Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

प्रकृति की गोदी ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,हम शोध खोज न कर पाते हैं ,पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है …


प्रकृति की गोदी

प्रकृति की गोदी- डॉ हरे कृष्ण मिश्र
ध्यान साधना वरदान प्रकृति की,
हम शोध खोज न कर पाते हैं ,
पूर्ण प्रकृति हमारी ध्यान मग्न है ,
सुंदर चिंतन का विषय वस्तु है। ।।

हमें जल प्रपात सुंदर से झरने,
शब्द ध्वनि कर कुछ कहते हैं ,
हम मानव का ध्यान कहां है ,
संरक्षक उसे ना दे पाते हैं ।।

सदियों से है साथ उसी का ,
नवजीवन बसाया  है उसने मेरा ,
जीवन निर्वाह के सब साधन हैं,
फिर भी दूर उसी से हम हैं ।।

कहते हैं इस धरा धाम पर ,
प्रणय गीत मानव बन आया,
आए उत्सुक प्रकृति गोद में ,
आनंद लिए हम अपना सारा ।।

धरा धाम की कथा मनोहर ,
श्रद्धा मनु का आविर्भाव है ,
हिम गोदी में चल कर आए ,
अपना तो इतिहास यही है ।।

कितना सुंदर कितना पावन ,
हम प्रकृति के सुंदर उपहार ,
क्रीड़ा कर पावस प्रदेश में ,
चल आए इस धरा धाम पर।।

अभिनंदन करते मातृभूमि का,
जीवन पाया जिसमें मधुमास,
ध्यान मग्न इस धरा धाम पर,
मिला जीवन सुंदर आयाम ।।

ऊर्जा स्रोत प्रकृति की गोदी ,
लेकर आता सुंदर प्रभात ,
बिंब प्रकृति के मनमोहक,
मन मंदिर में बन जाते हैं ।।

कल-कल करती धारा में ,
नदियां गाती इसी प्रदेश में ,
प्रकृति का कितना विस्तार,
सौंदर्य समेटता काव्यशास्त्र ।।

मौलिक रचना
डॉ हरे कृष्ण मिश्र
बोकारो स्टील सिटी
झारखंड।


Related Posts

हार कविता -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

हार! बेहतर होने का अनुभव देती हैं,यह तो सीरीफ एक परिस्थिति है,सफलता का सबसे बड़ा रास्ता होती है,कुछ देर की

21 वीं सदी की नारी-डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

21 वीं सदी की नारी! उठाओ कलम, पुस्तक व लैपटॉपकरो परीक्षा की तैयारी,कुछ तुम उठाओ,कुछ परिवार में बाटोअपने घर की

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन -डॉ. माध्वी बोरसे!

December 3, 2021

सोच में लाए थोड़ा परिवर्तन ! कोई कोई तहजीब, सलीका, अदब नहीं खोता,सर झुकाता हुआ हर शख्स बेचारा नहीं होता!

मिट्टी का कर्ज- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 मिट्टी का कर्ज खूबसूरत है नजारालग रहा है प्यारा इस मिट्टी का कर्ज हैचुकाना हमारा फर्ज  है प्यारे गगन हमें

साहिल- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

 साहिल ओ मेरे मन के मीत दिल लिया क्यों जीत निश्छल है मेरी प्रीत रेजीवन की है ये रीत सदा

आह्वान- डॉ.इन्दु कुमारी

December 3, 2021

आह्वान मद्यपान निषेध मेरे देश के नौजवानोंतू है मौजों की रवानीहै भारत माँ के लाल वेशकीमती तेरी जवानीमद्यपान नहीं जिन्दगानीबीड़ी

Leave a Comment