Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

ashish_yadav, lekh

प्रकृति के नियम-आशीष यादव

 प्रकृति के नियम { विधि का विधान , जैसी करनी वैसी भरनी } प्रत्येक क्रिया की ठीक उसी तरह की एक …


 प्रकृति के नियम
 { विधि का विधान , जैसी करनी वैसी भरनी }

प्रकृति के नियम-आशीष यादव
प्रत्येक क्रिया की ठीक उसी तरह की एक वितरित प्रतिक्रिया होती है 

भीख मांगो , चोरी करो या उधार लो , घूस दो या ठगों , किसी भी तरह धन प्राप्त करो और मौज करो ! अथवा कम से कम ज़िन्दा रहो | 

किसी भी कीमत पर आगे बढ़ने की अंन्धी दौड़ ; क्या हमने कभी बैठकर यह सोचने का प्रयास किया है कि हम अपने कमौं के लिए उत्तरदायी ठहराये जाएंगे ? शास्त्रों में जिन नारकीय यातनाओं का वर्णन किया गया है, क्या वे वस्तुत: सत्य है? 

‘ प्रकृति के नियम ‘ में आशीष समझाते हैं कि `कर्म’ क्या है पाप क्या है और किस कर्म के लिए हमें दण्ड मिलता है | निष्कर्ष अपरिहार्य है : अधिकतर लोग बहुत ही दु:खद भविष्य की तैयारी में है क्या ? 

यह कोई परिहास नहीं है! आप इस बात पर अवश्य गोर करें और समझें कि अपने जीवन को साफ़-सुथरा बनाने के लिए आपको क्या करना चाहिए! कहीं देर न हो जाए |

आशीष यादव 
कानपुर देहात 


Related Posts

संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा का मुकाबला।

August 11, 2023

संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा का मुकाबला। Image credit -Google ऐसे कई उदाहरण हैं जहां विकास कार्यक्रमों और दृष्टिकोणों से हिंसा

टोल का झोल, टैक्स पर टैक्स और खराब सड़कों के लिए टोल टैक्स क्यों?

August 11, 2023

टोल का झोल, टैक्स पर टैक्स और खराब सड़कों के लिए टोल टैक्स क्यों? सड़क विकास और रखरखाव के वित्तपोषण

परीक्षा बनी जंजाल’ युवाओं की ज़िंदगी ‘बदहाल’

August 11, 2023

‘परीक्षा बनी जंजाल’ युवाओं की ज़िंदगी ‘बदहाल’ युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने मे लगे हुए हैं, व्यवस्था राम भरोसे। बच्चों

Independence day special:आजादी का तमाशा कब तक?

August 11, 2023

आजादी का तमाशा कब तक? आजादी की 76वीं वर्षगांठ के अवसर पर क्या हम खुलकर कह सकते है कि वास्तव

छुआछूत की बीमारी की तरह फैलती है हिंसा

August 11, 2023

छुआछूत की बीमारी की तरह फैलती है हिंसा हिंसा के शिकार लोगों को समझाना जरुरी है। बदला लेने की मानसिकता

मेवात-मणिपुर सांप्रदायिक हिंसा विशेष

August 11, 2023

मेवात-मणिपुर सांप्रदायिक हिंसा विशेष कब गीता ने ये कहा, बोली कहां कुरान।करो धर्म के नाम पर, धरती लहूलुहान।। नेशनल क्राइम

PreviousNext

Leave a Comment