Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष …


पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष
पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष

बच्चों के लिए उनके पिता ही सुपर हीरो होते हैं


धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः। पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवता।।

पिता आकाश से ऊंचा है जिसमें सभी लोकों के सभी देवता निवास करते हैं – एडवोकेट किशन भावनानी गोंदिया

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर सभी देशों में जून के तीसरे सप्ताह के प्रथम रविवार को पिताजी दिवस मनाया जाता है जो इस वर्ष 18 जून 2023 को आया और हम बड़े चाव, लगन श्रद्धा, भाव से मना भी रहे हैं। इस दिवस को हर देश से लेकर हर व्यक्ति तक मनाने का अलग अलग तरीका है। यह दिन पूरी तरह से दुनिया भर के सभी पिताओं को समर्पित है। एक बच्चे के जीवन में, पिता की भूमिका अपूरणीय होती है। जो व्यक्ति हमारे जीवन में सदैव स्थिर रहेगा, हमारे अच्छे और बुरे समय में हमारा साथ देगा और हमें सही रास्ते पर ले जाएगा, वही हमारे पिता हैं।
साथियों बात अगर हम पिताजी के अतुलनीय स्थान और गाथा की करें तो हजारों वर्षों से भारतीय संस्कृति में पिता का स्थान आकाश से ऊंचा है जिसमें सभी लोकों के देवता निवास करते हैं जिसे हमारे ग्रंथों महापुराणों में श्लोकों के द्वारा बताया गया है। पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः।पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवता।।पिता ही धर्म है, पिता ही स्वर्ग है और पिता ही सबसे श्रेष्ठ तपस्या है। पिता के प्रसन्न हो जाने पर सारे देवता प्रसन्न हो जाते हैं।पिता के महत्व को प्रदर्शित करता हुआ यह बहुत महत्वपूर्ण व सूंदर मंत्र है इसलिए अनेक पुराणों व् ग्रंथों में इसका उल्लेख किया गया है।
पितृभिः ताड़ितः पुत्रः शिष्यस्तु गुरुशिक्षितःधनाहतं स्वर्ण च जायते जनमण्डनम।
श्लोक-पिता द्वारा डांटा गया पुत्र, गुरु के द्वारा शिक्षित किया गया शिष्य, सुनार के द्वारा हथौड़े से पीटा गया सोना, ये सब आभूषण ही बनते हैं।
पितृन्नमस्येदिवि ये च मूर्त्ताः स्वधाभुजः काम्यफलाभिसन्धौ ॥प्रदानशक्ताः सकलेप्सितानां विमुक्तिदा येऽनभिसंहितेषु ॥
मैं अपने पिता को नमन करता हूँ जो सभी देवताओं का प्रत्यक्ष रूप हैं, जो मेरी सभी आकांक्षाओं को पूर्ण करते हैं। मेरे पिता मेरे हर संकल्प को सिद्ध करने में मेरे आदर्श हैं, जो मेरी कठिनाइयों एवं चिंताओं से मुझे मुक्त करते हैं ऐसे प्रभु के रूप में विघ्नहर्ता को प्रणाम करता हूँ। ऐसे हमारे श्लोक सदियों पूर्व लिखें हुए हैं जिनसे यह विदित होता है कि भारत में पिता का स्थान देवता तुल्य है।
साथियों बात अगर हम बच्चों के लिए पिता ही सुपर हीरो होने की करें तो पिता और बच्चों का रिश्ता स्नेह के साथ ही जिम्मेदारी, सुरक्षा और फ्रिक का रिश्ता है। मां शिशु को 9 महीने कोख में रहती है और पिता बच्चे के आत्मनिर्भर होने तक उसकी जिम्मेदारी लेते हैं। हर पिता अपने बच्चे से प्यार करता है लेकिन उसके भविष्य को संवारने और आदर्श जीवन देने के लिए सख्ती दिखाने से भी पीछे नहीं हटता है। पिता को त्याग और समर्पण का उदाहरण कह सकते हैं। कई बच्चों के लिए उनके पिता ही सुपरहीरो होते हैं। हालांकि अक्सर बच्चे पिता के सामने अपनी इस भावना को व्यक्त करने में पिछड़ जाते हैं। पिता के प्रेम और त्याग को सम्मान देने के लिए दुनियाभर में हर साल फादर्स डे मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत एक बेटी ने की, जो अपने पिता से बेहद प्यार करती थी। आज हर बेटा और बेटी अपने पिता को खास महसूस कराने के लिए फादर्स डे मनाते हैं।
साथियों बात अगर हम वर्तमान परिपेक्ष के आधुनिक डिजिटल युग में पिताजी दिवस मनाने की करें तो हमें इस दिन को हर साल अपनी भारतीय संस्कृति, ग्रंथों महापुराणों में लिखे वचनों के अनुसार मनाने का संकल्प लेना होगा न कि पाश्चात्य शैली से मनाने की बात होनी चाहिए!! क्योंकि हम अपने पिताजी, अब्बा जान, को सिर्फ बधाई, गुलदस्ता , कोई गिफ्ट बुके या उन्हें घुमाने फिराने ले जाने भर से और केवल एक दिवस के लिए ही नहीं होगा बल्कि हमें इस दिन संकल्प लेना है कि हमारे पिताजी अब्बा जान हमारी धरोहर हैं हमारे देवता ईश्वर अल्लाह हैं उनका सम्मान ध्यान पूजा हम उसी तरह करेंगे जैसा हमारी आस्था अपने अपने धर्म और मज़हब में है ऐसा संकल्प हमें हर साल 18 जून को दोहराना होगा।
साथियों मेरा मानना है कि देवी देवता ईश्वर अल्लाह हमारी आस्था के प्रतीक हैं। हमारी आध्यात्मिकता की धरोहर हैं उनका सम्मान पूजा-पाठ भी जीवन में जरूर है, परंतु उससे पहले हमें अपने माता-पिता का ध्यान रखना होगा उनका मान सम्मान पूजा करनी होगी बाकी सब बाद में!क्योंकि हमने हमारे ही श्लोकों में पाए हैं कि इनमें ही हमारे सभी लोकों के देवता निवास करते हैं तो फिर हम कहीं और क्यों अपना ध्यान बांटे? साथियों बात अगर हम हमारे पिताजी की दैनिक जीवन में भूमिका की करें तो, कहते है कि दुनिया में मां और बच्चे का रिश्ता सबसे बड़ा होता है। मां बच्चे को जन्म देती है, उसे बड़ा करती है। लेकिन एक पिता बच्चे को सभ्य बनाने के साथ ही उसके भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाता है। बच्चे के जीवन में पिता का रोल मां जितना ही है। पिता त्याग और समर्पण का उदाहरण है। एक पिता ही बच्चे को समाज की हर बुराई से बचाता है। पिता बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद संघर्ष करते हैं। उनके भविष्य को संवारने के लिए दिशा निर्देशन करते हैं। मां तो मातृत्व न्योछावर कर देती है लेकिन बच्चे को सही मार्ग दिखाने के लिए पिता को कठोर बनना पड़ता है। पिता अक्सर बच्चे के प्रति उस तरह का प्यार जता नहीं पाते, जैसे मां जताती हैं लेकिन बिना दिखाए या जताए जीवन भर की खुशियां बच्चे को देने का काम एक पिता ही कर सकता है। पिता के इसी प्रेम, त्याग को सम्मान देने के लिए दुनिया के तमाम देशों में फादर्स डे मनाया जाता है।
साथियों जीवन में पिता का होना बहुत जरूरी होता है, पिता से ही बच्चों की पहचान है। उनका प्रेम अनमोल होता है, माता पिता के आशीर्वाद से दुनिया की बड़ी से बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है। कोई भी समस्या हो उसका समाधान पिता के पास होता है, बच्चों को पिता की महत्ता का पता जब वे खुद माता पिता बनते हैं, तो और अधिक होता है।
साथियों बात अगर हम पिताजी दिवसको मनाने के इतिहास की करें तो इस दिन की शुरुआत संभवत अमेरिका से हुई थी इसकी कई कहानियों में से एक सोनेरा लुईस स्मार्ट नामक महिला नें छोटी सी उम्र में अपनी मां को खोया था और उनके पिताजी ने परिवार का पालन पोषण कर मां पिता का फर्ज अदा किया।
साथियों वर्ष 1909 में, सोनोरा ने किसी सभा में मातृ दिवस के बारे में सुना। तब उन्हें यह विचार आया कि अगर मां की ममता के लिए एक दिन समर्पित किया जा सकता है, तो पिता के योगदान के लिए क्यों नहीं? उन्हें इसे आधिकारिक दिन बनाने के लिए संघर्ष किया। लोगों से बात की, जब जाकर कई स्थानीय पादरियों ने इस विचार को स्वीकार किया। ऐसा माना जाता है कि 19 जून 1910 को पहला अनौपचारिक फादर्स डे मनाया गया था।सन् 1966 में अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने पिताजी दिवस मनाने की आधिकारिक घोषणा की थी।इसके बाद 1972 से अमेरिका में जून के तीसरे रविवार को पिताजी दिवस यानी पितृ दिवस मनाया जाने लगा।
अतः अगर हम उपरोक्त प्रकरण का अध्ययन कर उसकाविश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि पितृ देवो भव: पिताजी दिवस 18 जून 2023 पर विशेष धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः।पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवता।। पिता आकाश से ऊंचा है जिसमें सभी लोकों के सभी देवता निवास करते हैं,ग्रंथों महापुराणों में श्लोकों से ऐसा बखान हमारी संस्कृति का हिस्सा है।

About author

कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुख़दास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट 
किशन सनमुख़दास भावनानी 
गोंदिया महाराष्ट्र

Related Posts

Lekh man ki hariyali by sudhir Srivastava

July 31, 2021

 लेखमन की हरियाली, लाए खुशहाली     बहुत खूबसूरत विचार है ।हमारे का मन की हरियाली अर्थात प्रसन्नता, संतोष और

Lekh by kishan sanmukh das bhavnani

July 31, 2021

 सत्य वह दौलत है जिसे पहले खर्च करो, जिंदगी भर आनंद पाओ- झूठ वह कर्ज़ है, क्षणिक सुख पाओ जिंदगी

janmdin jeevanyatra by Maynuddin Kohri

July 25, 2021

जन्मदिन —- जीवनयात्रा  आजादी के बाद के काले बादल छट जाने के बाद देश मे अमन चैन,गणतन्त्र भारत की सुखद

Guru govind dono khade kako lagu paye by jayshri birmi

July 23, 2021

गुरु गोविंद दोनो खड़े काको लागू पाए अपने देश में गुरु का स्थान भगवान से भी ऊंचा कहा गया है।

Naari gulami ka ek prateek ghunghat pratha by arvind kalma

July 23, 2021

नारी गुलामी का एक प्रतीक घूंघट प्रथा भारत में मुगलों के जमाने से घूँघट प्रथा का प्रदर्शन ज्यादा बढ़ा क्योंकि

OTT OVER THE TOP Entertainment ka naya platform

July 23, 2021

 ओटीटी (ओवर-द-टॉप):- एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मीडिया सेवा ऑनलाइन सामग्री प्रदाता है जो स्ट्रीमिंग मीडिया को एक स्टैंडअलोन

Leave a Comment