Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

पैगाम – डॉ. इन्दु कुमारी

पैगाम ह्रदय को न बंजर होने देनालगाओ प्रेम के पौधे भी स्नेह से सींच -सींच करकेउगाओ प्रेम वाटिका भी मिली …


पैगाम

पैगाम - डॉ. इन्दु कुमारी
ह्रदय को न बंजर होने देना
लगाओ प्रेम के पौधे भी

स्नेह से सींच -सींच करके
उगाओ प्रेम वाटिका भी

मिली सौगात में हमको
इश्क की कश्तियाँ भी

ये रब की ईबादत है
पराकाष्ठा शहादत भी

जीना हमें सिखाती है
सहिष्णुता भी लाती है

ये ज़िन्दगी भी बड़ी
मुश्किल से मिलती है

वक्त की बेड़ियां है तो
खुशबू है प्रेम का भी

संवेदना को न मरने दे
समरस सुगंध फैलाओ भी।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

Sochte bahut ho kavita by Sudhir Srivastava

July 31, 2021

 सोचते बहुत हो शायद तुम्हें अहसास नहीं है कि तुम सोचते बहुत हो, इसीलिए तुम्हें पता ही नहीं है कि

Pyar ke rang by Indu kumari

July 31, 2021

 शीर्षक- प्यार के रंग सावन की पहली फुहार प्रकृति में  फैले    हैं हौले- हौले मंद बयार प्यार के रंग

Mansik shanti ke upay by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 मानसिक शांति के उपाय मानसिक शांति के लिए करके देखें यह कुछ एक उपाय, समय दें उस शख्स को जो

misail man kalam by Sudhir Srivastava

July 31, 2021

मिसाइल मैन कलाम 15 अक्टूबर 1931को जन्में   रामेश्वरम, तमिलनाडु के गरीब मुस्लिम परिवार में कलाम धरा पर आये। गरीबी की

Bhukhe ke hisse ki roti by Jitendra Kabir

July 31, 2021

 भूखे के हिस्से की रोटी मैं देखता हूं बहुत बार अपनी छोटी सी बिटिया को खाना खाते हुए, साथ में

Maa kavita by poonam udaychandra

July 31, 2021

 “माँ” आज देखा है चेहरा अपनी  माँ का मैंने।  उभरती लकीरों और आंखों का गहना।।  मुश्किल बड़ी रास्ते छोटे, उसका

Leave a Comment