू के लौट आने की खबर पहुंच चुकी थी तो वे भी उसे सांत्वना देने की सोच कुएं की और चल दिए,लेकिन बहु के साथ पिता देख खुशी से रो पड़े और बहु के चरण छू लिए।हिचकिचाती बहु पीछे हो ली की ये क्या उल्टी गंगा थी,पांव तो उसे अपने ससुर के छू ने चाहिएं थे।
तीनों राजी खुशी से घर की और चल पड़े।
( ये कथा सुनी हुई हैं इस कथा में किसी को भी बच्चे को कुएं में। डालने के संकेत नहीं हैं)

About Author

जयश्री बिरमी सेवानिवृत शिक्षिका  अहमदाबाद

जयश्री बिरमी

सेवानिवृत शिक्षिका 
अहमदाबाद

Related Posts

ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति क्यों नहीं हैं।

April 30, 2022

 ग्रामीण और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति क्यों नहीं हैं।    केंद्रीय विद्युत मंत्रालय देश में बिजली उपभोक्ताओं के

ब्लैक टाइगर… रविंद्र कौशिक

April 30, 2022

ब्लैक टाइगर… रविंद्र कौशिक देश की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा में सेना लगी हुई है और देश के भीतरी भाग

मज़बूत स्वस्थ्य और समृद्ध भारत मिशन

April 30, 2022

मज़बूत स्वस्थ्य और समृद्ध भारत मिशन गतिहीन और तनावपूर्ण जीवनशैली के साथ अस्वस्थ्यकर भोजन की आदतें गैर संक्रमणकारी रोगों की

वैश्विक प्रश्नों में अपने देश की उपलब्धियां

April 30, 2022

वैश्विक प्रश्नों में अपने देश की उपलब्धियां भारत की वैश्विक रूतबा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हैं, इस बात में

पड़ाव

April 30, 2022

पड़ाव ढल रही थी सांझ सी उम्र की लाली भीगहरी होती जा रही थी समझदारी की लकीरेंबालों में भी शुरू

बंद मुट्ठी लाख़ की खुल गई तो ख़ाक की

April 30, 2022

बंद मुट्ठी लाख़ की खुल गई तो ख़ाक की पारिवारिक, सामाजिक, व्यवसायिक, राजनीतिक सहित अनेक क्षेत्रों के संबंध में बंद

Leave a Comment