धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
January 13, 2022
उनके संज्ञान में क्यों नहीं है? हर बार सामने आती हैंजांच एजेंसियों कीदेरी और लापरवाही की खबरेंबलात्कार,हत्या जैसे संगीन मामलों
January 13, 2022
सम्मान का बोझ कहीं पढ़ा था की लड़कियों का आत्मसम्मान बढ़ाओ शादी की उम्र नहीं,सही बात हैं,लड़कियों को सम्मान मिलना
January 13, 2022
परछाईं वक्त कितना भी बदल जायेहम कितने भी आधुनिक हो जायें, कितने भी गरीब या अमीर होंराजा या रंक हों
January 13, 2022
आज की द्रौपदी एक तो द्रौपदी थी तबअनेक है आज भीक्यों बचा न पाए आज के कृष्णजब बिलखती हैं वहआज
January 13, 2022
हिन्दी बेचारी राष्ट्र है मेरे अपने घरभारती हूँ मैं कहलाती जनमानस की हूँ सदासरल अभिव्यक्ति मैं राजदुलारी जन सभा कीअवहेलना
January 13, 2022
आने वाला पल आने वाला पल तो आकर ही रहेगा, जैसे जाने वाला पल भीभला कब ठहरा है ? क्योंकि