Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

नेताजी – डॉ. इन्दु कुमारी

नेताजी सुभाष चंद्र बोस तू ,गये तो गएभारत माँ के भाल, सजा के गएस्वर्णाक्षरों में नाम, लिखा के गएलाल थे …


नेताजी

नेताजी  - डॉ. इन्दु कुमारी
सुभाष चंद्र बोस तू ,गये तो गए
भारत माँ के भाल, सजा के गए
स्वर्णाक्षरों में नाम, लिखा के गए
लाल थे भारती की, बता के गए
हिंद फौजों की डोली, सजा गए
दुर्गा भाभी कितने, पैदा कर गए
माँ के आँचल में मुँह, छिपाया नहीं
दुश्मनों के डंका ,बजा के गए
वीरता की फसलें, उगा के गए
आजादी की लहरें लहरा गए
शान तिरंगा का ऊँचा ,उठा ही गए
खून माँगा था तूने, आजादी बदले
कितने सुभाष पैदा, करके हो गए
खुद मिटकर दिखाया भारती के। लिए
माँ के चरणों से बढकर कहीं कुछ
नहीं
बलिदानी अभिमानी बना के गए
ईंट का जबाब पत्थर, सीखा गए
आजादी की कीमत अदा कर गए।

डॉ. इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार
वीरता और जज्बा को सलाम
जय हिंद की सेना 


Related Posts

बंद कमरों की घुटन-सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 बंद कमरों की घुटन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने खुद ही खुद को कैद कर लिया है कंक्रीट के

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया

May 9, 2022

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया रचनात्मक नवाचार से जुड़ा विज्ञान आम आदमी के लिए जीवन में सहजता लाता है

शोहरतों का परचम- सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 शोहरतों का परचम शोहरतों के परचम  लहराने का गर इरादा है तो कुछ ऐसा कीजिए जो अलग हो औरों से

ज़िंदगी- सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 ज़िंदगी वाह री जिंदगी तू भी कितनी अजीब जाने क्या क्या गुल खिलाती है कभी हंसाती, कभी रुलाती है और

कविता – ख्वाब – सिद्धार्थ गोरखपुरी

May 9, 2022

 कविता – ख्वाब  ये ख्वाब न होते तो क्या होता? झोपड़ी में रहने वाले लोग जब थोड़े व्यथित हो जाते

जलियांवाला बाग-

May 9, 2022

 जलियांवाला बाग बैशाखी का पावन दिन तारीख तेरह अप्रैल उन्नीस सौ उन्नीस एक सभा हो रही थी रौलेट एक्ट का

PreviousNext

Leave a Comment