Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Bidamo Nandwal, lekh

परीक्षा बनी जंजाल’ युवाओं की ज़िंदगी ‘बदहाल’

‘परीक्षा बनी जंजाल’ युवाओं की ज़िंदगी ‘बदहाल’ युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने मे लगे हुए हैं, व्यवस्था राम भरोसे। बच्चों …


‘परीक्षा बनी जंजाल’ युवाओं की ज़िंदगी ‘बदहाल’

परीक्षा बनी जंजाल’ युवाओं की ज़िंदगी ‘बदहाल’

युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने मे लगे हुए हैं, व्यवस्था राम भरोसे। बच्चों का भविष्य, करियर खिलौना मान लिया है क्या?

हरियाणा सरकार व स्टाफ सिलेक्शन कमीशन एक बार फिर बच्चों की ज़िंदगी को अंधकार में धकेल रहे हैं। 04 साल से हरियाणा के युवा हज़ारों करोड़ रुपया खर्च के सेट के जंजाल में धक्के खा रहे हैं और खट्टर सरकार हर रोज़ मनमाने ढंग से मापदंड बदल व भयंकर ग़लतियाँ कर उनकी ज़िंदगियों को लूट रही है। सेट का रिजल्ट ठीक किए बग़ैर एक और पेपर करवाने की बेवकूफाना हड़बड़ी व जल्दबाज़ी क्यों? किस साज़िश के तहत युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है? खामियाँ, त्रुटियां दूर करके भर्ती पेपर लिया जा सकता है लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है? चार साल धक्के खाकर के सेट पास करने का क्या अर्थ रह गया है? इन्होंने जितने ब्लंडर इस भर्ती में किए हैं उनके कारण अगले 10 साल भी मामले न्यायालयों में लटके रहेंगे। जो बच्चे नौकरी लगेंगे उनको भी ये सरकार चैन से सोने नहीं देगी तथा जो नहीं लग पाएंगे उनका तो भविष्य चौपट कर ही दिया है। पेपर स्टे होने के बावजूद आनन-फानन में पेपर करवाए गए और एक पेपर के दूसरे पेपर में पचास प्रतिशत हूबहू सवाल पूछ लिए। हद हो गई है? क्या पेपर भी नहीं बनवा सकते हैं? बनवा तो सकते हैं परंतु बनवाने नहीं, क्योंकि अगर पेपर सही से बनवा दिए तो हरियाणा के बेरोजगार युवाओं को कैसे मानसिक तौर से परेशान करेंगे, पता न हरियाणा सरकार क्युं ऑंख बन्द किये बैठी है।

बिदामो सुरेश नांदवाल

हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी भर्ती के रोज़ बदलते मापदंडों व कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट की ग़लतियों ने युवाओं की ज़िंदगी बर्बाद कर दी है। आज हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के रोज़ बदलते ‘तुगलकी फ़रमान’ ने हरियाणा के नौजवानों की ज़िंदगी को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट की परीक्षा के चार साल से चल रहे खेल के “मनोहर जाल” ने हरियाणा के बच्चों की ज़िंदगी को बदहाल बना दिया है। हरियाणा के युवाओं से आये-दिन नौकरी के नाम पर हो रहे मज़ाक़ ने युवाओं की रोज़गार पाने की हर उम्मीद को धराशायी कर दिया है। इसके लिए सीधे-सीधे वर्तमान सरकार ज़िम्मेदार हैं। सच्चाई यह है कि हरियाणा सरकार व स्टाफ सिलेक्शन कमीशन एक बार फिर बच्चों की ज़िंदगी को अंधकार में धकेल रहे हैं। 04 साल से हरियाणा के युवा हज़ारों करोड़ रुपया खर्च के सेट के जंजाल में धक्के खा रहे हैं और खट्टर सरकार हर रोज़ मनमाने ढंग से मापदंड बदल व भयंकर ग़लतियाँ कर उनकी ज़िंदगियों को लूट रही है। सेट का रिजल्ट ठीक किए बग़ैर एक और पेपर करवाने की बेवकूफाना हड़बड़ी व जल्दबाज़ी क्यों? किस साज़िश के तहत युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेला जा रहा है? खामियाँ, त्रुटियां दूर करके भर्ती पेपर लिया जा सकता है, लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है? जब अगले पेपर में बैठने का आधार ही सेट स्कोर है, तो इस स्कोर को ठीक क्यों नहीं किया जा रहा है?

यदि कल को यह क्लेम किसी का गलत मिलता है, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के समय सैकड़ों ऐसे केस सामने आएंगे, तब उनकी उम्मीदवारी तो आप रद्द कर देंगे, लेकिन उनकी जगह पर जो सही कैंडिडेट पेपर दे सकते थे, उनके साथ तो घोर अन्याय हो जाएगा। 35000 बच्चों की ज़िन्दगियों, उनके करियर, उनके भविष्य का सवाल है, जो 4 साल से इंतज़ार कर रहे हैं। जिन्होंने सोशो-इकोनॉमिक के अंक छोड़े हैं उन्हें अभी भी वे अंक दिए हुए दर्शाये गए हैं। हरियाणा से बाहर के अभ्यर्थियों के ये क्लेम कैसे जांचेंगे? जिनका सेट स्कोर कम है, उन्हें पेपर में बैठने का मौका दिया जा रहा है, जिनके ज़्यादा हैं वे बाहर हैं, ऐसा क्यों? तनाव भरे माहौल के बावजूद पेपर लेने की जल्दी क्या है? हाई कोर्ट के सिंगल बेंच से के सेट नतीजा ख़ारिज होने के बावजूद रातों रात हाई कोर्ट के डबल बेंच में जाकर दरवाज़ा खटखटाने व 24 घंटे में ही पेपर लेने की ज़िद क्यों की गयी? सेट रिजल्ट ख़ारिज होने व 05 तथा 06 अगस्त, 2023 को होने वाला पेपर स्टे होने के बावजूद आनन-फानन में पेपर करवाए गए और एक पेपर के दूसरे पेपर में पचास प्रतिशत हूबहू सवाल पूछ लिए। हद हो गई है? क्या पेपर भी नहीं बनवा सकते हैं, बनवा तो सकते हैं परंतु बनवाने नहीं क्योंकि अगर पेपर सही से बनवा दिए तो हरियाणा के बेरोजगार युवाओं को कैसे मानसिक तौर से परेशान करेंगे, पता न हरियाणा सरकार क्युं ऑंख बन्द किये बैठी है।

इतना बड़ा पेपर है, 4 साल का इंतज़ार, ऐसे कमीशन से रिजल्ट बनाने में त्रुटियां होंगी या ये जानबूझकर करेंगे। क्या यह सीधे-सीधे पेपर सॉल्वर गैंग को हेराफेरी का न्योता नहीं। इस जल्दी का कारण क्या है? जब सेट का रिवाइज़्ड रिजल्ट पूरी तरह से ग़लत है, तो पेपर लेने का औचित्य ही क्या है? इन सबको भी कोर्ट में चुनौती दी जाएगी, तो फिर नौकरियाँ कैसे लगेंगी। जब सेट पास 3,59,000 उम्मीदवारों में से 3,29,000 उम्मीदवार एग्जाम में बैठ ही नहीं पायेंगे, तो फिर सेट की प्रक्रिया के क्या मायने बचे हैं। हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन ने ग्रुप 56 के लिए कट ऑफ नंबर 65 निर्धारित किए हैं तथा ग्रुप 57 के लिए कट ऑफ नंबर 67 निर्धारित किए हैं। पोस्ट से चार गुना उम्मीदवार बुलाने का मतलब है कि लगभग 30,000 बच्चों को रिटन एग्जाम के लिये बुलाया जाएगा। ग्रुप 57 के सभी उम्मीदवार ग्रुप 56 में भी एलिजिबल होंगे। यानि दोनों ग्रुप्स में 90% उम्मीदवार वही होंगे। ऐसे में सेट पास हुए 3,59,000 उम्मीदवारों में से 3,29,000 को रिटन एग्जाम में बैठने का मौक़ा ही नहीं मिलेगा। तो फिर चार साल धक्के खाकर के सेट पास करने का क्या अर्थ रह गया है? इन्होंने जितने ब्लंडर इस भर्ती में किए हैं उनके कारण अगले 10 साल भी मामले न्यायालयों में लटके रहेंगे। जो बच्चे नौकरी लगेंगे उनको भी ये सरकार चैन से सोने नहीं देगी तथा जो नहीं लग पाएंगे उनका तो भविष्य चौपट कर ही दिया है।

About author

Bidamo suresh nandwal
बिदामो सुरेश नांदवाल
आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
आदित्य-शिवम भवन, लार्ड शिवा स्कूल के सामने
शाहपुर रोड, लुदास, हिसार

Related Posts

स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye

July 23, 2022

 स्वयं के जीवन के निर्णय स्वयं से लीजिए!/swayam ke jeevan ke nirnay swayam se lijiye  हम सभी को आम तौर

Draupadi murmu ka mayurganj se rastrpati bhawan tak ka safar

July 22, 2022

द्रौपदी मुरमू का मयूर गंज से राष्ट्रपति भवन तक का सफर यशवंत सिन्हा का एक टीवी चैनल पर साक्षात्कार सुना

हार न मानने की जिद ने पैदा किया कवि और पायी परिस्थितियों पर जीत।

July 21, 2022

हार न मानने की जिद ने पैदा किया कवि और पायी परिस्थितियों पर जीत। ‘तितली है खामोश’ से सत्यवान ‘सौरभ’

एक मजबूत, शक्तिशाली और विकासशील भारत।/ek majboot shaktishali aur vikassheel bharat

July 19, 2022

 एक मजबूत, शक्तिशाली और विकासशील भारत। (उदीयमान प्रबल शक्ति के बावजूद भारत अक्सर वैचारिक ऊहापोह में घिरा रहता है. यही

अत्यधिक ऑनलाइन गेमिंग बच्चों की शिक्षा और सोच पर डाल रही हानिकारक प्रभाव।

July 18, 2022

 अत्यधिक ऑनलाइन गेमिंग बच्चों की शिक्षा और सोच पर डाल रही हानिकारक प्रभाव। सरकार बच्चों के लिए ऑनलाइन गेमिंग घंटे

क्यों वेतनभोगी दुधारू गाय कर के लिए बार-बार दूध दुही जाती है?

July 16, 2022

  क्यों वेतनभोगी दुधारू गाय कर के लिए बार-बार दूध दुही जाती है? प्रियंका ‘सौरभ’ (आखिर एक तनख्वाह से, कितनी

Leave a Comment