Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

नीम का पेड़ – बच्चों के लिए प्रेरक बाल कविता

हमारे आंगन में है एक पेड़, नीम का पेड़, बड़ा ही गढ़। छांव देता, हवा भी ठंडी, उसके नीचे लगे …


हमारे आंगन में है एक पेड़,
नीम का पेड़, बड़ा ही गढ़।
छांव देता, हवा भी ठंडी,
उसके नीचे लगे हैं मंडी।

पत्ते उसके थोड़े कड़वे,
पर काम आते सबके घर में।
दवा बनें, नहलाएं तन,
नीम है बच्चों का सच्चा मन।

पंछी बैठे उसकी डाली,
झूला बनती नीम की प्याली।
दादी बोली – “इससे सीखो,
नीम सरीखा मीठा बनो।“

नीम हमें सिखलाता है,
सादा जीवन सबसे अच्छा है।
पेड़ लगाओ, नीम लगाए,
धरती मां भी खुश हो जाए।

– डॉ. मुल्ला आदम अली
तिरुपति – आंध्र प्रदेश


Related Posts

दोनों बातें खतरनाक हैं- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 8, 2021

 दोनों बातें खतरनाक हैं किसी परिवार का मुखियापरिवार के किसी सदस्य कीनाराजगी के डर सेचुप्पी साध लेता है जबअपने परिवार

सूनापन अखरता”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

सूनापन अखरता अकेले चुपचाप खड़ी हो ,देख रही थी,जहाँ दुनिया बसती थी । सूनापन पसरा था कमरे में,जहाँ रौनक रहती

मंथरा- सुधीर श्रीवास्तव

December 8, 2021

 मंथरा आज ही नहीं आदि से हम भले ही मंथरा को दोषी ठहराते, पापी मानते हैं पर जरा सोचिये कि

मन- डॉ.इन्दु कुमारी

December 8, 2021

 मन रे मन तू चंचल घोड़ासरपट दौड़ लगाता हैलगाम धरी नहीं कसकेत्राहि त्राहि मचाने वाली जीवन की जो हरियालीपैरों तले

मेरा एक सवाल- विजय लक्ष्मी पाण्डेय

December 8, 2021

मेरा एक सवाल…!!! पढ़े लिखे काका भैया से,मेरा एक सवाल।माँ -बहनों की गाली से ,कब होगा देश आजाद.?? अरे !

उलझे-बिखरे सब”- अनीता शर्मा

December 8, 2021

उलझे-बिखरे सब” कितने उलझे-उलझे हुए सब , कितने बिखरे-बिखरे हुए सब। बनावटी दुनिया में उलझे हुए सब, दिखावटी सब सज-धज

Leave a Comment