Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Tamanna_Matlani

प्रेम की महक आ गई-कविता

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात प्रेम की महक आ गई महफिलों की चाहत थी,तन्हाई वो निभा गई, साथ था …


नन्हीं कड़ी में….
आज की बात

प्रेम की महक आ गई

तमन्ना मतलानी
महफिलों की चाहत थी,तन्हाई वो निभा गई,

साथ था माँगा खुशियों से,अकेले जीना सिखा गई,
हंसना चाहा था जीवन भर लेकिन आँखो से नीर बहा गई,
फिर भी आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

अधूरे ख्वाबों को वो फिर से दिखा गई,
भूल गई थी जो यादें वो फिर से याद करवा गई,
टूट गए थे आईने जो , उन्हें दर्पण बना गई,
फिर भी आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

हँसी के दिनों में वो फिर से रुला गई,
दिन छोटे और रातें लंबी बना गई,
सूखे जख्मों को कुरेदकर खुशी कहीं चली गई,
फिर भी आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

आज की बारिश तो जैसे कहर सा ढा गई,
गीले सिर को तौलिये से पोछना भुला गई,
खुशियों को मातम में बदलकर वो चली गई,
फिर भी आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

वीरान सड़कों पर कदमों के निशान बना गई,
चलना था दूर तक पर रास्ते पर ही थका गई,
पास थी जो मंजिल मेरी उसे दूर सरका गई,
फिर भी आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

जो पाने का था जज्बा उसे अधूरा छोड़़ गई,
हालातों से लड़ने की हिम्मत तो बहुत जुटा गई,
पर न जाने क्यों हार का एहसास भी करा गई,
फिर भी आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

जिंदगी कानों में होले से आकर बुदबुदा गई,
उसकी यादों के आगे एक जहां और भी है,
इसी एक आवाज में जिंदगी मुझे बहुत कुछ कहना सिखा गई,
लो फिर आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

कुछ पाने की ललक में जिंदगी जीना सिखा गई,
गिरकर फिर संभलना है कैसे,चोट देकर सिखा गई,
न हारेंगे, न रुकेंगे, ऐसा आत्मविश्वास का सबक दे गई,
लो फिर आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

ऐ जिंदगी ! तू मुझे क्या-क्या न सिखा गई,
कि न थकना तुझे है, न रुकना मुझे है,
चलना था मुश्किल पर तू तमन्ना को भी दौड़ना सिखा गई,
लो फिर आज जिदगी में प्रेम की महक आ गई…

तमन्ना मतलानी
गोंदिया(महाराष्ट्र)


Related Posts

मोम सा दिल | mom sa dil

August 11, 2023

मोम सा दिल सुनो दिकु……चोटें तो बहोत लगी इस सफर मेंपर दर्द का कभी एहसास ना हुआ चाहनेवाले बहोत मिले

मैं मणिपुर हूं | main Manipur hun kavita

August 11, 2023

मैं मणिपुर हूं सुन सको तो सुनो, दिल को मजबूत कर, दास्तां अपने ग़म की बताता हूं मैं,मैं मणिपुर हूं,

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई

August 11, 2023

मैं, मैं होकर भी, मैं ना रह गई दर्द-ए चीख मेरी, मेरे ही भीतर तोड़ मुझे घुटके रह गईनकाब हंसी

Munshi premchandra par kavita |प्रेमचंद

July 31, 2023

प्रेमचंद Munshi premchandra एक ख़्वाहिश है, कि कभी जो तुम एक दोस्त बनकर मिलो,तो कुल्हड़ में चाय लेकर,तुम्हारे साथ सुबह

सात सुरों से भर दो | saat suron se bhar do kavita

July 28, 2023

सात सुरों से भर दो सात सुरों से भर दो बेरंग सी हुई मेरी दर्द-ए जिंदगी में, रंग भर दो

नव वसंत | Nav basant by priti Chaudhary

July 24, 2023

नव वसंत नव वसंत तुम लेकर आना, पतझर सा है यह जीवन। सूख चुकी है सब शाखाएँ, झरते नित ही

PreviousNext

Leave a Comment