हमारे आंगन में है एक पेड़,
नीम का पेड़, बड़ा ही गढ़।
छांव देता, हवा भी ठंडी,
उसके नीचे लगे हैं मंडी।
पत्ते उसके थोड़े कड़वे,
पर काम आते सबके घर में।
दवा बनें, नहलाएं तन,
नीम है बच्चों का सच्चा मन।
पंछी बैठे उसकी डाली,
झूला बनती नीम की प्याली।
दादी बोली – “इससे सीखो,
नीम सरीखा मीठा बनो।“
नीम हमें सिखलाता है,
सादा जीवन सबसे अच्छा है।
पेड़ लगाओ, नीम लगाए,
धरती मां भी खुश हो जाए।
– डॉ. मुल्ला आदम अली
तिरुपति – आंध्र प्रदेश
