Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी

नारी क्या है तेरी लाचारी क्यों बनती तू बेचारीरिश्तो को निभाती आईजैसे बदन को ढकती साड़ीनारी !नारी!!ओ नारीस्व को मिटाने …


नारी

नारी- डॉ. इन्दु कुमारी
क्या है तेरी लाचारी

क्यों बनती तू बेचारी
रिश्तो को निभाती आई
जैसे बदन को ढकती साड़ी
नारी !नारी!!ओ नारी
स्व को मिटाने वाली
स्नेह को बरसाने वाली
पौधों सी तू परोपकारी
प्रेम में तू सदा हारी
नारी !नारी !!ओ नारी
आंँचल की छाया देने वाली
बत्तीसौ सुवा (धार) दूध पिलाने वाली
ममता सदा लूटाने वाली
क्या यही है तेरी कहानी
जहां कोई करे मनमानी
हार सदा तू क्यों मानी
जरूरत पड़े प्रेम बरसाओ
हैवानियत पर चप्पल उठाओ
अगर दामन है बचानी
नारी है कुल को ताड़ी
लांछन लगाए गर व्यभिचारी
साजिश की शिकार होती आई
मुंह तोड़ जवाब दे भारी
अंदर में है अपार शक्ति
झांककर तो देख प्यारी
झांसी की रानी बन जा
दिखा दे निज शक्ति सारी
नारी !नारी !!ओ नारी।

डॉ. इन्दु कुमारी मधेपुरा बिहार


Related Posts

कविता- हौंसला तुम्हारा…

March 7, 2023

नन्हीं कड़ी में…. आज की बात हौंसला तुम्हारा…(कविता) हे नारी, हो पाक-पवित्र इतनी तुम,समाज ने टटोला हमेशा तुम्हें।पग-पग पर मज़ाक

मुस्कुराना सीख रही

March 6, 2023

मुस्कुराना सीख रही मुस्कुराना सीख रही हूँ तुम्हारे बिना जीना सीख रही हूँहाँ आज फिर से मुस्कुराना सीख रही हूँजो

मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है

March 6, 2023

भावनानी के भाव मेहनत ज़रूर करो पर सब योग है किसी का ईश्वर अल्लाह पर अपार विश्वास है कोई नास्तिक

आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें

March 6, 2023

 भावनानी के भाव आओ ख़ुशी से जीने की आस कायम रखें आओ खुशी से जीने की आस कायम रखें हम 

वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है

March 6, 2023

भावनानी के भाव वैश्विक पटल पर भारत तीव्रता से बढ़ रहा है रक्षा क्षेत्र में समझौतों के झंडे गाड़ रहे

कविता एकत्व | kavita ekatatva

March 5, 2023

  एकत्व  एकाकी, एकाकी, जीवन है एकाकी । मैं भी हूं एकाकी तू भी है एकाकी, जीवन पथ पर है

PreviousNext

Leave a Comment