धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
November 7, 2021
रावण को हर बार आना है रावण लौट आया है, मन बड़ा घबराया है। छोटी को कहा था, बाहर मत
November 7, 2021
रोटियाँ…!!! हमनें पूरे जीवन में कुल दस रोटियाँ बनाईं पहली माँ के लोइयों को थपथपाई खुशियाँ मनाई नाची
November 7, 2021
हथकड़ियाँ पहना दे….!!! प्रतिबन्धित जब हरी कलाई , हथकड़ियाँ पहना दे…!! कंगन की खन-खन में चूड़ी
November 7, 2021
अश्रु बहते है अश्क ही आंखो के द्वार से खुशी हो तो भी बहेंगे ये गम में तो बहने का
November 7, 2021
त्यौहारों के बहाने त्यौहारों के बहाने घर लौट पाते हैं… रोजी – रोटी के खातिर अपने घरों से दूर रहने