Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr. Alpa. H. Amin, poem

पापा हमारे लिए हैं भगवान

 पापा हमारे लिए हैं भगवान |papa hamare liye bhagwan hai हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान उनकी पनाह में रहना …


 पापा हमारे लिए हैं भगवान |papa hamare liye bhagwan hai

पापा हमारे लिए हैं भगवान"/papa hamare liye bhagwan hai

हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान

उनकी पनाह में रहना जैसे हैं वरदान..!! 

कैसे लिखें हम कविता नहीं कोई कलम 

जो अलंकृत करे अल्फ़ाज़ उनके समान..! 

हैं ऐसा फ़रिश्ता,जिसका व्यक्तित्व ही

हैं उनकी पहचान जो बढाएं उनका सम्मान 

हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान….!!

उनके आशीर्वाद से ही तो 

चमके हैं तकदीर रहे औलाद आयुष्यमान…!  

पालन पोषण कर परिवार को,

दे त्यौहारों की खुशियाँ अति मूल्यवान….! 

हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान…!!

खुद हार हमें विजेता बनाता

संकटो के ज़हरीले वार से हमें बचाता 

हमारी हर खामोशी को समझकर 

बिना मांगे हर चाहत का भरता दामन 

वो हैं हरा-भरा महकता आकर्षित उपवन…! 

हमारे पापा हमारे लिए है भगवान…!!

 

है हभारा सखा जो देता प्रेरणा रुपी मार्गदर्शन

सिंचे संस्कार ऐसे, हम बने नेक इन्सान 

हमारे जीवन के वो हैं भूत भविष्य वर्तमान….! 

हमारे पापा हमारे लिए हैं भगवान… 

उनकी पनाह में रहना जैसे हैं वरदान..!! 

 Dr.Alpa H Amin

Ahmedabad


Related Posts

व्यंग्य कविता-मेरी ऊपर तक पहुंच है| meri upar tak pahunch hai

November 19, 2022

व्यंग्य कविता-मेरी ऊपर तक पहुंच है अच्छों अच्छों को अपने झांसे में लाता हूं जो सियानें बनते हैं उनको ठगियाता

कब बदलेंगे| kab badlenge

November 16, 2022

लिखते बहुत है,पढ़ते भी बहुत हैसोचते भी है,लेकिन कुछ बदला नहीं।। वो जज़्बाती होकर जज्बातों को लिखते हैं बीती बाते

मुझे भी जीने दो| mujhe bhi jeene do

November 16, 2022

अपने गुनाह को कूड़ेदान के नाम कियादुनिया ने पाल मुझे लावारिस नाम दिया।। खता तो तुमने की थी नवयुवाओं लेकिनसजा

भेद सारे चूर कर दो|

November 16, 2022

माँ वीणा वादिनी मधुर स्वर दो,हर जिह्वा वैभवयुक्त कर दो ।मन सारे स्नेहमय हो जाए,ऐसे गुणों का अमृत भर दो

नव साहित्यकारों एसे लिखो/nav sahityakaron aise likho

November 13, 2022

नव साहित्यकारों एसे लिखो बहुत से युवा साहित्यकार बनना चाहतेक्या लिखें ? यही सोच ये उलझ ही जाते।।आओ बैठो खुद

कविता–ठसन छोड़ना पड़ेगा| Thasan chhodna padega

November 13, 2022

कविता–ठसन छोड़ना पड़ेगा अपना जीवन सुखी बनाना है तो अटके काम बनाना है तो सुकून से जीवन व्यतीत करना है

PreviousNext

Leave a Comment