Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, lekh

नाम के सितारे

नाम के सितारे कुछ अरसे पहले कोई पान मसाले के विज्ञापन में तीन तीन सुपर स्टार के काम करने पर …


नाम के सितारे

कुछ अरसे पहले कोई पान मसाले के विज्ञापन में तीन तीन सुपर स्टार के काम करने पर जनता नाराज हो रही थी,सही भी हैं जिन्हें हम हीरो समझते हैं वहीं समाज के लिए जो हानिकारक हैं वैसी चीजों के विज्ञापन में काम करके युवाओं को उस का उपयोग करने के लिए उकसाते हैं वे कहां के सितारे हुए।वे तो कार्य समाज के हित में नहीं अपनी तिजोरियां भरने के लिए ही करते हैं।तो ये हमारा भी फर्ज बनता हैं कि जब वे समाज के लिए नहीं हैं तो समाज क्यों उनका बने?उनकी विज्ञापन वाली चीजों का बहिष्कार क्यों न करें?ये खयाल सारे कथित बॉलीवुड वाले कलाकारों का ही लगता हैं।
देखें तो बाहुबली के हीरो प्रभास ने तो कोई भी विज्ञापन में काम करने मना ही कर दिया था।केजीएफ चैप्टर २ के मशहूर हीरो यश ने भी पान गुटका के विज्ञापन में काम करने से इन्कार ही कर दिया था,इसे
ही तो नैतिकता कहते हैं।यही विज्ञापन में कार्य करने के लिए पुष्पा फिल्म के हीरो अल्लू अर्जुन को भी मौका मिल रहा था और उसने भी इन्कार कर दिया था।पहले अल्लू अर्जुन सिर्फ दक्षिण भारत में ही मशहूर थे लेकिन आज पूरे देश की चाहत बने हुए हैं।शराब के उत्पादन में टोच की कंपनी ने भी उन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाने की ऑफर की थी जिसे भी ठुकराया दिया था।वैसे एक विज्ञापन के 7 करोड़ लेने वाले को दस करोड़ मिले तो वह मान ही जायेगा यही इच्छा से शराब कंपनी ने ऑफर दिया था लेकिन उन्होंने ये कह कर ठुकरा दिया कि उनकी प्रेरणा ले युवान लोग शराब पीने के लिए प्रेरित होके बुरी आदतों के चंगुल में फसेंगे ये बात उन्हें पसंद नहीं हैं। इसी बात पर अल्लू की लोकप्रियता में इजाफा हो रहा हैं,एक प्रकार से सम्मान भी मिल रहा हैं। वैसे तो हमारे देश में शराब का विज्ञापन करना गैरकानूनी हैं फिर भी सोड़ा के नाम पर शराब की कंपनियों का विज्ञापन बड़े बड़े हीरो कर रहे हैं,जैसे अर्जुन रामपाल,संजय दत्त आदि।
हिंदी हीरो से ज्यादा जागरूक दक्षिण भारत के हीरो हैं जिन्हे समाज और उसके युवाओं की परवाह हैं।इसीलिए उन्होंने उन विज्ञापनों और उससे होने वाले आर्थिक फायदों को नहीं, देश के युवाओं के भविष्य के बारे में सोचा हैं।
जब कि अभी अभी चर्चा में रहे शाहरुख खान,अजय देवगन और अक्षय कुमार को कोई भी क्षोभ नहीं हैं ऐसे विज्ञापनों में काम करने में।अक्षय कुमार ने तो आंख चुभाई बात कर दी कि वह छोड़ रहा हैं इस विज्ञापन को लेकिन अभी भी उसी विज्ञापन में दिखाई देता हैं।दूसरों को तो कोई भी हर्ज नहीं दिखाई देता ऐसे विज्ञापनों में काम करने में।
आम तौर पर समाज और युवाओं पर इन तथाकथित हीरो का उनके जीवन पर असर पड़ता हैं जिसे खयाल में रख उन लोगों को आचरण करना चाहिएं,ये उनकी एक नैतिक फर्ज हैं।
अल्लू,प्रभास और यश की आज सब जगह प्रशंशा की जा रही हैं।जिन्हें ने आर्थिक क्षति सहन करके भी जिम्मेवारी के साथ देश के युवाओं को बर्बाद करने वाली आदतों से दूर रखने की कोशिश की।उन्होंने दूसरों की तरह ये नहीं सोचा कि वे नहीं तो कोई ओर ये विज्ञापन कर लेगा तो वे खुद ही क्यों नहीं कर लें।
समाज और युवाओं को गैरमार्ग पर ले जाने वालें कार्य को नहीं स्वीकारना ही उनकी स्टारडम हैं,स्वार्थ रहित हो सिर्फ समाज के हित को ध्यान रखना ही एक प्रकार से देश भक्ति हैं।चाहे हम सैनिक बन सरहद पर लड़ने नहीं जा पाए किन्तु अपने कार्यों द्वारा,देश के कानूनों का मान रख कर,देश के प्रति फर्ज का पालन करके भी हम देश सेवा कर सकते हैं, इसका समाज में प्रचलन होना आवश्यक हैं।
वैसे भी उन्हों ने परदे पर बॉलीवुड स्टार्स के पीछे छोड़ आगे आ ही गाएं हैं, अब नीतिमत्ता में भी बहुत आगे निकल गए हैं।

About Author

जयश्री बिरमी सेवानिवृत शिक्षिका  अहमदाबाद

जयश्री बिरमी

सेवानिवृत शिक्षिका 
अहमदाबाद


Related Posts

Awaz uthana kitna jaruri hai?

Awaz uthana kitna jaruri hai?

December 20, 2020

Awaz uthana kitna jaruri hai?(आवाज़ उठाना कितना जरूरी है ?) आवाज़ उठाना कितना जरूरी है ये बस वही समझ सकता

azadi aur hm-lekh

November 30, 2020

azadi aur hm-lekh आज मौजूदा देश की हालात देखते हुए यह लिखना पड़ रहा है की ग्राम प्रधान से लेकर

Previous

Leave a Comment