Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

प्रसन्न मन!

प्रसन्न मन! डॉ. माध्वी बोरसे! जब मन होता है प्रसन्न,रोकने को चाहता है वह क्षण,चलता वक्त थम जाए,कई और हम …


प्रसन्न मन!

डॉ. माध्वी बोरसे!
डॉ. माध्वी बोरसे!

जब मन होता है प्रसन्न,
रोकने को चाहता है वह क्षण,
चलता वक्त थम जाए,
कई और हम स्वयं को पाए!

मुस्कुराहट हमारे चेहरे पर बनी रहे,
कानों में प्यारी सी ध्वनि कुछ कहे,
उस सुगंध का एहसास निरंतर रहे,
ह्रदय में खुशियों की हमेशा लहर बहे!

अपार आनंद में हमारा झूमना,
हसीन वादियों में घूमना,
उस हर्षोल्लास के साथ,
करें हम सभी से बात!

खोकर वह प्यारी सी मासूमियत,
कैसे दे खुश रहने की नसीहत,
भूल जाए कुछ समय के लिए फिक्र,
बचपन का करें फिर से जिक्र!

मन को फिर से प्रसन्न होने दें,
उसे बचपन की यादों में खोने दें,
जब वह चाहे उसे हंसने, रोने दे,
कुछ सपने उसे स्वयं से संजोने दे!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

शुक्रिया- नाचीज बीकानेरी

April 18, 2022

शुक्रिया शुक्रिया-ए-अल्लाह-शुक्रिया । तूने जो हमें इंसान बनाया ।। तेरी तारीफ कैसे करूँ । अल्फ़ाज़ देने वाला तू हैं ।।

हाल -ए-दिल- मईनुदीन कोहरी नाचीज़ बीकानेरी

April 18, 2022

हाल -ए-दिल खुशियों के फूल सदा खिलते रहें ।इंसानियत के कदम भी बढाते रहें ।।जमाने के हर दौर से गुजर

श्रीराम-सिद्धार्थ गोरखपुरी

April 18, 2022

श्रीराम चैत्र शुक्ल नवमी तिथि परश्रीराम धरा पर आए थेअवधपुरी में इस तिथि परखुशियों के बादल छाए थेपुरुषो में पुरुषोत्तम

नव वर्ष सुहानी- डॉ.इन्दु कुमारी

April 18, 2022

नव वर्ष सुहानी आम्र मंजरों से से लदे हुए फल फूलों से सजे हुएकली कुसुम मुस्कान भरे हैंकोयल सुर में

ईर्ष्या तू ना गई – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

ईर्ष्या तू ना गई देखकर लोगों की सुख-सुविधा जल रही तू खूब जलन सेअपनी दुख की चिंता नहीं हैदूसरों के

कर्म महान है – डॉ. इन्दु कुमारी

April 18, 2022

कर्म महान है बच्चे भगवान हैं शिक्षा हमारी आधार हैगुणवत्तापूर्ण है विकल्प शत प्रतिशत लागू करना शिक्षकों का है संकल्पऐसा

Leave a Comment