Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

बच्चन जी- सुधीर श्रीवास्तव

बच्चन जी सत्ताइस नवंबर उन्नीस सौ सात कोकायस्थ कुल में पैदापिता प्रताप नारायण के घरमां सरस्वती देवी की कोख सेप्रतापगढ़ …


बच्चन जी

बच्चन जी- सुधीर श्रीवास्तव
सत्ताइस नवंबर उन्नीस सौ सात को
कायस्थ कुल में पैदा
पिता प्रताप नारायण के घर
मां सरस्वती देवी की कोख से
प्रतापगढ़ ,उ.प्र. में जन्मा बालक
बचपन में बच्चन कहलाया
बड़े प्यार दुलार से।
प्रारम्भिक  शिक्षा कायस्थ पाठशाला में
हिंदी, उर्दू की शिक्षा पाई,
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में
अंग्रेजी में एम.ए पास किया,
कैंब्रिज में डब्लू. बी. यीट्स की
कविताओं पर शोध कर
पीएचडी कर नाम किया।
उन्नीस वर्ष की उम्र में
श्यामा के संग ब्याह हुआ,
दस वर्ष ही साथ रहा
फिर श्यामा का निधन हो गया,
पाँच वर्ष के बाद फिर
तेजी सूरी से ब्याह किया,
अमिताभ, अजिताभ के पिता बने
जीवन तब खुशहाल हुआ।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में
प्राध्यापक नियुक्त हुए,
फिर विदेश मंत्रालय में
हिंदी के विशेषज्ञ बने,
हिंदी के लोकप्रिय कवियों में
बच्चन जी गिने गये।
अनगिनत कविताएं लिखी
अनेकों पुस्तकें संग्रह छपवाये,
मधुशाला लिखकर बच्चन ने
दुनिया भर में नाम कमाए
हरवंश राय बच्चन अपना
नाम शिला पर लिखवाए।
राज्यसभा के सदस्य बने
पर राजनीति में घुले नहीं,
उन्नीस सौ छिहत्तर में
शिक्षा और साहित्य क्षेत्र का
पद्मभूषण सम्मान पाये,
उन्नीस सौ अड़सठ में हिन्दी कविता का
साहित्य अकादमी पुरस्कार और
इसी वर्ष में ही बच्चन जी
सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार और
एफ्रो एशियाई सम्मेलन का
कमल पुरस्कार सम्मान भी पाये
बिड़ला फाउण्डेशन ने उनकी
आत्मकथा को मान दिया
जिसके खातिर बच्चन जी को
सरस्वती सम्मान दिया।
अठारह जनवरी दो हजार तीन में
मुंबई में बच्चन जी का निधन हुआ,
कालजयी सरस्वती पुत्र के
युग का जैसे अंत हुआ,
पर बच्चन का नाम धरा पर
सदा सदा के लिए अमर हुआ।

●सुधीर श्रीवास्तव

गोण्डा, उ.प्र.

8115285921 मौलिक, स्वरचित


Related Posts

अकेली होती कहां

June 24, 2022

 अकेली होती कहां डॉ. इन्दु कुमारी मेरे तो सब साथी  मैं अकेली होती कहां  हवा से भी बातें करती  पेड़

जल संरक्षण

June 24, 2022

 जल संरक्षण डॉ. इन्दु कुमारी जल ही जीवन है जीवन के संजीवन है इसे बचाना पुण्य कार्य  यही असली जनसेवार्थ।

लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी

June 23, 2022

 “लहरों से दोस्ती महंगी पड़ी हुज़ूर ज्वार उठा ऐसा की तैरना जानते हुए भी शख्सियत मेरी किनारे लगी” भावना ठाकर

कितना कठिन होता है ना? माँ होना

June 23, 2022

 कितना कठिन होता है ना? माँ होना सिद्धार्थ गोरखपुरी बचपने से सबको खुश कर देना और जवां होना। बस उँगलियों

कविता – छाँव सा है पिता

June 23, 2022

 कविता – छाँव सा है पिता सिद्धार्थ गोरखपुरी गलतफहमी है के अलाव सा है पिता घना वृक्ष है पीपल की

कविता -आँखें भी बोलती हैं

June 23, 2022

 कविता -आँखें भी बोलती हैं सिद्धार्थ गोरखपुरी न जीभ है न कंठ है कहने का न कोई अंत है दिखने

PreviousNext

Leave a Comment