Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

kishan bhavnani, lekh

पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच खाई

 पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच खाई?!! भारतीय प्राचीन विरासत अद्भुत कृतियों से भरी हुई है जिसे संरक्षित प्रिलेखित …


 पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच खाई?!!

पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच खाई
भारतीय प्राचीन विरासत अद्भुत कृतियों से भरी हुई है जिसे संरक्षित प्रिलेखित और प्रचार-प्रसार की नितांत आवश्यकता को रेखांकित करना ज़रूरी 

भारतीय ज्ञान, संस्कृति, सभ्यता, दर्शन और आध्यात्मिकता का वैश्विक स्तरपर व्यापक प्रभाव से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी- एड किशन भावनानी 

गोंदिया – भारतीय प्राचीन विरासत हजारों वर्ष पुरानी है जिसकी गाथाओं से इतिहास भरे पड़े हैं जिसे हमने पढ़ें वह सुने भी हैं, जिसे अब संरक्षित प्रिलेखित और प्रचार-प्रसार की नितांत आवश्यकता को रेखांकित करना ज़रूरी है क्योंकि वर्तमान में बदलते परिपेक्ष में,बढ़ते डिजिटल युग में हर क्षेत्र में हर कार्यक्रम डिजिटलाईड हो रहा है हस्त लिखित का युग अब समाप्ति की ओर याने विलुप्तता की ओर बढ़ते चला है!! ऐसी स्थिति में अब शिक्षा प्रणालियों में भी आधुनिकता पर जोर देना स्वभाविक ही है!! क्योंकि अगर हमें विश्व के साथ कंधा मिलाकर चलना है, वैश्विक प्रतियोगिता को टक्कर देना है, तो हमें आधारभूत शिक्षण ढांचा वैश्विक स्तर का रखना होगा जिसकी परिणीति है डिजिटल इंडिया का उदय है!! 

अब सवाल है फिर हमारी अद्भुत प्राचीन विरासत कृतियों लिपियों को कैसे संरक्षित रख पाएंगे ? युवाओं को, अगली पीढ़ियों को, हमारी प्राचीन विरासत का आभास कैसे होगा ? इसलिए हमें इसका प्रचार-प्रसार और वर्तमान शैक्षणिक नीतियों, प्रणालियों में सामंजस्य स्थापित करने को रेखांकित करने की नितांत आवश्यकता है!! इसलिए ही पीआईबी के अनुसार केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास मंत्री ने एक कार्यक्रम में संबोधन में कहा, कि पीएम के नेतृत्व में भारतीय शिक्षा प्रणाली में वैकल्पिक ज्ञान प्रणालियों, दर्शन और परिप्रेक्ष्य को प्रतिबिंबित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैसे तो हम अपने प्राचीन अतीत की अच्छी चीजों को अपनाते हैं, लेकिन इसके साथ ही हमें अपने समाज में निहित समस्याओं के प्रति भी सचेत रहना चाहिए और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करना चाहिए जो प्राचीन अतीत के विशिष्‍ट ज्ञान व समकालीन मुद्दों के बीच उचित सामंजस्‍य सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि समस्‍त दुनिया की अनगिनत समस्याओं का समाधान भारतीय ज्ञान प्रणाली में निहित है।

साथियों बात अगर हम विद्यार्थियों में पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच की खाई को पाटने की करें तो नई शिक्षा नीति 2020 में भी एक स्पष्ट दिशा बताई गई है और हाल ही में दिनांक 16 मई 2022 को भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर परिचर्चा-अवधारणाएं और अमल पर एक पाठ्य पुस्तक का विमोचन हुआ। यह पुस्तक हाल ही में एआईसीटीई द्वारा अनिवार्य किए गए ‘आईकेएस (भारतीय ज्ञान प्रणालियों)’ पर एक आवश्यक पाठ्यक्रम की पेशकश करने की आवश्‍यकता को पूरा करती है। इसके अलावा, नई शिक्षा नीति में भी उच्च शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम में आईकेएस के बारे में विस्‍तृत जानकारियां प्रदान करने के लिए एक स्पष्ट दिशा बताई गई है जिससे आने वाले दिनों में देश के कई उच्च शिक्षण संस्थानों में इस तरह की पुस्तक अत्‍यंत आवश्यक हो गई है। वैसे तो यह पुस्तक मुख्य रूप से इंजीनियरिंग संस्थानों द्वारा उपयोग के लिए लिखी गई है, लेकिन इसमें निहित संरचना और सामग्री स्‍वयं ही इस तरह की पुस्तक के लिए अन्य विश्वविद्यालय प्रणालियों (लिबरल आर्ट्स, चिकित्सा, विज्ञान और प्रबंधन) की आवश्यकता को आसानी से पूरा करने में मदद करती है। आईकेएस पर हाल ही में जारी पाठ्यपुस्तक विद्यार्थियों को अतीत के साथ फिर से जुड़ने, समग्र वैज्ञानिक समझ विकसित करने और बहु-विषयक अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए इसका उपयोग करने का अवसर प्रदान करके विद्यार्थियों को पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच की खाई को पाटने में सक्षम बनाएगी। 

साथियों बात अगर हम भारतीय ज्ञान प्रणाली पर लिखी पुस्तक और उसके महत्व की करें तो पीआईबी के अनुसार केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने भी उस कार्यक्रम में अपने संबोधन में, पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों के बारे में सीखने की नितांत आवश्यकता का उल्लेख किया। उन्होंने आयुर्वेद, प्राचीन काल में जहाजों के निर्माण, विमान संबंधी ज्ञान, सिंधु घाटी शहरों के वास्तुकार, और प्राचीन भारत में मौजूद राजनीति विज्ञान के उदाहरणों का हवाला दिया। उन्होंने ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली का परिचय’ पर लिखी गई पुस्तक की सराहना की जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणालियों की ज्ञानमीमांसा एवं सत्व शास्त्र को जीवन के सभी क्षेत्रों में लागू करना, और इंजीनियरिंग एवं विज्ञान के छात्रों को इनसे कुछ इस तरह से परिचय कराना है जिससे कि वे इससे जुड़ाव महसूस कर सकें, इसके महत्व को गंभीरता से समझ सकें और इस दिशा में आगे खोज कर सकें। श्री सरकार ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के उत्थान के लिए उसकी जड़ें अवश्‍य ही मजबूत होनी चाहिए और इन जड़ों को संरक्षित करने के लिए पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणाली के बारे में जानकारियां जरूर होनी चाहिए।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच खाई को पाटना जरूरी है! भारतीय प्राचीन विरासत अद्भुत कृतियों से भरी हुई है जिसे संरक्षित प्रिलेखित और प्रचारप्रसार की नितांत आवश्यकता को रेखांकित करना जरूरी है। भारतीय ज्ञान संस्कृति, सभ्यता,दर्शन औरआध्यात्मिकता का वैश्विक स्तरपर व्यापक प्रभाव से भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है।

संकलनकर्ता लेखक – कर विशेषज्ञ स्तंभकार एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र


Related Posts

भारत अमेरिका की घनिष्ट साझेदारी की मज़बूत प्रतिबद्धता

May 11, 2023

भारत अमेरिका की घनिष्ट साझेदारी की मज़बूत प्रतिबद्धता भारत अमेरिका शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष आदि क्षेत्रों में सामरिक

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक

May 11, 2023

हे मेरे ईश्वर अल्लाह, परवरदिगार मेरे मालिक मैंने कहा गुनहगार हूं मैं उसने कहा बक्ष दूंगा मैंने कहा परेशान हूं

दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें

May 10, 2023

दुःख में कारण नहीं समाधान तलाशें आज के समय में अगर किसी भी व्यक्ति से पूछा जाय कि वह जीवन

कश्मीर घाटी की वादियों में दाखिल होंगे दुनियां के दिग्गज

May 10, 2023

कश्मीर घाटी की वादियों में दाखिल होंगे दुनियां के दिग्गज ! जी-20 पर्यटन कार्यसमूह सम्मिट कश्मीर श्रीनगर- 23-24 मई 2023

वैश्विक चिंतनीय अर्थव्यवस्था बनाम भारतीय सुदृढ़ अर्थव्यवस्था

May 10, 2023

वैश्विक चिंतनीय अर्थव्यवस्था बनाम भारतीय सुदृढ़ अर्थव्यवस्था वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफ़एसडीसी) की 27 वीं बैठक में वित्तीय प्रणाली

The kerala story movie|द केरल स्टोरी – टैक्स फ़्री बनाम बैन

May 10, 2023

द केरल स्टोरी – टैक्स फ़्री बनाम बैन फिल्म में डिस्क्लेमर जोड़ा है कि फिल्म घटनाओं का काल्पनिक संस्करण है,

PreviousNext

Leave a Comment