Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bhawna_thaker, lekh

पलटवार करना सीख जाईये

 “पलटवार करना सीख जाईये” “महज़ कहने भर को उमा, लक्ष्मी और दुर्गा का रुप समझते हो, अकेली औरत को देखते …


 “पलटवार करना सीख जाईये”

पलटवार करना सीख जाईये

“महज़ कहने भर को उमा, लक्ष्मी और दुर्गा का रुप समझते हो, अकेली औरत को देखते ही कामदेव खुद को और औरत को रति का रुप समझ लेते हो”

आजकल समाज में मानसिक रुप से विकृत कुछ लोग जो अपना घिनौना रुप दिखा रहे है, उस हिसाब से आज के ज़माने में लड़की होना गुनाह ही नहीं, लड़कियों के जीवन को एक दोज़ख भी कह सकते है, जैसे प्रताड़ित होने के लिए ही पैदा हुई हो। एक लड़की या महिला घर से लेकर बाहर कहीं भी सुरक्षित नहीं। न माँ-बाप के घर, न ससुराल में, न पास पड़ोस, न बाज़ार में। हर जगह बलात्कार होता रहता है..हर तरह से दमन होता रहता है। महज़ शारीरिक रूप से ही नहीं, कभी माँ-बहन वाली गालियों से तोली जाती है तो कभी आँखों से ही दरिंदे ऐसी गंदी नज़रों से देखते बलात्कार कर देते है, जैसे दुपट्टा चीरकर भीतर ही घूस जाएंगे। तो कभी बस ट्रेन में चढ़ते, उतरते या भीड़ का फ़ायदा उठाते गंदी छुअन से बिंध देते है। कभी छाती कभी कमर तो कभी पीछे के हिस्से को दबाने की कोशिश करते अपने वहशीपन का परिचय दे देते है। सच मानिये उस वक्त जो शर्म, गुस्सा और चीढ़ वाले असंख्य भाव जन्म लेते है तब मन करता है मार दें या मर जाएं। जैसे स्त्री तन इंसान नहीं कोई उपभोग की वस्तु हो ऐसे खेल लेते है।

ससुराल में भी कभी दहेज के लिए जलाई जाती है, कभी सास या ससुर के कर्कश और तीखे वाग्बाणों से नवाजी जाती है, तो कभी पति के सत्तात्मक स्वभाव द्वारा सताई जाती है। अरे बहू भी किसीके जिगर का टुकड़ा होती है कुछ तो रहम करो। आपके कूल की लाज और आपके वंश को आगे बढ़ाता नीड़ है। आख़िर क्यूँ बहू को बेटी सा प्यार नहीं दे सकते। दहेज में आई वस्तु ताज़िंदगी पड़ी नहीं रहेगी बहू के साथ अच्छा व्यवहार आपका बुढ़ापा सुधार देगा। क्यूँकि जो दोगे वही पाओगे।

जो कामकाजी महिलाएं होती है वह ऑफ़िस में सहकर्मी या बाॅस के दमन का शिकार होती है। कभी लिफ़्ट में तो कभी सरे राह छेड़ी जाती है। हर क्षेत्र में महिलाओं को उपभोग की वस्तु ही क्यूँ समझा जाता है। और हाँ बेशक घर में भी पशु घूमते है, नन्हीं मासूम बेटियों को पता नहीं होता और प्यार करने के बहाने प्राइवेट अंगों को दबाने से नहीं चूकते पापी। उम्र और रिश्ते का लिहाज़ तक नहीं करते, पप्पी लेने के बहाने गालों के साथ होठों को भी चूम लेते है। सगे बाप को बेटी का बलात्कार करते सुना है, पढ़ा है वहाँ ओरों से क्या उम्मीद। जीजा, चाचा, मौसा, फूफा तो समझे पर शिक्षक भी रिश्ते की गरिमा भूलकर अपनी गंदी मानसिकता का परिचय देते हवसपूर्ति कर लेते है। तो कभी पड़ोसी भी मौका मिलते ही फ़ायदा उठाने से नहीं चूकते। आज के ज़माने में बेटियों की माँओं को सजग रहने की जरूरत है किसीके भी भरोसे बेटी को अकेले छोड़ कर मत जाईये, बेटी कहीं भी सुरक्षित नहीं। जवान बेटी को प्राइवेट ट्यूशन में भेज रहे हो तो पहले शिक्षक के चरित्र की छानबीन कीजिए या हो सके तो क्लासिस में ही भेजिए। बेटियों को खिला-पीलाकर शारीरिक रूप से सक्षम बनाईये और कराटे और थोड़े कुस्ती के दाव भी सिखाईये। 

महिलाएं विद्रोही बनिए और सामने वाले के इरादों को जानकर खुद को हिम्मतवान बनाते गंदी मानसिकता का सामना करने के लिए खुद को सक्षम बनाईये। चुपचाप सहिए मत विद्रोह की लाठी उठा कर सच में काली-चंडी का रुप बन जाईये। अपने हेंड बैग में कोई नुकीली चीज़ या पेपर स्प्रे जरूर रखिए और मोबाइल में कोई एक नं इमरजेन्सी पर रखिए, या पुलिस और कानून का सहारा लेकर दरिंदों को पाठ पढ़ाईये। डर, झिझक और शर्म को त्याग कर अपनी सुरक्षा के लिए तैयार हो जाईये। छेड़ने वाले के गुप्तांग पर ज़ोर से लात मारिए पलटवार का ये रामबाण इलाज है, पलटवार करना सीख जाईये।

भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर


Related Posts

क्या आप अपने बच्चों को टॉपर बनने के लिए फोर्स करते हैं?

March 26, 2022

क्या आप अपने बच्चों को टॉपर बनने के लिए फोर्स करते हैं? जी अगर आप अपने बच्चे को, टॉपर बनने

कॉर्पोरेट में महिलाएं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

March 26, 2022

कॉर्पोरेट में महिलाएं! हमारी काल्पनिक कथाओं ने बताया कि महिला अपने दस हाथों से परिवार का नेतृत्व करती है। दो

अनुभव का खजाना…-तमन्ना मतलानी

March 26, 2022

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात अनुभव का खजाना… हम अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं। इन

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च 2022 – न्यायसंगत डिजिटल फाइनेंस

March 25, 2022

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च 2022 – न्यायसंगत डिजिटल फाइनेंस उपभोक्ताओं में जागरूकता सृजित करने 14 से 20 मार्च

शांत और परोपकारी स्वभाव सुखी जीवन का मूल मंत्र!!

March 25, 2022

शांत और परोपकारी स्वभाव सुखी जीवन का मूल मंत्र!! स्वयं को माचिस की तीली बनाने की बजाय, शांत सरोवर बनाएं

मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!!

March 25, 2022

मतदाताओं ने पारदर्शी राजनीति पर मोहर लगाई!!! उम्मीदवारों के साथ उनके नेतृत्व चेहरे की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने में

Leave a Comment