Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

mainuddin_Kohri, poem

नारी सब पर भारी हो | Naari par kavita

नारी सब पर भारी हो ! नारी हो तुमसब पर भारी होतुम किसी की बेटी बनघर की रौनक बन जाती …


नारी सब पर भारी हो !

नारी सब पर भारी हो | Naari par kavita

नारी हो तुम
सब पर भारी हो
तुम किसी की बेटी बन
घर की रौनक बन जाती हो
नारी हो तुम
सब पर भारी हो ….. !

तुम बहन के रूप में
भाई की कलाई पर
पवित्र धागा बांध
भाई से रक्षा बंधन का भाव पाती हो
नारी हो तुम
सब पर भारी हो ….. !

नानी-दादी से बनते
कई रिश्तों की सौगात से
घर-परिवार-समाज को
अद्भूत सौन्दर्य से निखारती हो
नारी हो तुम
सब से भारी हो ….. !

वैवाहिक बंधन में बंध
गृहलक्ष्मी की भूमिका में
प्रेम,समर्पण,मर्यादा से
घर संसार को रोशन करती हो
नारी हो तुम
सब से भारी हो ….. !

धरती सा धीरज तो तुम हो
प्यार, दुलार,शक्ति-विश्वास की खान
तुम जननी,जीवन का सार हो
माँ, बन,जग में महान कहलाती हो
नारी हो तुम
सब से भारी हो ….. !!!

About author

मईनुदीन कोहरी"नाचीज बीकानेरी"

मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ बीकानेरी”

मोहल्ला कोहरियांन बीकानेर


Related Posts

प्रणय की धारा- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

प्रणय की धारा मन का स्रोत बहुत है गहरा ,मन से निकली प्रणयकी धारा ,मन और धन का खेल निराला,

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं- जितेन्द्र ‘कबीर

December 22, 2021

पैसे ऐंठने तक सीमित हैं साक्षात् भगवान का रूप मानतेहैं उसे,कुछ ही हैं लेकिन ऐसे,ज्यादातर ‘डाक्टर’ अंधे हुए पड़े हैंदवाई

रुकना तो कायरो का काम है!-डॉ. माध्वी बोरसे

December 22, 2021

रुकना तो कायरो का काम है! चलते जाए चलते जाए, यही तो जिंदगी का नाम है,आगे आगे बढ़ते जाए,रुकना तो

मृत्यु कविता-नंदिनी लहेजा

December 22, 2021

मृत्यु क्यों भागता हैं इंसान तू मुझसे इक अटल सत्य हूँ मैंजीवन का सफर जहाँ ख़त्म है होतावह मंजिल मृत्यु

चिंतन के क्षण- डॉ हरे कृष्ण मिश्र

December 22, 2021

चिंतन के क्षण रोम रोम में बसी है यादें,बचा नहीं कुछ अपना है,तेरे मेरे अपने सारे सपने,बिखर गए सारे के

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी- जितेन्द्र ‘कबीर’

December 22, 2021

बेरोजगारी का एक पहलू यह भी आजकल लोगों कोघर का काम करने के लिएईमानदार और मेहनती लोग नहीं मिलते,जमीन का

Leave a Comment