Follow us:
Register
🖋️ Lekh ✒️ Poem 📖 Stories 📘 Laghukatha 💬 Quotes 🗒️ Book Review ✈️ Travel

Jayshree_birmi, poem

नई आस- जयश्री बिरमी

नई आस बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आसहर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास …


नई आस

नई आस- जयश्री बिरमी
बहुत दिनों के बाद अब जगी हैं एक नई आस
हर्षोल्लास के दिन भी थे ये दिलाती हैं एहसास

खेलते दौड़ते थे बच्चे और बतियातीं थी हम
खो गया था ,हो गया था ये सब एक स्वप्न

जाते थे खुश खुश लाने घर का सामान
और अब दौड़ते भागते घर की राह ढूंढते हैं आसान

जाते थे जब घूमने फिरने
और लेते थे आस्वाद व्यंजनों का

अब घर में ही लेते हैं स्वाद हर व्यंजन का
काश अब नए साल में लौट आए दिन पुराने

और न आए दोबारा वो दिन
अनचाहे

खूब जमेगी महफिलें दोस्तों की
और होगी मुलाकातें हरदम

नई आस अब नए साल में नए वरण के साथ आएं
अब तो गए बीत हैं बरसों तरसते हैं रिश्ते
खुलके जीने को हैं ये मन तरसे

जयश्री बिरमी
अहमदाबाद


Related Posts

कितनी ओर फाइलें

June 4, 2022

कितनी ओर फाइलें Jayshree birmi कश्मीर फाइल्स देखी तो दिल को बहुत ठेस पहुंची थी। जो अत्याचार अपने ही वतन

लघुकथा एक मां का इंतजार

June 4, 2022

 लघुकथाएक मां का इंतजार जीवी मां ने बड़े दुःख सह कर मोहन को पढ़ाया था।20 साल की उम्र में मोहन

भीड़ या भीड़ का हिस्सा

June 4, 2022

 भीड़ या भीड़ का हिस्सा हम सब बीरबल की इस कहानी से सुपरिचित हैं ही। एक बार राजा अकबर अपने

साहित्यकार महान

June 4, 2022

 साहित्यकार महान शब्दों के महाजाल का चक्रव्यूह बड़ा जंजाल इसमें उलझ सुलझ बने तीखे शब्द विकार लेखक है रोक ना

मदर अर्थ, पृथ्वी!

June 4, 2022

 मदर अर्थ, पृथ्वी! मैं हूं सौरमंडल की सबसे सुंदर ग्रह,जहां जीव जंतु का जीवन है संभव,निवास करती है मुझ में

शिकायतें ना करें!

June 4, 2022

 शिकायतें ना करें! क्यों करें किसी से शिकायत, क्या स्वयं हे हम इसके लायक, खुद को आईने मैं झांके तो,

PreviousNext

Leave a Comment