Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसे

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम! कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती, अगर मासिक धर्म …


ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम!

ना होता मासिक धर्म, ना होता तेरा जनम- डॉ. माध्वी बोरसेकुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती,
अगर मासिक धर्म नहीं होते, तो कोई मां, मां नहीं होती!
अरे मूर्ख, किस बात से शरमाता है तू,
जिसकी वजह से, इस धरती पर जन्म लेता है तू!

हम तो 21वीं सदी में जी रहे हैं,
सभी के सभी शिक्षा भी ग्रहण कर रहे हैं!
यह तो एक प्रकृति से दिया हुआ मासिक धर्म,
क्यों बनाए रखे हो बीमारी का भरम!

यह तो मानव अधिकार है,
हम जहां चाहे वहां जा सके,
चाहे वह मंदिर हो या मजार है!

किस बात की हिचकिचाहट हमें,
किस बात की घबराहट तुम्हें,
जब शिशु की आहट नहीं रह सकते हो बिना सुने,
तो मासिक धर्म पर भी खुलकर चर्चा करो,
कि हर औरत सही स्वास्थ्य चुने!

चलो बनाएं खुद को शिक्षित और समझदार,
इस वक्त में ले, सही आराम और आहार,
इसे ना समझे, किसी भी तरह का प्रहार,
सब कुछ जानते हुए फिर भी शर्म आए,
तो हम पर है धिक्कार!

कुदरत से दी गई चीजें, कभी खराब नहीं होती,
अगर मासिक धर्म नहीं होते, तो कोई मां, मां नहीं होती!
अरे मूर्ख, किस बात से शरमाता है तू,
जिसकी वजह से, इस धरती पर जन्म लेता है तू!

डॉ. माध्वी बोरसे
( स्वरचित व मौलिक रचना)
(रावतभाटा) राजस्थान!


Related Posts

कविता – न मिला

September 1, 2022

कविता – न मिला एक उम्र खरच कर कुछ न मिलातुमको क्या पता सचमुच न मिलाक्या हुआ है कोई धरती

कविता – बे-परवाह जमाना

September 1, 2022

कविता – बे-परवाह जमाना ये मन अक्सर बुनता रहता है ,ख्वाबों का ताना बाना ।दिल भी अक्सर छेड़े रहता है

कविता – नयन

September 1, 2022

कविता – नयन दोनों नयन सावन बनकररिमझिम – रिमझिम बरसात करेंसमझ तनिक आता ही नहींके कितने हैं जज़्बात भरे मौन

कविता -शहर चलाता है

September 1, 2022

रिक्शा, ऑटोरिक्शा, इलेट्रिक रिक्शा चलाने वाले भाईयों को समर्पित रचना कविता -शहर चलाता है जो बिना थके सारा शहर चलाता

कविता – शिव और सावन

September 1, 2022

कविता – शिव और सावन सावन शिव हुए अवतरित धरती परसावन में निज ससुराल गएहुआ अर्घ्य और जलाभिषेक से स्वागत

सावन की बौछार

September 1, 2022

 सावन की बौछार सावन की बौछार यारतन – मन को भिगाती हैमस्त फुहारें इस सावन कीयाद किसी की दिलाती है

PreviousNext

Leave a Comment