Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr_Madhvi_Borse, poem

पीछे छूटा! -कविता

पीछे छूटा! -कविता मुड़ कर ना देखो, जो पीछे छूट गया,आगे बढ़कर लिखो,अपना भविष्य नया! कुछ छुटने का क्या पछतावा,सब …


पीछे छूटा! -कविता

पीछे छूटा! -कविता
मुड़ कर ना देखो,

जो पीछे छूट गया,
आगे बढ़कर लिखो,
अपना भविष्य नया!

कुछ छुटने का क्या पछतावा,
सब यहां हे अस्थाई,
किस बात का करे दावा,
जीवन में हर चीज पराई!

वर्तमान में जीना बेहतर,
जो चला गया वह चला गया,
क्यों पछताए भूत में रहकर,
स्वयं पर करें थोड़ी दया!

तनाव, परेशानी, दुख, दर्द,
जिंदगी के कुछ किस्से है,
वर्षा, बसंत, ग्रीष्म, सर्द,
ऋतु और मौसम के हिस्से हैं!

जब जीना हर हाल में है,
क्यों ना मुस्कुराते हुए जिए,
जब बदलाव हर साल में है,
क्यों ना रोशनी के जलाए दिए!

मजबूती से कदम बढ़ाए,
पीछे छूटा उसे भूलकर,
अपने साहस को हर दिन आजमाएं,
इस जिंदगी के झूले में झूल कर!

बीते हुए को बदल नहीं सकते,
वर्तमान के पलों में जीते जाए,
क्यों दर्द को ध्यान में रखते,
आने वाले भविष्य को उज्जवल बनाएं!

बीता हुआ कल रात का सपना,
रात के सपने को कौन याद रखें,
आज और अभी का पल है अपना,
क्यों ना इस अमूल्य पल को परखे!

कुछ छूटने से क्यों टूटे,
जो है उसका मूल्य पहचाने,
क्यों हम जिंदगी से रूठे,
जब जिंदगी का सत्य हम बेहतरीन जाने!

कोई जा रहा है उसे जाने दो,
कुछ छूट रहा है छुटने दो,
जो आपका है उसे आने दो,
स्वयं और सब के जीवन को सुलझने दो!!

डॉ. माध्वी बोरसे!
( स्वरचित व मौलिक रचना)
राजस्थान (रावतभाटा)


Related Posts

क्यों एक ही दिन मां के लिए

May 8, 2022

क्यों एक ही दिन मां के लिए मोहताज नहीं मां तुम एक खास दिन कीतुम इतनी खास हो कि शायद

सशक्त मां, सशक्त विश्व!

May 8, 2022

सशक्त मां, सशक्त विश्व! अत्यंत बुरे अनुभवों में से एक जो एक बच्चा देख सकता है, वह परिवार या समाज

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास

May 8, 2022

सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो पास  मां शब्द का विश्लेषण शायद कोई कभी नहीं कर पाऐगा, यह दो

मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं

May 7, 2022

“मातृ दिवस पर कहो कैसे कह दूँ की मैं कुछ भी नहीं” जिस कोख में नौ महीने रेंगते मैं शून्य

माँ तेरे इस प्यार को

May 7, 2022

माँ तेरे इस प्यार को तेरे आँचल में छुपा, कैसा ये अहसास ।सोता हूँ माँ चैन से, जब होती हो

बीते किस्से

May 7, 2022

बीते किस्से अपनी जिंदगी के कुछ नायाब किस्से मैं सुनाती हूंलोग कहते मुझे पागल , मैं तो कलम कि दीवानी

PreviousNext

Leave a Comment