Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

निरंकुश उन्मुक्तता को कैसे थामें

निरंकुश उन्मुक्तता को कैसे थामें धर्म और संस्कार की नींव पर खड़ा हिंदुस्तानी समाज एक तहजीब और संस्कारी,शिष्ट गिना जाता …


निरंकुश उन्मुक्तता को कैसे थामें

धर्म और संस्कार की नींव पर खड़ा हिंदुस्तानी समाज एक तहजीब और संस्कारी,शिष्ट गिना जाता रहा हैं।एक मर्यादा वाले समाज को नारी मुक्ति और नारी सशक्तिकरण के नाम से अमर्यादित राहों पर आयोजन पूर्वक उन सुलक्षणों से बाहर निकाल नैतिक पतन की और जबरन घसीटा जा रहा हैं।क्या दोस्ती के नाम पर लड़कों से शारीरिक संबंध रखना वाजिब हैं? जिससे वह दोनों उन्मूमुक्त महीनों के या सालों के लिए साथ रह दूूसरे की तलाश में निकल पड़ते हैं।उन्हे आधुनिक बनजारें कहा जाना चाहिए।लेकिन बंजारों में भी कुछ नियम कानून हुआ करते हैं। सेक्स को प्राधान्य दिया जाने लगा जो प्रवृत्ति पशुओं में भी नहीं हैं ( पशुओं में संवानन काल में ही नर और नारी पशु मिलते हैं )उसे मानव में उजागर करने के लिए फिल्म,सम्यिकों अब तो टीवी और ओ टी टी प्लेटफार्म का उपयोग किया जा रहा हैं।यहां तक कि विज्ञापनों में भी यही कुछ दखया जा रहा हैं। विज्ञापन चाहे किसी चीज का हो उसमें छोटे कपड़े़ों वाली लड़की का होना आवश्यक बी बन जाता हैं।जहां नशा बेफाम,सेक्स बेफाम,बड़ों की इज्जत न कर उनसे जबान लडानी आदि सब (श्श्व्य)श्रव्य और दृश्य माध्यमों से दिन रात देखने के बाद अपने युवा और बच्चे क्या सिख पाएंगे ये सोच दिल दहल जाता हैं।

विवाह जैसे सामाजिक संस्कार और कौटुंबिक व्यवस्था की खुल्ले आम धज्जियां लिव इन रिलेशनशिप के तहत उड़ाई जा रही हैं। कौन और कैसे बचा पाएगा अपने संस्कार और शिस्त को इस पतन से।उन्मुक्तता तो मन की संयमित भावनाओं को कहा जा सकता हैं।नहीं कि बदचलनी के आलम को।
इस अवनीति को रोकने के लिए माता पिता खुद को अपने आप को बदलना पड़ेगा।संयुक्त परिवार ने रह कर बच्चों को दादा दादी के प्यार भरे अनुशासन में बढ़ने से संस्कारों का निरूपण हो पाएगा।खुद को स्वतंत्र रहना हैं तो बच्चें स्वच्छंद ही बनेंगे।
थोड़ा धर्म ध्यान करने वालें भी धर्म में कही बातों को लक्ष में रख खुद ही स्वनियंत्रित रह पाएंगे।

About author  

Jayshree birimi
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद (गुजरात)

Related Posts

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान

July 24, 2025

आंतरिक सौंदर्यता एवं प्रतिभा हे मनुष्य की सच्ची पहचान एक ऐसी दुनिया में जहां शारीरिक रूप अक्सर केंद्र बिंदु होता

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

 ऐसे थे जननायक प्रधानमंत्री चंद्रशेखर

July 7, 2025

“चाह गई चिंता मिटी मनुआ बेपरवाह जाको कछु ना चाहिए वो शाहन के शाह” कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रद्धेय द्वारिका

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

साहित्य, टेक्नोलाॅजी और हम

June 10, 2025

साहित्य की रचना में टेक्नोलाॅजी की बात अब जरा भी नई नहीं है। भविष्य में अनेक मोर्चे पर टेक्नोलाॅजी और

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी

May 26, 2024

सावधानी से चुने माहौल, मित्र एवं जीवनसाथी अगर आप विजेता बनना चाहते हैं, तो विजेताओं के साथ रहें। अगर आप

विचारों की भी होती है मौत

विचारों की भी होती है मौत

May 26, 2024

प्रत्येक दिन दिमाग में 6,000 विचार आते हैं, इनमें 80% नकारात्मक होते हैं। इन नकारात्मक विचारों से दूर रहने के

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह

May 26, 2024

स्पष्ट लक्ष्य, सफलता की राह तीरंदाज एक बार में एक ही लक्ष्य पर निशाना साधता है। गोली चलाने वाला एक

Leave a Comment