Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

poem, Veerendra Jain

नववर्ष मंगल भावना | navvarsh mangal bhavna

नववर्ष मंगल भावना नव वर्ष में कुछ यूं जहां में प्रेम का विस्तार हो,ना कोई भूखा हो शहर में बीमार …


नववर्ष मंगल भावना

नववर्ष मंगल भावना | navvarsh mangal bhavna

नव वर्ष में कुछ यूं जहां में प्रेम का विस्तार हो,
ना कोई भूखा हो शहर में बीमार ना लाचार हो !!

भला कब तलक चांद में रोटी देखता रहेगा वो,
खत्म हर बच्चे की सूनी आंखों की इंतजार हो !

ना रहे संसार में वैमनस्य और घृणा कहीं कोई,
हिंदू मुस्लिम ईसाई सिक्ख का आपस में प्यार हो!

कराह चीख औ पुकार सहे कब तलक ये ज़मीं ,
रोग हो ना कोई रगों में स्वस्थ सारा संसार हो !

सुकून और खुशी हर किसी के दिल में हो, गोया
हरेक दिन जगत में मन रहा ये प्रेम का त्योहार हो !

About author 

Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Veerendra Jain, Nagpur
Instagram id : v_jain13


Related Posts

प्यारा बचपन-अनिता शर्मा

March 25, 2022

प्यारा बचपन परिवार में बड़ी शक्ति है मन प्रसन्नता से भर जाता बच्चों का खिलता चेहरा तो सराबोर हो हर

होलिका दहन-अनिता शर्मा

March 25, 2022

होलिका दहन जला कर राख कर दो अपनी सभी दुर्भावनाएॅ।चलो मनों में भरे सद्भावनामिटाये बैर दिलों से अपने।दहन कर दे

आशा- अनिता शर्मा

March 25, 2022

आशा उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा,कौन हो तुम?हौले से पूछा।उसने आंखो में चमक भर कहा,मैं तो हूँ,तुम्हारी ही आशा ।एक

बसंत-अनिता शर्मा झाँसी

March 25, 2022

बसंत बसंत की बहार आई ,रंगों की फुहार लाई।चले आओ सजना घर के अंगना ।रंगों संग उमंग लाई,चेहरों पर निखार

भारतीय नारी अबला या सबला-अनिता शर्मा झाँसी

March 25, 2022

भारतीय नारी अबला या सबला भारतीय संस्कृति की प्रतीक तूधन्य धन्य तू हे भारत की नारी ।कब अबला थी ,त्याग

चाँद सी माँ-अनिता शर्मा झाँसी

March 25, 2022

चाँद सी माँ चाँद की शीतलता माँ में देखीशांत भावुकता से भरी हुई।बच्चों को देखकर मुस्कुरातीज्यों शरद् चंद्र,श्वेत रजत बिखरे।स्निग्धता

Leave a Comment