धूप छांव
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
कभी कभी हंसी के फुहारे कभी बहे गुम के आंसू
तो जीवन बने सफल टूट न जाएं कोई
सदा सुख तो होवे नहीं दुःख भी न हरदम होई
रब जी भी हैं दयावान किंतु कर्म फल ये होई
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
धूप छांव जिंदगी के रूप कई कहीं मिले धूप छांव आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार …
आती दुःख की धूप तो सुख की छांव भी अपार
जयश्री बिरमी
अहमदाबाद
(स्वरचित)
February 7, 2022
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February 7, 2022
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February 7, 2022
कविताविश्व प्रसिद्ध भारत के अनमोल संस्कार विश्व प्रसिद्ध भारतीय संस्कार अनमोल मोती है रोज़ माता-पिता चरण स्पर्श से शुरुआत होती
February 7, 2022
दिल्ली शहर! भारतीय गणराज्य की राजधानी,इसका इतिहास है गौरवशाली,एक विशेष केंद्र शासित प्रदेश,महाभारत काल से इसका उल्लेख रहा विशेष! देश
February 7, 2022
अधूरे ख़्वाब मन की अनेकों हसरतों को, इक सांचे में जो ढाले।नयनों में समाते है वो,बन ख़्वाब बड़े ही प्यारे।लक्ष
February 7, 2022
कविताकृत्रिम बुद्धिमता आजकल कृत्रिम बुद्धिमता की लहर छाई है हर काम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भावना समाई है मानवीय दिनचर्या