Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, lekh

प्रतिष्ठा बनाए रखें।- डॉ. माध्वी बोरसे!

प्रतिष्ठा बनाए रखें। एक बार की बात है, दूर एक रेगिस्तान में, एक गुलाब था जिसे अपने सुंदरता पर बहुत …


प्रतिष्ठा बनाए रखें।

प्रतिष्ठा बनाए रखें।- डॉ. माध्वी बोरसे!
एक बार की बात है, दूर एक रेगिस्तान में, एक गुलाब था जिसे अपने सुंदरता पर बहुत अभिमान था। उसकी एकमात्र शिकायत थी की एक बदसूरत कैक्टस उसके बगल में बढ़ रही थी।

हर दिन, सुंदर गुलाब कैक्टस का अपमान करता था और उसके अच्छे ना दिखने पर उसका मजाक उड़ाता था, जबकि कैक्टस चुप रहता था। आस-पास के अन्य सभी पौधों ने गुलाब को समझाने की कोशिश की!

एक दिन चिलचिलाती गर्मी में रेगिस्तान सूख गया, और पौधों के लिए पानी नहीं बचा। गुलाब जल्दी मुरझाने लगा। उसकी सुंदर पंखुड़ियाँ सूख गईं, अपना सुंदर सा आकर्षण अब गुलाब खोने लगा ।

कैक्टस की ओर देखते हुए, उसने देखा कि एक गौरैया पानी पीने के लिए अपनी चोंच को कैक्टस में डुबा रही है। अपने पिछले किए गए अपमान पर गुलाब ने कैक्टस से शर्मिंदगी से पूछा और मदद मांगी कि क्या उसे कुछ पानी मिल सकता है। दयालु कैक्टस आसानी से सहमत हो गया, उन दोनों को अत्यंत गर्मी में, दोस्तों के रूप में मदद करने लगा!
जीवन में समय और स्थिति, किसी की भी बदल सकती है, अतः कभी किसी का अपमान ना करें एवं किसी को तुच्छ ना समझे!

जीवन में, सब कुछ खूबसूरत होना नहीं होता, हमें हर प्रकार से खूबसूरत होना चाहिए, हमारे तन के साथ-साथ मन भी आकर्षित होना चाहिए और मन का आकर्षित होना अत्यंत आवश्यक है! जीवन में हर एक की अपनी खूबसूरती है, अगर हम किसी की खूबसूरती को पहचान ना सके तो कम से कम उसका अपमान ना कीजिए!

जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि।।

रहीम ने इस दोहे में बताया है कि हमें कभी भी बड़ी वस्तु की चाहत में छोटी वस्तु को फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि जो काम एक सुई कर सकती है वही काम एक तलवार नहीं कर सकती। अत: हर वस्तु का अपना अलग महत्व है। ठीक इसी प्रकार हमें किसी भी इंसान को छोटा नहीं समझना चाहिए!

हर एक का अपना महत्व है, उस महत्व को पहचानिए, सभी का आदर सम्मान कीजिए, अगर ऐसा नहीं कर सकते तो कम से कम अपमान ना कीजिए! इस धरती पे ईश्वर ने सभी को किसी ना किसी कार्य के लिए भेजा है, कहीं ना कहीं सभी जरूरी है, अपने कार्यों से सभी की मदद करें और सभी का सम्मान करें, जिससे हमें कभी किसी की मदद की जरूरत पड़ी, तो हमें इस कहानी के, गुलाब की तरह शर्मिंदा ना होना पड़े!

कहते हैं सोच खूबसूरत हो, तो सब खूबसूरत नजर आता है और देखने वालों की आंखों में सुंदरता होती है, तो वह सुंदरता को हमें हमारे अंतर्मन में लाना अत्यंत आवश्यक है!
हम किसी का एक क्षण में अपमान कर देते हैं, पर जिसका करते हैं उसे तब तक चैन नहीं मिलता, जब तक वह उस अपमान का कर्ज ना चुका दें!

जीवन में हर एक इंसान, इस कहानी के कैक्टस पौधे की तरह दयालु नहीं होता है, याद रखिए कि जिस समय हम किसी का अपमान कर रहे होते तो साथ ही साथ हम अपना भी सम्मान खो रहे होते हैं!
कुछ लोग जरूर सही समय का इंतजार करते हैं, कि कब अपने अपमान का बदला ले सके, क्योंकि यह इंसान को अंदर तक ठेस पहुंचाती है! अपमान करना इंसान के स्वभाव में होता है परंतु सम्मान करना हमारे संस्कार में, जी संस्कारों की सही भाषा हमें जानने की आवश्यकता है और सम्मान करना उन संस्कारों में से एक!

करो प्रशंसा जी भर के,
करो अपमान सोच समझ के,
अपमान वह ऋण है,
ब्याज समित चुकता है,
गरज – बरस के!

डॉ. माध्वी बोरसे!
क्रांतिकारी लेखिका !
राजस्थान! (रावतभाटा)


Related Posts

ESESC podcast boosts the morale of students.

August 10, 2023

The ESESC (Edutainment Spoken English and Smart Classes) podcast boosts the morale of students. Recently, the renowned global educator, respected

आम आदमी की आह – दर्द-ए-टमाटर

August 10, 2023

आम आदमी की आह – दर्द-ए-टमाटर टमाटर की महंगाई – राजभवन में टमाटर के इस्तेमाल पर राज्यपाल ने रोक लगाई

सिंधी सेवादारी मंडल के प्रणेता को सैल्यूट – 21वीं पुण्यतिथि

August 10, 2023

चिट्ठी न कोई संदेश ना जाने कौनसा देश जहां तुम चले गए सिंधी सेवादारी मंडल के प्रणेता को सैल्यूट –

अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव 2024 – रेस में भारतीय मूल के तीन दावेदार

July 31, 2023

भारतीय मूल की तैयारी – ब्रिटेन के बाद अमेरिका की बारी – राष्ट्रपति का ताज़ पहनने की बेकरारी अमेरिका राष्ट्रपति

मेरी माटी-मेरा देश, मन की बात या उपदेश

July 31, 2023

मेरी माटी-मेरा देश, मन की बात या उपदेश मेरी माटी-मेरा देश, मन की बात या उपदेश सोचिये क्या हमारे देश

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ

July 31, 2023

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ –   राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की तीसरी वर्षगांठ 29-30 जुलाई 2023 दो दिवसीय

PreviousNext

Leave a Comment