Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

mainuddin_Kohri, poem

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “

नी बखत री बात धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी । सोनै सी गोरी बाळू रेत …


नी बखत री बात

नी बखत री बात-मईनुदीन कोहरी"नाचीज़ "

धोरां री आ ” धरती , धीरज री धरा सांतरी ।

सोनै सी गोरी बाळू रेत , अबै उजड़ी जाय।।
बढ़तै मानखै रै कारणै ,भाव आकाशां जाय ।
जमीं आळा सामां जोवै , सोधा रबड़ी खाय ।।
ऊंचै धोरां झूंपड़ी , बखत- बखत री बात ।
हैरिटेज-होटलां अबै,पौंची झुंपडली रै मांय।।
मीठो तेजो कुण गावै,कठै बाजै अळगोंजा ।
गावणियां नुमायशां में ,सुणीजै कदैई-कदाय।।
कठै गय्यी फागणियै री रातां ,कुण उगैरै गीत।
टीवी-टैपां उद्बुदा गीत,अबै अणुता सुणाय।।
चूंदड़ी-मोंठडां रा पेच,सिणगार करता छैला ।
ब्याव-ऐढे एक्को-दुक्को,साफै निजर आय।।
राबड़ी अर् खीचड़ो,हरख्यां करतो हो हिंवड़ो ।
सुपनै जियां हुय्य गय्या वार-तिंवारां ही खाय।।
“नाचीज़”कठै गई कांकड़ां ,कठै गय्यो धीणो।
अबै टाबर तरसै दूध नैं ,दूध टँकी सूं आय ।।

मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ “
मो .9680868028
मौहल्ला कोहरियान् बीकानेर


Related Posts

कविता-उम्मीद

May 10, 2022

 उम्मीद  उदास रातों में उम्मीद की शमां जलाओ यारो  सन्नाटे की दीवारों पर खुशियां सजाओ यारो  फिर ये ख़ामोशी भी

घमासान

May 10, 2022

 घमासान क्यों हो रहीं हैं घुटन क्यों डर रहा हैं मन कहीं तो हो रहा हैं इंसानियत पर जुल्म घुट

वो ख्यालात मोहब्बत के

May 10, 2022

 वो ख्यालात मोहब्बत के तेरे तसव्वुर ए ख्यालात में अकसर दिल खोता है एसा लगे चांदनी रात में चांद चांदनी

बंद कमरों की घुटन-सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 बंद कमरों की घुटन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने खुद ही खुद को कैद कर लिया है कंक्रीट के

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया

May 9, 2022

कविता डिजिटल भारत मेक इन इंडिया रचनात्मक नवाचार से जुड़ा विज्ञान आम आदमी के लिए जीवन में सहजता लाता है

शोहरतों का परचम- सुधीर श्रीवास्तव

May 9, 2022

 शोहरतों का परचम शोहरतों के परचम  लहराने का गर इरादा है तो कुछ ऐसा कीजिए जो अलग हो औरों से

PreviousNext

Leave a Comment