Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Nandini_laheja, poem

नटखट कृष्ण | natkhat krishna

नटखट कृष्ण कान्हा, तेरी देख सुंदर छवि प्यारी,मन हुआ विकारों से खाली।मनभावन अखियां तेरी,मोहक मुस्कान है।मोरपंख से सुशोभित मुकुट तेरा,घुंगराले …


नटखट कृष्ण

नटखट कृष्ण | natkhat krishna

कान्हा, तेरी देख सुंदर छवि प्यारी,
मन हुआ विकारों से खाली।
मनभावन अखियां तेरी,मोहक मुस्कान है।
मोरपंख से सुशोभित मुकुट तेरा,घुंगराले बाल हैं।
बांसुरी कैसे देखो, अधरन छूने को आतुर।
बिन सुने तान जिसकी, मन होता बड़ा व्याकुल।
सुन्दर- सलोना तेरा, रूप अति भाये।
दर्शन मात्र से, ह्रदय प्रेम-भक्ति से भर जाये।
कृष्णा-कन्हैया मेरे ,हे मुरलीधर,
अब तो बरसा दे ,आशीष अपनी हम पर।
हम सब कान्हा तेरे, प्रेम के दीवाने।
बस चाहें कृपा तेरी, और कुछ ना जाने।
कर दे दया, अब बनवारी।
देख सुंदर छवि प्यारी,
मन हुआ विकारों से खाली।

About author 

नंदिनी लहेजा | Nandini laheja
नंदिनी लहेजा
रायपुर(छत्तीसगढ़)
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

Related Posts

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन -मईनुदीन कोहरी”नाचीज़ बीकानेरी”

January 25, 2022

ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन । ए-जमीन-ए-वतन ,ए-ज़मीन-ए-वतन ।तुझको मेरा नमन , तुझको मेरा नमन ।। आबरू तेरी जाने नां देंगें कभी ।

दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार

January 24, 2022

भज़नदे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार दे दो दर की नौकरी सतगुरु जी एक बार बस इतनी

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…

January 24, 2022

गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में…. नन्हीं कड़ी में…. आज की बात जीना चाहता हूँ… (कविता…) मैं भी किसी के आँख का तारा

हिंदू राष्ट्र-दीप मदिरा

January 24, 2022

हिंदू राष्ट्र मैं हिंदू राष्ट्र का समर्थक हूं। अगर तुम देने को तैयार हो समानताकिसी को नहीं बता रहे हो

आगे बढ़ते हैं!-डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

आगे बढ़ते हैं! वक्त बीत गया, समा बदल गया, चलो सब भूल कर आगे बढ़ते हैं,दिल में लाए दया,अब और

यही कुछ फर्क है!- डॉ. माध्वी बोरसे!

January 24, 2022

यही कुछ फर्क है! जब नहीं था हमारे पास अलार्म, स्वयं से याद रखते थे सारे काम,ना था मोबाइल फोन

Leave a Comment