Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

प्रणय जीवन- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

प्रणय जीवन प्रेम जीवन में प्रवाहित,प्रेम से जीवन जुड़ा है,प्रेम का परिणाम हम हैं,प्रेम को जीवन समर्पित ।। जिंदगी पर्याय …


प्रणय जीवन

प्रणय जीवन- डॉ हरे कृष्ण मिश्र
प्रेम जीवन में प्रवाहित,
प्रेम से जीवन जुड़ा है,
प्रेम का परिणाम हम हैं,
प्रेम को जीवन समर्पित ।।

जिंदगी पर्याय तुमसे ,
जिंदगी की कामना तू ,
जिंदगी में तू प्रवाहित,
जिंदगी तुमसे है मेरी ।।

इस धरा की तू है धरोहर,
इस धरा पर जब तू आई,
इस धरा पर पैगाम तेरा ,
इस धरा पर मुझको मिला ।।

प्यार का परिणाम तेरा ,
परिणय में मुझको मिला,
प्रिय पावन सौंदर्य तेरा ,
प्रणय का अनुदान पाया।।

प्रीति तेरी रीत बन गई ,
प्रीत में हर रीत निभाई ,
प्रीत पावन पथ हमारा ,
प्रीत के ही गीत मेरे ।।

अर्चना में चल करूं मैं,
आराधना हर दम तुम्हारी,
अभ्यर्थना किसका करूं ,
छोड़ मुझको तुम गयी ।।
चल बंदना में आओ बैठें ,
साथ मिलकर हाथ जोड़ें,
प्रीत की है रीत यह तो ,
प्रीत है पावन हमारा ।।
कितना पुराना बंधन हमारा,
टूट जाएगा न सोचा मैं कभी,
हर समर्पण परिपूर्ण अपना ,
प्रतिदान में सब कुछ मिला है ।।

जिधर हमारी दृष्टि घूम गई ,
तुम्हारा ही मुस्कान मिला है ,
दुनिया तो यह बहुत बड़ी है,
सर्वत्र तुम्हारा प्यार मिला है ।।

तुम बहुत दूर मुझसे जा बैठी,
क्या खता हुई मेरी प्रीति में ,
कुछ कहने को शब्द नहीं हैं ,
फिर भी अभिव्यक्ति मेरी है ।।

जनम जनम का साथ है मेरा,
क्यों दर्द लिए मैं आज अकेला ,
अतीत हमारा कितना सुंदर है
वर्तमान हमारा हमसे रूठा है ।।

आभार भरा हृदय अभिव्यक्ति,
नयन नीर में लेकर आया हूं ,
, क्या बोलूं किससे मैं अपनी,
कुछ व्यक्त नहीं मैं कर पाता हूं ।।

मौलिक रचना
डॉ हरे कृष्ण मिश्र
बोकारो स्टील सिटी
झारखंड।


Related Posts

माँ- डॉ. इन्दु कुमारी

February 14, 2022

माँ मां देती आंचल की छायाप्रेम की मूरत सी सुंदर कायाअगाध प्रेम की द्योतक रही वात्सल्य ह्रदय शोभनीय रही रब

यादें-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

यादें जब आई न नींद खूब उधेड़े ताने बानेकुछ दिन ही नहीं कुछ महिनें ही नहींसालो तक पहुंचाईबचपन से हुई

आज फिर बसंत आई हैं-जयश्री बिरमी

February 14, 2022

आज फिर बसंत आई हैं पतझड़ की छोड़ चुन्नरआज बसंत ने फिर ली अंगड़ाई हैंहैं बरखा ऋतुओं की रानीबसंत भी

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती

February 14, 2022

सांप्रदायिक सद्भाव, सौद्रह्यता भारत की खूबसूरती सामाजिक सद्भाव, सौद्रह्यता, समरसता, मानवतावादी दृष्टि की सोच में युवाओं की ऊर्जा का सदुपयोग

जब वह चुप है- डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

जब वह चुप है! जब वह चुप है इंसान,क्यों कर रहा तू हर जगह बखान,निंदा करना सबसे बड़ा पाप,हर गलती

अंदाजा-डॉ. माध्वी बोरसे!

February 14, 2022

अंदाजा! ठहरा हुआ दरिया होता है बहुत गहरा ,मुस्कुराहट के पीछे भी हे एक खामोश चेहरा,किसी भी हस्ती को अंदाजे

Leave a Comment