Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Dr-indu-kumari, poem

नव वर्ष सुहानी- डॉ.इन्दु कुमारी

नव वर्ष सुहानी आम्र मंजरों से से लदे हुए फल फूलों से सजे हुएकली कुसुम मुस्कान भरे हैंकोयल सुर में …


नव वर्ष सुहानी

नव वर्ष सुहानी-  डॉ.इन्दु कुमारी

आम्र मंजरों से से लदे हुए
फल फूलों से सजे हुए
कली कुसुम मुस्कान भरे हैं
कोयल सुर में तान भरे हैं
नव पल्लव कैसे झूम रहे हैं
हवाएं अपनी मस्त वेग से
जैसे गगन को चूम रहे हैं
नदियां बलखाती चलती
दिल में मिलन की लगन लगी है
मस्त बहारें प्रेम धुन में
मस्ती के गाने गा रहे हैं
चिड़िया की है शान निराली
कितनी लगती प्यारी-प्यारी
नववर्ष की वेला सुहानी
लगती है जैसे मस्तानी
नव वर्ष लाई इतनी सौगाते
प्रेम की बरसे है फुहारे
फल फूलों के बाग बगीचे
लग रहे हैं बड़े सुहावने
धरती अन्नपूर्णा कहलाती
फसलें पककर खलिहान सजाती
कृषकों के होठों की मुस्कान
नव वर्ष को है खूब सजाती
गांव की गोरी चैती गाती
खुशियों से जीवन सज जाती
ऐसे नववर्ष आए हैं
खुशियों के तराने गाए हैं।

डॉ.इन्दु कुमारी
मधेपुरा बिहार


Related Posts

नफरत की आग

June 24, 2022

 नफरत की आग जितेन्द्र ‘कबीर’ आग! आग से बुझती नहीं कभी, बुझती है रेत या फिर पानी से, नफरत की

ईश्वर क्या है?

June 24, 2022

 ईश्वर क्या है? जितेन्द्र ‘कबीर’ एक उम्मीद है! कुछ अच्छा होने की, अपने जीवन में कठिनाइयों से जूझते इंसान के

ऐसे बदलाव नहीं आएंगे

June 24, 2022

 ऐसे बदलाव नहीं आएंगे जितेन्द्र ‘कबीर’ सिर्फ इसलिए कि हमें बुरा लगता है देखना… देश को दंगे-फसादों में जलते हुए,

कोई क्या कर पाएगा?

June 24, 2022

 कोई क्या कर पाएगा? जितेन्द्र ‘कबीर’ बहुत मेधावी होगा अगर किसी का बच्चा तो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, खिलाड़ी या

दुनियादारी

June 24, 2022

 दुनियादारी जितेन्द्र ‘कबीर’ बड़े खुश थे सभी चुप रहा करते थे जब तक, जरा सी जुबान जो खोली तो शिकवे

लूट मची है लूट

June 24, 2022

 लूट मची है लूट जितेन्द्र ‘कबीर’ शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो छोटे-बड़े ‘कुकुरमुत्ते’ उग आए हैं अवसर पाकर,

PreviousNext

Leave a Comment