Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel
बचपन| kavita-Bachpan

kanchan chauhan, poem

बचपन| kavita-Bachpan

बचपन हंसता खिलखिलाता बचपन,कितना मन को भाता है। पीछे मुड़कर देखूं और सोचूं, बचपन पंख लगा उड़ जाता है। बड़ी …


बचपन

हंसता खिलखिलाता बचपन,कितना मन को भाता है।
पीछे मुड़कर देखूं और सोचूं, बचपन पंख लगा उड़ जाता है।

बड़ी रीझ थी बड़े होने की, कितने सपने पाले थे।
बड़े हो कर हम ये करेंगे,वो बनेंगे, कितने पंख लगा डाले थे।

बिना पंख के उड़ना तो बस बचपन में ही सम्भव था।
बड़े हुए तब जाकर हम, असल जीवन से दो-चार हुए,

अपना सोचें तो अपने रूठें,अपनों का सोचें तो सपने टूटें,
ऐसा होता है बड़े होना , कभी ऐसा तो नहीं सोचा था।

भूल गए अपनी मनमर्जी,भूलें बिसरे सब राग हुए।
ना अपनी मर्ज़ी से जाना, मनमानी अब ना कर पाना,
अपनी बात भी ना रख पाना,बेबस अपने हालात हुए।

कहने को सब कुछ अपना है,पर अपना अब कुछ भी नहीं।
जो मेरा है वो सब का है, जो सबका है वो मेरा नहीं।
ख्वाबों की दुनिया से निकल कर, सच से जब दो-चार हुए,

जाना और फिर हमने माना ,बचपन होता है बड़ा सुहाना ,
हम फिर से जीना चाहें वहीं दिन, मन फिर से बच्चा बनना चाहें।

हंसता खिलखिलाता बचपन, अब कितना मन को भाए।
पंख लगा उड़ गया जो बचपन,अब भी यादों में जिंदा हैं

सौ बातों की एक बात है,अब वो दिन ना वापस आने हैं।
जीना है अब तो इसी पल को,हर पल जी भर कर जी लो।

जीवन का हर लम्हा अनमोल है, लौट कर ना फिर आएगा।
बीती बातों को याद करने में,ये लम्हा भी चला जाएगा।

जीना है अब हर पल को,हर लम्हा जी भर कर जी लो।
यही है जीवन की सुंदरता है, हर पल को जी भर जी लो।

About author

कंचन चौहान,बीकानेर

Related Posts

मैं मणिपुर हूं | main Manipur hun kavita

August 11, 2023

मैं मणिपुर हूं सुन सको तो सुनो, दिल को मजबूत कर, दास्तां अपने ग़म की बताता हूं मैं,मैं मणिपुर हूं,

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई

August 11, 2023

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई दर्द-ए चीख मेरी, मेरे ही भीतर तोड़ मुझे घुटके रह गईनकाब हंसी

Munshi premchandra par kavita |प्रेमचंद

July 31, 2023

प्रेमचंद Munshi premchandra एक ख़्वाहिश है, कि कभी जो तुम एक दोस्त बनकर मिलो,तो कुल्हड़ में चाय लेकर,तुम्हारे साथ सुबह

सात सुरों से भर दो | saat suron se bhar do kavita

July 28, 2023

सात सुरों से भर दो सात सुरों से भर दो बेरंग सी हुई मेरी दर्द-ए जिंदगी में, रंग भर दो

नव वसंत | Nav basant by priti Chaudhary

July 24, 2023

नव वसंत नव वसंत तुम लेकर आना, पतझर सा है यह जीवन। सूख चुकी है सब शाखाएँ, झरते नित ही

कविता -जीभ|ज़बान | kavita :jeebh | jaban

July 21, 2023

कविता -जीभ|ज़बान | kavita:jeebh | jaban आवाज़ की तेरे मैं साथी,स्वाद से कराती तेरी पहचान।चाहे हो भोजन या फिर रिश्ते,मेरा

PreviousNext

Leave a Comment