Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Nandini_laheja, poem

परमात्मा | Paramatma

परमात्मा  तुम, जो सदा संग रहते हो मेरे,भले नहीं दिखते हो प्रत्यक्ष।पर फिर भी सदा , साथ रहने का अहसास …


परमात्मा 

तुम, जो सदा संग रहते हो मेरे,
भले नहीं दिखते हो प्रत्यक्ष।
पर फिर भी सदा ,

साथ रहने का अहसास कराते हो।
जीवन में अनेक मोड़ आये,
कभी सुख तो कभी दुःख आये।
उस हर इक मोड़ पर, 

तुम सिर्फ तुम मेरे साथी बन जाते हो।
मानव हूँ मैं, करता हूँ सदैव कुछ गलतियां।
वह गलतियां गुनाह न बने,
बनकर मेरे अंतर्मन की आवाज़ 

तुम सिर्फ तुम मुझे सही राह दिखाते हो।
कर्म करते करते थक सा जाता हूँ मैं।
अपनों पर फिर कभी, झल्ला जाता हूँ मैं।
चाहता हूँ जब कुछ सुकून के पल,
तुम सिर्फ तुम मुझे शांत कर जाते हो।
तुम सिर्फ तुम हो वो परम पिता “परमात्मा”
जो हम सब को कभी अकेला नहीं छोड़ते,
कभी माता पिता तो कभी मित्र बन जाते हो।

About author

नंदिनी लहेजा | Nandini laheja
नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

Related Posts

बलात्कार

June 24, 2022

 बलात्कार डॉ. इन्दु कुमारी  दरिंदगी की पहचान है  समाज का अभिशाप है  गंदगी की अंबार है  संकुचित विचारों का  गंदी

पृथ्वी दिवस

June 24, 2022

 पृथ्वी दिवस डॉ. इन्दु कुमारी  वसुंधरा को आइए  पेड़ों से सजाइए  वन बागों से इस धरा पर  जीवन की फसलें

प्रकृति के आंचल

June 24, 2022

 प्रकृति के आंचल डॉ. इन्दु कुमारी  प्रकृति हमारी हम प्रकृति के  सजाएंगे हम तो पाएंगे हम  लगाएंगे हम खाएंगे हम 

बुढ़ापे की मुंडेर

June 24, 2022

 बुढ़ापे की मुंडेर डॉ. इन्दु कुमारी  जन्म लिए बचपन बीते  खुशियों के होंठ खिले  बचपन के छोटे पौधे  फूल रूप

बेटी हुई

June 24, 2022

 बेटी हुई  डॉ. इन्दु कुमारी धीमी आवाज में  कहते बेटी हुई।  पापा देखो तेरी बेटी  आईपीएस की  टॉपर हुई। जिसका

मेघा रे

June 24, 2022

 मेघा रे डॉ. इन्दु कुमारी  मेघा रे कहां तक तुझे जाना रे  मेरे संदेश को ले जाना रे   जिन राहों

PreviousNext

Leave a Comment