Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Preeti Kumari Suman

पता नहीं क्यों

कविता –पता नहीं क्यों मुझे घर का कोइ एक सख्श याद नहीं आता। मुझे याद आता है वो भाव, वो …


कविता –पता नहीं क्यों

मुझे घर का कोइ एक
सख्श याद नहीं आता।
मुझे याद आता है वो भाव,
वो सुखद एहसास
जो पापा के डांट में मिलती है
जो मां के फिक्र में झलकती है
वो भाव, वो स्वाद
जब पेट से जादा
मन भर जाता है
जो सिर्फ मां के हाथों की
पकवानों से ही आता  है
पता नहीं क्यों
मुझे घर की फुलवारी
नहीं याद आती
जिसकी भिन्नी खुशबु
सबका मन मोह लेती है
मुझे याद आता है
घर का आंगन
जहा पछीयां
आती तो है पर
मेरा कलरव नहीं पाती
पाती हैं तो सिर्फ वो सन्नाटा
जिसमें मेरी हंसी की टीश
गुंजती हो
पता नहीं क्यों
मुझे घर का
आलीशान बैठक
याद नहीं आता
याद आता है
मेरे कमरे की तन्हाई
जहां आज भी मां
सिर्फ मुझे अनुभव
करने के लिए
घंटो वक्त बीताती है।
याद आता है
वो कोलाहल भरी यादें
वो उमस भरी रातें
जो मां के बाहों में
पापा के शीतल छांव में,
ज्वर से तपते हुए
युुहीं गुजर गए थे
पता नहीं क्यों
मुझे घर के पर्दो से जादा
मां के आंचल का
रंग भाता है
पता नहीं क्यों
कुल्हङ की चाय से जादा
मां की लोरी याद आती है
पता नहीं क्यों
घर छोड़कर आना होता है
फिर से बुला लो
किसी बहाने मां
मुझे घर से जादा
तेरा याद आता है।

About author

Preeti Kumari Suman

प्रीती कुमारी सुमन
बोधगया, बिहार

Related Posts

Umra bhar rotiyan seki by Vijay lakshmi Pandey

September 30, 2021

 उम्र  भर  रोटियाँ सेंकी…!!! उम्र  भर  रोटियाँ  सेंकी  हमनें , हाथ  जले  तो  असावधानी  हमारी  है। लॉट के  लॉट  बर्तन 

Insan tyag sakta hai by Jitendra Kabir

September 30, 2021

 इंसान त्याग सकता है जब देखता हूं मैं किसी स्वर्ण को  अपने दलित ‘बॉस’ या फिर दलित सहयोगी के साथ

Shipra ke kinare by Dr. H.K. Mishra

September 30, 2021

 शिप्रा के किनारे महाकाल के प्रांगण में जब , हम दोनों चलकर आए थे , दर्शन पूजन कर शिव का

Muktidham by Dr. H.K. Mishra

September 30, 2021

 मुक्तिधाम प्रीत की रीत निभाने को दो गीत मिले गाते गाते, एक प्यार तुम्हारे पाने का, दूजे दर्द भरे एहसासों

Maa mujhe na mar by mainudeen kohri

September 30, 2021

 माँ मुझे ना मार माँ, मैं भी कुल का मान बढाऊँगी । माँ ,मैं भी रिश्तों के बाग सजाऊंगी।। माँ,मुझे

Betiyan by Anita Sharma

September 29, 2021

 बेटियाँ बिटिया से घर संसार है, रौनक घर परिवार है। सबके बीच की अहम् कड़ी। प्यार और विश्वास की मूरत

Leave a Comment