धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
October 1, 2021
धरोहर हम सबके लिए हमारे बुजुर्ग धरोहर की तरह हैं, जिस तरह हम सब रीति रिवाजों, त्योहारों, परम्पराओं को सम्मान
October 1, 2021
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October 1, 2021
वृध्द दिवस बुढ़ापो बुढापो तो सगलां नैं आसी । ओ’ बुढापो तो घणो दोरो रे ।।
October 1, 2021
स्वर कोकिला लता मंगेशकर हुई 92 साल की स्वरों की देवी
October 1, 2021
माटी के लाल शास्त्री जय जवान जय किसान का नारा दिया यह लाल पाकिस्तान के मंसूबों को पानी फेर दिखाया
September 30, 2021
परेशानी है , परेशान आज जहां सुख तलाश करता चहूं दिस ओर। कुछ लिखने कि कोशिश करता हूं