Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

lekh, sneha Singh

पसंद-नापसंद लोगों की लिस्ट हमें बनाती है पक्षपाती

पसंद-नापसंद लोगों की लिस्ट हमें बनाती है पक्षपाती कहा जाता है कि ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन‘। पर शायद …


पसंद-नापसंद लोगों की लिस्ट हमें बनाती है पक्षपाती

पसंद-नापसंद लोगों की लिस्ट हमें बनाती है पक्षपाती

कहा जाता है कि ‘फर्स्ट इम्प्रेशन इज द लास्ट इम्प्रेशन‘। पर शायद यह भी हो सकता है कि आप जिससे पहली बार मिल रही हैं, वह आप से मिलते समय किसी चिंता या फिक्र में हो, किसी वजह से नर्वस हो या किसी मुश्किल में हो और उस समय शायद आप से अच्छी तरह बात नहीं कर सका तब अधिकतर लोग ऐसे व्यक्ति के बारे में पहली बार में थोड़ा निगेटिव सोच लेते हैं, उस व्यक्ति को एरोगंट या डम्ब मान बैठते हैं। अलबत्त, हर मामले में ऐसा नहीं होता। कभी आप जिस व्यक्ति के बारे में गलत धारणा बनाए बैठी हैं, उससे जैसे-जैसे परिचय होता जाता है, वैसे-वैसे अनुभव होता है कि आप उसे जितना घमंडी या डम्ब समझ रही थीं, वह उतना घमंडी या डम्ब नहीं है। यह तो मात्र उदाहरण है। यह तो मात्र पहली मीटिंग यानी फर्स्ट इम्प्रेशन की बात है। बाकी इस तरह देखा जाए तो हम सभी के पास पसंद और नापसंद लोगों की पूरी लिस्ट होती है। ज्यादातर यह लिस्ट में स्त्रियों की अधिक लंबी होती है। इसलिए होता यह है कि पसंद लोगों की हर बात हम खुशी-खुशी पचा लेते हैं और नापसंद लोगों की अच्छी बात में भी अनेक कमियां निकालते हैं। पसंद लोगों की खराब बात के लिए भी आंख-कान बंद करने में हिचकिचाहट नहीं होती, जबकि नापसंद लोगों की अच्छी बात को भी चिल्ला-चिल्लाकर सब से कहती फिरती हैं।

 किसी भी व्यक्ति के लिए किसी भी तरह की ग्रंथि न पालें

हम कभी यह नहीं सोचतीं कि पसंद-नापसंद व्यक्ति की लिस्ट हमें पक्षपाती बना देती है। हम हर व्यक्ति के साथ मन में रहने वाली मान्यता के अनुसार ही व्यवहार करती हैं। मनुष्य बहुत स्वार्थी होता है। वह अपनी जरूरत के अनुसार अपनी पसंद और नापसंद व्यक्ति की लिस्ट क्रिएट करता है। यह बात कड़वी, पर उतनी ही सत्य है। खास कर महिलाओं में यह अधिक देखने को मिलता है। यहां किसी तरह की टीका की बात नहीं है, पर महिलाएं खुद को टटोल कर तटस्थतापूर्वक देखेगी तो उन्हें ख्याल आएगा कि ससुराल के लोगों के लिए उनके मन में खराब विचार मायके के लोगों की अपेक्षा अधिक है। अपनी बहन के प्रति अलग लगाव और पति की बहन के लिए अलग विचार। अपनी मां के लिए अलग सोच और पति की मां के लिए अलग सोच। नो डाऊट, सभी मामलों में ऐसा नहीं हो सकता। अमुक मामलों में खराब अनुभवों के आधार पर भी सोच और व्यवहार बदल जाता है। पर ज्यादातर पसंद और नापसंद लोगों की लिस्ट ऐसे ही बनती है। आप खुद ही सोचिए कि आप को एक भी कड़वी बात अप की सास या ननद ने कही हो तो इसके लिए आप का रिएक्शन कैसा होगा और आप की बहन या मां ने वही बात कही हो तो इसके लिए आप का रिएक्शन कैसा होगा। सीधी बात है, फेर पड़ेगा ही। सगी मां और बहन की कही बातों में लगाव है, यह सोच कर आप ग्रहण कर लेगीं अथवा भूल जाएंगी। जबकि सास या ननद ने वही बात कही हो तो वह बात जल्दी नहीं भूलेंगी। उस बात को मन के किसी कोने में इतनी कड़वाहट के साथ संभाल कर रखेंगी कि आप को हमेशा ऐसा लगता रहेगा कि मौका मिलते ही उस बात को ब्याज के साथ सामने वाले के समक्ष रख दूं।

ज्यादातर समस्याएं इसी वजह से होती हैं

ज्यादातर पारिवारिक समस्याएं इसी पसंद-नापसंद की लिस्ट की वजह से होती हैं। यहां पढ़ा-लिखा, कम पढ़ा-लिखा या मार्डन कोई भी हो सकता है, इस मामले में हर एक की मानसिकता एक जैसी ही होती है। इसी वजह से घरों में किचकिच होती है। क्योंकि अपनी पसंद के लोगों की अच्छी-खराब बातों को हम नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि नापसंद या कम नापसंद लोगों की छोटी सी गलत बात को हम सहन नहीं कर पातीं। अधिकांश मामलों में तो यह होता है कि नौकरी करने वाली महिला अपना बच्चा संभालने के लिए अपनी सास की अपेक्षा अपनी मां या मायके वालों पर अधिक भरोसा करती है। बच्चे को रखने की हर एक की अपनी अलग रीति होती है। पर तमाम महिलाओं को मायके वाले उसके बच्चे को किसी भी तरह रखें, उसे अच्छा लगता है। जबकि ससुराल वाले उसी तरह रखते हैं तो इस मामले में सत्तर शिकायतें होती हैं। यह तो मात्र बच्चे का उदाहरण था, संबंधों में इस तरह न जाने कितना होता रहता है। यहां समझने वाली बात यह है कि आप का यही पक्षपातीपन घर में अधिकांशत: किचकिच का कारण बनता है। यहां रोजरोज के जीवन के कितने ही उदाहरण दिए जा सकते हैं।आप खुद ही निस्पक्षता से एक बार सोच कर देखेंगी तो आप को अंदाज लग जाएगा कि आप कितने लोगों के प्रति पक्षपाती हैं और कितने लोगों की छोटी छोटी बातें भी खटकती हैं। हम हर किसी के लिए क्यों समभाव नहीं रख सकतीं यह सवाल खुद से जरूर करना चाहिए। नो डाऊट, कभी-कभी अनेक लोगों की ओर से हमें कड़वे अनुभव होते हैं, पर कहीं न कहीं ये कड़वे अनुभव भी उनकी नापसंद लोगों की लिस्ट में हमारे होने के कारण ही होते हैं। आप को जिस व्यक्ति की ओर से कड़वा अनुभव हुआ हो, उस व्यक्ति से दूर रहना सीखें, पर मेरातेरा कर के पसंद लोगों की और नापसंद लोगों की लिस्ट न बनाएं। इस लिस्ट के कारण कभी-कभी हम इस हद तक चली जाती हैं कि नापसंद लोगों के बारे में कुछ भी कहने से नहीं हिचकतीं। ऐसे तमाम मामलों में यह भी होता है कि महिला के मायके में उसके माता-पिता एकदम साधारण स्थिति में होते हैं तो उनके प्रति भारी करुणा होती है। वह कुछ भी कर के अपने माता-पिता की मदद के लिए तत्पर रहती है। इसमें कुछ गलत भी नहीं है, मदद करनी भी चाहिए। पर दूसरी ओर कुछ मामलों में ऐसा होता है कि पति के माता-पिता साधारण परस्थिति में होते हैं और उनका गुजारा बेटे के वेतन पर होता है, तब महिलाओं का व्यवहार एकदम अलग हो जाता है। अपना पति माता-पिता की मदद कर के कितना बड़ा उपकार कर रहा है, यह सोचने वाली भी महिलाएं हैं। पर यहां केवल महिलाओं की ही बात नहीं हो रही है, कुछ हद तक पुरुषों में भी ऐसा होता है। पर पुरुषों में महिलाओं की अपेक्षा पसंद-नापसंद लोगों की लिस्ट की भावना बहुत कम होती है। यह कड़वी वास्तविकता है। कभी-कभार हर व्यक्ति से खुद से यह सवाल कर के जितना हो सके उतना तटस्थ रहने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने पर अनेक सवाल अपने आप दूर हो जाएंगे।

About author

Sneha Singh
स्नेहा सिंह

जेड-436ए, सेक्टर-12
नोएडा-201301 (उ.प्र.)


Related Posts

झाड़ू गुजरात में कितना कामयाब

April 25, 2022

झाड़ू गुजरात में कितना कामयाब दिल्ली में दो टर्म्स जितने वाले अरविंद केजरीवाल मुफ्त मुफ्त की राजनीति से प्रसिद्ध हो

समाज शिक्षित होगा तभी देश विकसित होगा

April 21, 2022

“समाज शिक्षित होगा तभी देश विकसित होगा” संत कबीर जी का एक दोहा है, “पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ पंडित भया

कुछ भी, सब कुछ नहीं!

April 20, 2022

कुछ भी, सब कुछ नहीं! अक्सर हमने देखा है, कि हम सब कभी कभार यह कहते हैं, यह मेरा सब

अपनी किस्मत अपने हाथ!

April 20, 2022

अपनी किस्मत अपने हाथ! जुआरी करते हैं,किस्मत की आजमाइश,निकम्मे करते हैं,बैठे-बैठे फरमाइश,पर जीवन की हकीकत,परिश्रम करने से ही होती हैपूरी,

भारत की गाथा

April 20, 2022

भारत की गाथा प्रधानमंत्री संग्रहालय – स्वतंत्रता के बाद सभी प्रधानमंत्रियों के जीवन और योगदान पर लिखी भारत की गाथा

हमारी आस्था, संस्कृति की धारा, सद्भाव, समभाव, समावेश की है

April 20, 2022

हमारी आस्था, संस्कृति की धारा, सद्भाव, समभाव, समावेश की है देश की बुनियादी नीव अमन चैन, सौहार्दपूर्ण वातावरण, भाईचारा तात्कालिक

Leave a Comment